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मेजा से पहली बार महिला जीती
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 12 Mar 2017 02:14 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मेजा के वोटरों ने भी कमाल किया और कमल खिला दिया। इसके साथ ही नीलम करवरिया इस सीट से पहली महिला विधायक भी बनीं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता राम सेवक पटेल को लगभग 20 हजार मतों से हराया। नीलम को कुल 67807 मत मिले, जबकि राम सेवक को 47964 मत मिले। तीसरे स्थान पर रहे बसपा के एसके मिश्र को 44622 मत मिले।
मतगणना के दौरान पहले राउंड में आगे रहीं नीलम दूसरे एवं तीसरे राउंड में सपा के राम सेवक पटेल से पिछड़ कर दूसरे स्थान पर चली गईं, इसके बाद जैसे मतगणना आगे बढ़ी नीलम लगातार पहले स्थान पर रहीं। मेजा विधानसभा क्षेत्र ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र है। यहां इस बिरादरी के मतदाताओं की संख्या लगभग एक लाख है। चुनाव पलटने में इनकी अहम भूमिका मानी जा रही है। साथ ही 50 हजार के लगभग पिछड़ी जाति के मतदाता हैं, इसमें यादवों और पटेल की संख्या अधिक है। 40 हजार मुस्लिम और इतने ही दलित और 35 हजार अन्य जातियों के मतदाता भी हैं। इस चुनाव में सपा से पटेल प्रत्याशी होने के कारण पटेलों का एकमुश्त वोट उनकी ओर गया। वहीं भाजपा प्रत्याशी को ब्राह्मणों के मत मिले। बसपा का प्रत्याशी भूमिहार जाति से होने के कारण वह अपनी जाति के 18 हजार एवं बसपा के पारंपरिक वोट के सहारे रहे। अन्य पिछड़ी जातियों के भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण होने से नीलम मैदान मारने में सफल रहीं।
मेजा से विधायक चुनी गईं नीलम करवरिया राजनीतिक परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता बांदा से विधायक रहे हैं। पति उदयभान करवरिया भी सहकारी बैंक के चेयरमैन से राजनीति शुरू करके बारा विधानसभा से दो बार विधायक चुने गए। उनके जेठ कपिलमुनि करवरिया फूलपुर से सांसद एवं देवर सूरजभान करवरिया इलाहाबाद-कौशांबी क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। एमए की डिग्री रखने वाले नीलम अपने क्षेत्र में महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। उनके पति उदयभान लगातार भाजपा में है, उनके साथ चुनाव में वह सक्रिय रही हैं।
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प्रत्याशियों को मिले मत
0 नीलम करवरिया-भाजपा- - 67807
0 राम सेवक पटेल- सपा- - 47964
0 एसके मिश्र -बसपा- -44622
0 सर्वेश चंद्र- निर्बल इंडियन शोषित दल- 11535
0 नोटा -2459
अन्य प्रत्याशियों को मिले मत
0 राष्ट्रीय लोकदल के हंसराज को 675, बहुजन मुक्ति मोर्चा के कृष्णकांत को 509, लोक गठबंधन पार्टी के जनार्दन को 278, प्रगतिशील समाज पार्टी के रविंद्र कुमार को 220, देश शक्ति पार्टी के लल्लन को 526, निर्दल अनिल कुमार को 542, अमित राज को 248, विमल चंद्र को 546, महेंद्र कुमार को 492,सत्येंद्र सिंह 1434, सूर्य भान 1327 मत मिले।
विधायक की प्राथमिकताएं
0 मेजा से पहली बार विधायक चुनीं गई नीलम करवरिया ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वह क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के साथ महिलाओं के हितों को लेकर संघर्ष करेंगी। उन्होंने कहा कि हर महिला को उसके अधिकार मिलें, यही उनकी प्राथमिकता होगी। सड़क, बिजली, पानी की समस्या दूर होगी। लोगों की आवाज शासन तक पहुंचाऊंगी। उन्होंने कहा कि उनकी जीत के साथ मेजा भाजपा में गुटबाजी खत्म हो गई।
मेजा में चलता था कुंवर का सिक्का
2012 में नवगठित मेजा विधानसभा सीट इससे पूर्व आरक्षित सीट थी, इस सीट में मेजा का दक्षिणांचल एवं मांडा और कोरांव ब्लाक पूरी तरह से शामिल था। नए परिसीमन के बाद मेजा विधानसभा सीट को सामान्य कर दिया गया। इस सीट से पहली बार गिरीश चंद्र पांडेय गामा विधायक चुने गए थे। मेजा विधानसभा के अधिकांश क्षेत्र सीट के पुर्नगठन से पहले कुंवर रेवती रमण सिंह के गढ़ के रूप में चर्चित थे। नवगठित विधानसभा में मांडा एवं मेजा के क्षेत्र को शामिल किए जाने के बाद उनका प्रभाव खत्म हो गया। इसी का परिणाम है कि मेजा क्षेत्र के ब्राह्मण बहुल होने केबाद भी यहां से दूसरी जाति के लोग चुनाव जीतते रहे। 2007 एवं 2012 में कलेक्टर पांडेय एवं गामा पांडेय इसके अपवाद हैं।
कमल गोइंदी के बाद पहली बार महिला प्रतिनिधि
0 भारतीय जनता पार्टी की नीलम करवरिया मेजा विधान सभा से पूरे जिले में अकेली महिला प्रतिनिधि चुनी गई हैं। वह आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करेंगी। इससे पूर्व मेजा-करछना विधान सभा सीट से आजादी के बाद हुए विधान सभा चुनाव में 1957 में स्वतंत्रता सेनानी कमल गोइंदी पहली बार मेजा-करछना से विधायक चुनी गई थीं। उस समय मेजा विधानसभा सीट का बड़ा हिस्सा करछना विधानसभा में शामिल था।
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मतगणना के दौरान पहले राउंड में आगे रहीं नीलम दूसरे एवं तीसरे राउंड में सपा के राम सेवक पटेल से पिछड़ कर दूसरे स्थान पर चली गईं, इसके बाद जैसे मतगणना आगे बढ़ी नीलम लगातार पहले स्थान पर रहीं। मेजा विधानसभा क्षेत्र ब्राह्मण बाहुल्य क्षेत्र है। यहां इस बिरादरी के मतदाताओं की संख्या लगभग एक लाख है। चुनाव पलटने में इनकी अहम भूमिका मानी जा रही है। साथ ही 50 हजार के लगभग पिछड़ी जाति के मतदाता हैं, इसमें यादवों और पटेल की संख्या अधिक है। 40 हजार मुस्लिम और इतने ही दलित और 35 हजार अन्य जातियों के मतदाता भी हैं। इस चुनाव में सपा से पटेल प्रत्याशी होने के कारण पटेलों का एकमुश्त वोट उनकी ओर गया। वहीं भाजपा प्रत्याशी को ब्राह्मणों के मत मिले। बसपा का प्रत्याशी भूमिहार जाति से होने के कारण वह अपनी जाति के 18 हजार एवं बसपा के पारंपरिक वोट के सहारे रहे। अन्य पिछड़ी जातियों के भाजपा के पक्ष में ध्रुवीकरण होने से नीलम मैदान मारने में सफल रहीं।
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मेजा से विधायक चुनी गईं नीलम करवरिया राजनीतिक परिवार से संबंध रखती हैं। उनके पिता बांदा से विधायक रहे हैं। पति उदयभान करवरिया भी सहकारी बैंक के चेयरमैन से राजनीति शुरू करके बारा विधानसभा से दो बार विधायक चुने गए। उनके जेठ कपिलमुनि करवरिया फूलपुर से सांसद एवं देवर सूरजभान करवरिया इलाहाबाद-कौशांबी क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य रह चुके हैं। एमए की डिग्री रखने वाले नीलम अपने क्षेत्र में महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। उनके पति उदयभान लगातार भाजपा में है, उनके साथ चुनाव में वह सक्रिय रही हैं।
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प्रत्याशियों को मिले मत
0 नीलम करवरिया-भाजपा- - 67807
0 राम सेवक पटेल- सपा- - 47964
0 एसके मिश्र -बसपा- -44622
0 सर्वेश चंद्र- निर्बल इंडियन शोषित दल- 11535
0 नोटा -2459
अन्य प्रत्याशियों को मिले मत
0 राष्ट्रीय लोकदल के हंसराज को 675, बहुजन मुक्ति मोर्चा के कृष्णकांत को 509, लोक गठबंधन पार्टी के जनार्दन को 278, प्रगतिशील समाज पार्टी के रविंद्र कुमार को 220, देश शक्ति पार्टी के लल्लन को 526, निर्दल अनिल कुमार को 542, अमित राज को 248, विमल चंद्र को 546, महेंद्र कुमार को 492,सत्येंद्र सिंह 1434, सूर्य भान 1327 मत मिले।
विधायक की प्राथमिकताएं
0 मेजा से पहली बार विधायक चुनीं गई नीलम करवरिया ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वह क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के साथ महिलाओं के हितों को लेकर संघर्ष करेंगी। उन्होंने कहा कि हर महिला को उसके अधिकार मिलें, यही उनकी प्राथमिकता होगी। सड़क, बिजली, पानी की समस्या दूर होगी। लोगों की आवाज शासन तक पहुंचाऊंगी। उन्होंने कहा कि उनकी जीत के साथ मेजा भाजपा में गुटबाजी खत्म हो गई।
मेजा में चलता था कुंवर का सिक्का
2012 में नवगठित मेजा विधानसभा सीट इससे पूर्व आरक्षित सीट थी, इस सीट में मेजा का दक्षिणांचल एवं मांडा और कोरांव ब्लाक पूरी तरह से शामिल था। नए परिसीमन के बाद मेजा विधानसभा सीट को सामान्य कर दिया गया। इस सीट से पहली बार गिरीश चंद्र पांडेय गामा विधायक चुने गए थे। मेजा विधानसभा के अधिकांश क्षेत्र सीट के पुर्नगठन से पहले कुंवर रेवती रमण सिंह के गढ़ के रूप में चर्चित थे। नवगठित विधानसभा में मांडा एवं मेजा के क्षेत्र को शामिल किए जाने के बाद उनका प्रभाव खत्म हो गया। इसी का परिणाम है कि मेजा क्षेत्र के ब्राह्मण बहुल होने केबाद भी यहां से दूसरी जाति के लोग चुनाव जीतते रहे। 2007 एवं 2012 में कलेक्टर पांडेय एवं गामा पांडेय इसके अपवाद हैं।
कमल गोइंदी के बाद पहली बार महिला प्रतिनिधि
0 भारतीय जनता पार्टी की नीलम करवरिया मेजा विधान सभा से पूरे जिले में अकेली महिला प्रतिनिधि चुनी गई हैं। वह आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करेंगी। इससे पूर्व मेजा-करछना विधान सभा सीट से आजादी के बाद हुए विधान सभा चुनाव में 1957 में स्वतंत्रता सेनानी कमल गोइंदी पहली बार मेजा-करछना से विधायक चुनी गई थीं। उस समय मेजा विधानसभा सीट का बड़ा हिस्सा करछना विधानसभा में शामिल था।