फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   World Blood Pressure Day: BP should be checked regularly, otherwise the life of mother and child will

World Blood Pressure Day : नियमित हो बीपी की जांच, वरना खतरे में होगी जज्जा-बच्चा की जान

Sat, 17 May 2025 01:53 PM IST
विनोद सिंह पुनीत त्रिपाठी, प्रयागराज
पुनीत त्रिपाठी, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 17 May 2025 01:53 PM IST
सार

गर्भधारण के दौरान महिलाओं की नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच होनी बेहद जरूरी है। वरना जच्चा-बच्चा की जान को खतरा हो सकता है। वहीं, पहले गर्भधारण के दौरान अगर महिला को बीपी है तो दूसरी प्रेग्नेंसी में भी संभावना है।

विज्ञापन
World Blood Pressure Day: BP should be checked regularly, otherwise the life of mother and child will
ब्लड प्रेशर - फोटो : Freepik.com

विस्तार

गर्भधारण के दौरान महिलाओं की नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच होनी बेहद जरूरी है। वरना जच्चा-बच्चा की जान को खतरा हो सकता है। वहीं, पहले गर्भधारण के दौरान अगर महिला को बीपी है तो दूसरी प्रेग्नेंसी में भी संभावना है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में 500 गर्भवती महिलाओं पर किए गए शोध में यह बात सामने आई है।

विज्ञापन


शोध में पता चला कि हर 10वीं महिला को बीपी की शिकायत है। जबकि हर 30वीं महिला सीवियर बीपी से ग्रस्त है। इनमें झटके आने की शिकायत भी मिली है। वहीं, गर्भधारण के दौरान शुरुआत में ही बीपी का इलाज होने से जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहते हैं। वरना यह जानलेवा भी हो सकता है।
विज्ञापन


एमएलएन मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसआरएन टर्सरी सेंटर के रूप में स्थापित है। स्त्री रोग विभाग के शोध में 25 से 35 साल की 500 गर्भवती महिलाओं को लिया गया। दिसंबर 2023 से दिसंबर 2024 तक चले शोध में करीब 300 महिलाएं बीपी से ग्रसित मिलीं। इसके अलावा 50 महिलाओं में सीवियर बीपी पाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं, महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु में रक्त का संचार सही नहीं पाया गया। इसके अलावा जन्म लेने के बाद बच्चे का विकास भी कमजोर पाया गया। जिन महिलाओं को सीवियर बीपी था, उनमें हर पांचवें जच्चा-बच्चा में जान का खतरा पाया गया। शोध का यह निष्कर्ष निकला कि गर्भवती महिलाओं के बीपी की नियमित जांच हो। ऐसा करने से जच्चा व बच्चा दोनों सुरक्षित रहते हैं। 

गर्भवती महिलाओं में हाई बीपी के लक्षण

1-सिरदर्द।
2-धुंधली दृष्टि।
3-पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द।
4-अचानक वजन बढ़ना।
5-शरीर में सूजन।
6-चक्कर आना, सांस लेने में कठिनाई या मतली।

क्या है उपाय

1-फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले डेयरी उत्पादों का सेवन करें। नमक और चीनी का सेवन सीमित करें।
2-डॉक्टर की सलाह से व्यायाम करें, जैसे कि चलना, तैरना या योग।
3- रात में 7-8 घंटे की नींद लें।
4-तनाव कम करने के लिए ध्यान, योग या गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज करें।
5-नमक का सेवन कम करें।
6-भरपूर तरल पदार्थ का सेवन करें।
7-रोजाना शारीरिक गतिविधि करें।
8-शराब और स्मोकिंग से बचें।

गर्भधारण के दौरान 140 हो अधिकतम बीपी

गर्भधारण के दौरान महिलाओं का बीपी अधिकतम 140 और न्यूनतम 90 से कम होना चाहिए। इसके अलावा सीवियर बीपी अधिकतम 160 व न्यूनतम 110 होना चाहिए।

गर्भधारण के दौरान शुरुआती दौर में बीपी की जांच जरूरी है। जानकारी देर से होने पर जच्चा-बच्चा का जीवन खतरे में पड़ सकता है। - डॉ. अमृता चौरसिया, विभागाध्यक्ष, स्त्री रोग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed