अतीक हत्याकांड : विधवा की कब्जा ली जमीन, दलित युवक से मांगी रंगदारी, बिल्डर मुस्लिम पर लग चुके हैं आरोप
अतीक-अशरफ हत्याकांड के बाद चर्चा में आए लखनऊ के बिल्डर मो. मुस्लिम पर विधवा महिला की जमीन कब्जाने से लेकर दलित युवक से रंगदारी मांगने तक के आरोप लग चुके हैं। पिछले साल ही उस पर धूमनगंज थाने में तीन मुकदमे दर्ज हुए थे।
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अतीक-अशरफ हत्याकांड के बाद चर्चा में आए लखनऊ के बिल्डर मो. मुस्लिम पर विधवा महिला की जमीन कब्जाने से लेकर दलित युवक से रंगदारी मांगने तक के आरोप लग चुके हैं। पिछले साल ही उस पर धूमनगंज थाने में तीन मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें से एक मुकदमा उमेश पाल ने दर्ज कराया था। चौंकाने वाली बात यह है कि महीनों बीतने के बाद भी इन मामलों में कार्रवाई नहीं हुई।
फर्जी इकरारनामे से हड़पी जमीन, धमकाया
बिल्डर व उसके दो साथियों पर पिछले साल जून में गयासुद्दीनपुर धूमनगंज निवासी सुमन देवी ने मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप है कि अभियुक्त शाहा उर्फ पीपलगांव स्थित उसकी 2850 वर्ग मीटर जमीन को फर्जी इकरारनामे के जरिये हड़पना चाहते हैं। यही नहीं उसकी एक आराजी की जमीन पर आरोपियों ने अवैध तरीके से बाउंड्रीवाल बनवाकर प्लॉटिंग भी की थी, जिसे पीडीए ने ध्वस्त कराया है। आरोपी घर पर चढ़कर उसे जान से मारने की धमकी देते हैं।
कट्टा सटाकर कहा- 20 लाख दो तब जमीन पर करो निर्माणइससे पहले मई 2022 में शाहा उर्फ पीपलगांव निवासी सूरजपाल ने मो. मुस्लिम समेत छह लोगों को नामजद कराया था। आरोप लगाया कि असदुल्लाहपुर स्थित अपनी जमीन पर वह निर्माण कराने गया था, तभी खालिद जफर, दिलीप कुशवाहा व मो. मुस्लिम समेत अन्य आए। फिर कट्टा सटाकर धमकाया कि यह अशरफ विधायक की प्लाटिंग है, 20 लाख रुपये रंगदारी दो तब निर्माण करने देंगे।
उमेश से मांगे थे एक करोड़
मो. मुस्लिम अपने साथियों के साथ पिछले साल अगस्त में उमेश पाल से भी रंगदारी मांगने में नामजद हुआ था। उमेश ने आरोप लगाया था कि अतीक गिरोह के सक्रिय सदस्य खालिद जफर निवासी कसारी मसारी, मो. मुस्लिम निवासी चकिया, दिलीप कुशवाहा निवासी चरवा कौशाम्बी व अन्य उसकी जमीन जबरन कब्जाना चाहते हैं। जब-जब वह चौहद्दी पर पत्थर गड़वाने जाते हैं तो आरोपी असलहा लेकर पहुंच जाते हैं और रोक देते हैं। 11 फरवरी 2022 को जमीन पर जाने पर वहां मौजूद खालिद जफर ने असलहा सटाकर धमकी दी। कहा कि सांसद अतीक भाई का आदेश है कि एक करोड़ दो वरना इस जमीन को भूल जाओ।
दो मुकदमों में दलित उत्पीड़न की धाराएंखबर में उल्लेखित जिन तीन मुकदमों का जिक्र है, उनमें से दो में एससी-एसटी एक्ट की भी धाराएं लगी हैं। इसके अलावा दोनों मुकदमों में रंगदारी मांगने, दस्तावेजों की कूटरचना समेत गंभीर धाराएं भी हैं। इसके बावजूद इन मामलों में कार्रवाई शिथिल रही। इस मामले में एसीपी धूमनगंज महेंद्र सिंह देव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मैंने दो दिन पहले ही कार्यभार ग्रहण किया है। प्रकरण की जानकारी करने के बाद ही कुछ बता पाऊंगा।
जमानत निरस्तीकरण के लिए क्यों नहीं दी अर्जी?
सूत्रों का कहना है कि उमेश ने जिन लोगों को अपने मुकदमाें में नामजद किया, वह पहले से आपराधिक मुकदमों में अभियुक्त थे। वह जब भी मुकदमे में कार्रवाई की गुहार लेकर जाते, धूमनगंज पुलिस जमानती धाराओं में केस होने का हवाला देकर उन्हें वापस कर देती। सवाल यह है कि पुलिस ने आरोपियों की जमानत निरस्त कराने के लिए कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की।