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कोर्ट ने पूछा : कोर्ट के फैसले के विपरीत बकाया वसूली का क्या है औचित्य, सीईओ नोएडा से व्यक्तिगत हलफनामा तलब

Wed, 16 Nov 2022 09:57 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 16 Nov 2022 09:57 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि सिविल वाद की डिक्री में स्पष्ट लिखा है कि औद्योगिक शेड आवंटन की पूरी राशि जमा हो चुकी है। कोर्ट के आदेश पर जमीन का पट्टा हो चुका है। अथॉरिटी की इसके खिलाफ  हर कोशिश विफल रही है, किंतु राहत नहीं मिली, तो एक करोड़ से अधिक के बकाये को एक माह में जमा करने के नोटिस का कोई औचित्य नहीं है।

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What is the propriety for recovery of arrears contrary to the court decision
court new - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गौतमबुद्धनगर (नोएडा) के सीईओ से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने पूछा है कि फैसले के विपरीत याची से एक करोड़ 15 लाख, 32 हजार, 470 रुपये की मांग का क्या औचित्य है। यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने दिल्ली निवासी नोएडा के व्यवसायी रवि कुमार बंसल की याचिका पर दिया है।

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कोर्ट ने कहा कि सिविल वाद की डिक्री में स्पष्ट लिखा है कि औद्योगिक शेड आवंटन की पूरी राशि जमा हो चुकी है। कोर्ट के आदेश पर जमीन का पट्टा हो चुका है। अथॉरिटी की इसके खिलाफ  हर कोशिश विफल रही है, किंतु राहत नहीं मिली, तो एक करोड़ से अधिक के बकाये को एक माह में जमा करने के नोटिस का कोई औचित्य नहीं है। कोर्ट ने सीईओ को 25 नवंबर तक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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याची की ओर से कहा गया कि वह बी-22 सेक्टर -एक नोएडा में व्यवसाय कर रहा है। उसने नौ सितंबर 1980 को प्लाट आवंटन की अर्जी दी। छह नवंबर 80 को आवंटन हो गया। उसने पूरी धनराशि जमा कर दी। विवाद होने पर सिविल वाद दायर किया जो तीन दिसंबर 80 को उसके पक्ष में निर्णीत हुआ। इसके बावजूद नोएडा ने सवा करोड़ के बकाये की अवैध मनमाना नोटिस जारी कर एक माह में भुगतान करने का निर्देश दिया है, जिसे याचिका में चुनौती दी गई है।

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