विश्व जल दिवस : भूजल दोहन से खतरनाक जोन में जिला शहरी क्षेत्र में स्थिति बेहद चिंताजनक
बारिश के बाद विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार झूंसी में 2018 में 9.90 मीटर जलस्तर था। हालांकि, आगे के वर्षों में सुधार देखा गया और 2021 में 6.72 मीटर ऊंचाई तक जल आ गया था लेकिन 2023 में भूजल 10.40 मीटर नीचे चला गया।
विस्तार
भूजल दोहन की विस्तारित क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक हो गई है। नैनी का बड़ा इलाका तो क्रिटिकल जोन में चला गया है। वहीं झूंसी में इस दौरान जल स्तर में करीब पांच मीटर तक गिरावट दर्ज की गई। शहर के अन्य हिस्सों में भी भूजल के अतिदोहन की स्थिति लगातार बनी हुई है। शहरी क्षेत्र के ज्यादातर मोहल्लों में पांच वर्षों में आधा मीटर से तीन मीटर तक की गिरावट दर्ज की गई है। इसका नतीजा हे कि प्रयागराज अत्यधिक भूजल दोहन वाले जिलों में शामिल है।
बारिश के बाद विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार झूंसी में 2018 में 9.90 मीटर जलस्तर था। हालांकि, आगे के वर्षों में सुधार देखा गया और 2021 में 6.72 मीटर ऊंचाई तक जल आ गया था लेकिन 2023 में भूजल 10.40 मीटर नीचे चला गया। नैनी औद्योगिक क्षेत्र में इसी अवधि में जलस्तर 8.45 मीटर से गिरकर करीब साढ़े 13 मीटर तक पहुंच गया है। कटघर में भी 2017 में जल स्तर 4.20 मीटर था जो 2023 में 11 मीटर के करीब पहुंच गया। यानी, करीब 6.80 मीटर की गिरावट दर्ज की गई है।
राहत की बात इतनी जरूर है कि इस दौरान सिविल लाइंस, जार्जटाउन, टैगोरटाउन, साउथ मलाका, खुल्दाबाद जैसे मोहल्लों में जलस्तर में बहुत अधिक गिरावट तो नहीं दर्ज की गई है लेकिन इन क्षेत्रों में भूजल पहले से ही खतरनाक स्तर पर है। भूजल दोहन को रोकने के लिए लगाई गई पाबंदियों का असर ग्रामीण इलाकों में कुछ हद तक दिखा लेकिन शहर में अति दोहन की स्थिति लगातार बनी हुई है। सर्किट हाउस, खुल्दाबाद समेत एक दर्जन से अधिक मोहल्लों में जलस्तर 25 मीटर के करीब पहुंच गया है, जो काफी खतरनाक है।
कुछ मोहल्लों में जल स्तर की स्थिति
मोहल्ले 2018 (भूजल स्तर मीटर में) 2022 (भूजल स्तर मीटर में)
अशोक नगर 13.10 13.62
बेली अस्पताल 19.50 20.50
कसारी मसारी 12.90 13.09जार्जटाउन 7.50 10.00
खुल्दाबाद 12.15 15.75
अतिदोहित क्षेत्रों में प्रयागराज शहरी व चाका ब्लॉक
भूजल स्तर और दोहन के स्तर पर प्रयागराज का शहरी क्षेत्र तथा चाका ब्लॉक अतिदोहित श्रेणी में हैं। बहादुरपुर, बहरिया, होलागढ़, सैदाबाद, मऊआइमा, फूलपुर, प्रतापपुर, शृंग्वेरपुर तथा धनुपुर सेमी क्रिटिकल जोन में शामिल हैं। वहीं चाका और सहसों क्रिटिकल ब्लाॅक में शामिल हैं। धनुपुर, प्रतापपुर ब्लॉक क्रिटिकल से सेमी क्रिटिकल जोन में आ गए हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के भूजल स्तर में कुछ सुधार देखा गया है। शहरी क्षेत्र में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। अब व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भूजल के उपयोग पर शुल्क का प्रावधान किया गया है। लोगों से भी अपील है कि भूजल दोहन कम करने के साथ रिचार्ज करने पर भी ध्यान दें। - रविकांत सिंह, अधिशासी अभियंता, भूजल
100 से अधिक आरओ प्लांट को भेजा जाएगा दूसरा नोटिस
गली-गली चल रहे आरओ प्लांट तथा वाहन धुलाई केंद्रों पर नकेल कसने की तैयारी शुरू कर दी गई है। 100 से अधिक प्लांट संचालकों को नोटिस भेजा गया है। जल्द ही दूसरा नोटिस भेजा जाएगा। आरओ प्लां में फ्लो एवं पिजो मीटर लगाना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने वाले आरओ प्लांट सीज किए जाएंगे। इसके अलावा वाहन धुलाई केंद्रों को भी नोटिस भेजा गया है।