World Blood Pressure Day : नियमित हो बीपी की जांच, वरना खतरे में होगी जज्जा-बच्चा की जान
गर्भधारण के दौरान महिलाओं की नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच होनी बेहद जरूरी है। वरना जच्चा-बच्चा की जान को खतरा हो सकता है। वहीं, पहले गर्भधारण के दौरान अगर महिला को बीपी है तो दूसरी प्रेग्नेंसी में भी संभावना है।
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गर्भधारण के दौरान महिलाओं की नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच होनी बेहद जरूरी है। वरना जच्चा-बच्चा की जान को खतरा हो सकता है। वहीं, पहले गर्भधारण के दौरान अगर महिला को बीपी है तो दूसरी प्रेग्नेंसी में भी संभावना है। मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग में 500 गर्भवती महिलाओं पर किए गए शोध में यह बात सामने आई है।
शोध में पता चला कि हर 10वीं महिला को बीपी की शिकायत है। जबकि हर 30वीं महिला सीवियर बीपी से ग्रस्त है। इनमें झटके आने की शिकायत भी मिली है। वहीं, गर्भधारण के दौरान शुरुआत में ही बीपी का इलाज होने से जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहते हैं। वरना यह जानलेवा भी हो सकता है।
एमएलएन मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एसआरएन टर्सरी सेंटर के रूप में स्थापित है। स्त्री रोग विभाग के शोध में 25 से 35 साल की 500 गर्भवती महिलाओं को लिया गया। दिसंबर 2023 से दिसंबर 2024 तक चले शोध में करीब 300 महिलाएं बीपी से ग्रसित मिलीं। इसके अलावा 50 महिलाओं में सीवियर बीपी पाया गया।
वहीं, महिलाओं के गर्भ में पल रहे शिशु में रक्त का संचार सही नहीं पाया गया। इसके अलावा जन्म लेने के बाद बच्चे का विकास भी कमजोर पाया गया। जिन महिलाओं को सीवियर बीपी था, उनमें हर पांचवें जच्चा-बच्चा में जान का खतरा पाया गया। शोध का यह निष्कर्ष निकला कि गर्भवती महिलाओं के बीपी की नियमित जांच हो। ऐसा करने से जच्चा व बच्चा दोनों सुरक्षित रहते हैं।
गर्भवती महिलाओं में हाई बीपी के लक्षण
1-सिरदर्द।
2-धुंधली दृष्टि।
3-पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द।
4-अचानक वजन बढ़ना।
5-शरीर में सूजन।
6-चक्कर आना, सांस लेने में कठिनाई या मतली।
क्या है उपाय
1-फल, सब्जियां, साबुत अनाज और कम वसा वाले डेयरी उत्पादों का सेवन करें। नमक और चीनी का सेवन सीमित करें।
2-डॉक्टर की सलाह से व्यायाम करें, जैसे कि चलना, तैरना या योग।
3- रात में 7-8 घंटे की नींद लें।
4-तनाव कम करने के लिए ध्यान, योग या गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज करें।
5-नमक का सेवन कम करें।
6-भरपूर तरल पदार्थ का सेवन करें।
7-रोजाना शारीरिक गतिविधि करें।
8-शराब और स्मोकिंग से बचें।
गर्भधारण के दौरान 140 हो अधिकतम बीपी
गर्भधारण के दौरान महिलाओं का बीपी अधिकतम 140 और न्यूनतम 90 से कम होना चाहिए। इसके अलावा सीवियर बीपी अधिकतम 160 व न्यूनतम 110 होना चाहिए।
गर्भधारण के दौरान शुरुआती दौर में बीपी की जांच जरूरी है। जानकारी देर से होने पर जच्चा-बच्चा का जीवन खतरे में पड़ सकता है। - डॉ. अमृता चौरसिया, विभागाध्यक्ष, स्त्री रोग, एमएलएन मेडिकल कॉलेज।