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यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड: सुरक्षा मानकों पर राज्य सरकार नहीं दे सकी जवाब, अब केंद्र को हाईकोर्ट का नोटिस

Mon, 19 Oct 2026 12:43 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 19 Oct 2026 12:43 PM IST
सार

यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी पर सख्त रुख अपनाया है। हादसे वाली बस में नियमों का पालन हुआ था या नहीं, इस पर राज्य सरकार जवाब नहीं दे सकी। कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी कर रात में बसों की जांच और मॉडिफाइड बसों की निगरानी के लिए समेकित योजना पेश करने का आदेश दिया है।

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Yamuna Expressway bus fire incident: State government fails to provide answers regarding safety standards
यमुना एक्सप्रेस वे बस हादसा। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए बस अग्निकांड के बावजूद सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने पर सख्त है। कोर्ट के आदेश पर राज्य सरकार ने सुरक्षा मानकों के पालन के नाम पर गाड़ियों के चालान और सीज करने के आंकड़े पेश किए। हादसे वाली बस में मानकों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी जानकारी सरकार नहीं दे सकी। लिहाजा, अब कोर्ट ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने बस अग्निकांड की अमर उजाला में प्रकाशित खबर का स्वत: संज्ञान लेते हुए शुरू की गई सुनवाई के दौरान दिया है। साथ ही राज्य सरकार को रात में बसों की जांच, निर्धारित स्थानों पर उनके रुकने की व्यवस्था की निगरानी और मॉडिफाइड बसों की जांच के लिए समेकित योजना तैयार कर अगली सुनवाई पर 17 नवंबर को पेश करने का आदेश दिया है। डीजीपी ने भी हलफनामा दाखिल किया था।
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मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे

यमुना एक्सप्रेसवे पर 24 सितंबर 2026 को हुए हादसे के बाद अमर उजाला में पीड़ित यात्रियों के हवाले से मरना है तो मरो, बस नहीं रोकेंगे शीर्षक से प्रकाशित खबर का 25 सितंबर को कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया था। कोर्ट ने राज्य सरकार से हलफनामे पर विस्तृत जानकारी तलब की थी।

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छह माह में 7,665 चालान, 1,008 बसें सीज

परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव ने हलफनामा दाखिल किया। बताया कि अप्रैल 2026 से सितंबर 2026 के बीच छह विशेष जांच अभियानों में 7,665 बसों का चालान किया गया। 1,008 बसें सीज की गईं। इसी अवधि में स्लीपर बसों के लिए जारी ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की संख्या बढ़कर 1,104 हो गई। वहीं, 2023 में 252, 2024 में 340 और 2025 में 610 परमिट जारी किए गए थे। यह भी बताया कि परमिट जारी करने से पहले वाहन का फिटनेस चेक किया जाता है। प्रदेश की सीमाओं पर स्थायी चेकिंग बिंदु नहीं हैं। इससे प्रवर्तन दल औचक जांच करते हैं। दूसरे राज्यों के ऑटोमैटिक टेस्टिंग स्टेशन (एटीएस) यूपी के नियंत्रण में नहीं हैं। लिहाजा, केंद्रीय मंत्रालय से सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन कराने के लिए निर्देश जारी करने की जरूरत है।

तीन साल में देशभर में 45 अग्निकांड, 64 यात्रियों की मौत

कोर्ट ने अपने आदेश में राज्यसभा में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री की ओर से साझा आंकड़ों का हवाला भी दिया है। इसके मुताबिक जनवरी 2023 से 10 दिसंबर 2025 के बीच देश में बसों में आग की 45 घटनाएं हुईं, जिनमें 64 यात्रियों की मौत व 145 घायल हुए। यूपी में भी रायबरेली-प्रयागराज-लखनऊ मार्ग पर जुलाई 2023 में तीन, कन्नौज-लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर नवंबर 2024 में चार और दिसंबर 2025 में यमुना एक्सप्रेसवे पर 13 लोगों की मौत का उल्लेख किया गया।

बस की बनावट से लेकर इमरजेंसी गेट तक पर नजर

कोर्ट ने स्लीपर बसों के लिए निर्धारित ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड का हवाला भी दिया। कहा कि एआईएस-119 में स्लीपर कोच और एआईएस-135 में आग का पता लगाने व उसे नियंत्रित करने की व्यवस्था के मानक निर्धारित हैं। इनमें आपातकालीन निकास, बस की ऊंचाई, यात्रियों के आने-जाने के रास्ते और आग से बचाव की प्रणालियां शामिल हैं।

हादसे में शामिल बस ने सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी कोर्ट के सामने नहीं है। यदि मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो चालक और परिचालक ही नहीं, बल्कि लाइसेंस धारक के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाए। जरूरत पड़ने पर बस संचालन पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार किया जा सकता है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट

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