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सड़कों पर गूंजा बुद्धं शरणं गच्छामि
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Mon, 04 May 2015 02:08 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। बौद्ध धर्म के प्रवर्तक भगवान बुद्ध की जयंती की पूर्व संध्या रविवार को इंटरनेशनल बौद्ध कम्यून की ओर से वैश्विक मैत्री शांति यात्रा इलाहाबाद संग्रहालय से निकाली गई। पूरे रास्ते बुद्धं शरणं गच्छामि गूंजता रहा। कम्यून के प्रबंध निदेशक जीएस शाक्या की देखरेख में निकाली गई शोभायात्रा सिविल लाइंस स्थित सुभाष चौराहा पहुंच कर समाप्त हुई।
यात्रा की शुरूआत त्रिरतन वंदना से हुई। संग्रहालय के निदेशक राजेश पुरोहित ने पंचशील ध्वज दिखाया। यात्रा के उद्देश्यों के बारे में बताते हुए जीएस शाक्य ने कहा कि भगवान बुद्ध की धम्म देशनाएं सर्वकालिक हैं। अशांति से भरे माहौल में भगवान बुद्ध की करुणा, मैत्री दया की भावना स्थापित होने से सभी का कल्याण होगा।
संस्था के चेयरमैन विनोद विक्रम ने स्वागत किया। धम्मयात्रा मेें कुशवाहा महासभा, लार्ड बुद्धा वेलफेयर सोसाइटी, चेतना विकास समिति, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य सेवा संस्थान, यूनाइटेड फोरम आफ पेंशनर्स एसोसिएशन, आईश सामूहिक विवाह सेवा संस्थान, परिवर्तन एवं विकास संस्थान आदि के सदस्य व बौद्ध भिक्षु उपस्थित रहे।
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भगवान बुद्ध जयंती की पूर्व संध्या रविवार को इलाहाबाद संग्रहालय व बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में परिचर्चा व भगवान बुद्ध के जीवन प्रसंगों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। चित्रों के माध्यम से बुद्ध के संदेश मुखरित हुए। प्रदर्शनी का उद्घाटन थाईलैंड के खेमापेम, श्रीलंका के भंते विशुद्धि, भंते देवानंदवर्धन ने किया। संग्रहालय के निदेशक राजेश पुरोहित ने कहा कि बैर से बैर नहीं मिटता।
मैत्री ही मानव जीवन का कल्याण कर सकती है। बौद्ध कम्यून के प्रबंध निदेशक जीएस शाक्या ने कहा कि भगवान बुद्ध ने अपने उपदेश में कहा है कि अपने स्वामी आप स्वयं हैं कोई दूसरा आपका स्वामी नहीं हो सकता है। इसलिए मानव को अपने कल्याण के लिए स्वयं ही प्रयास करने चाहिए। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. वामन वानखेडे़, संचालन डॉ. ओंकार वानखेडे़, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनील गुप्ता ने किया। इस अवसर पर डॉ. संजू मिश्रा, डॉ. राजेश मिश्रा आदि उपस्थित रहे।
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यात्रा की शुरूआत त्रिरतन वंदना से हुई। संग्रहालय के निदेशक राजेश पुरोहित ने पंचशील ध्वज दिखाया। यात्रा के उद्देश्यों के बारे में बताते हुए जीएस शाक्य ने कहा कि भगवान बुद्ध की धम्म देशनाएं सर्वकालिक हैं। अशांति से भरे माहौल में भगवान बुद्ध की करुणा, मैत्री दया की भावना स्थापित होने से सभी का कल्याण होगा।
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संस्था के चेयरमैन विनोद विक्रम ने स्वागत किया। धम्मयात्रा मेें कुशवाहा महासभा, लार्ड बुद्धा वेलफेयर सोसाइटी, चेतना विकास समिति, सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य सेवा संस्थान, यूनाइटेड फोरम आफ पेंशनर्स एसोसिएशन, आईश सामूहिक विवाह सेवा संस्थान, परिवर्तन एवं विकास संस्थान आदि के सदस्य व बौद्ध भिक्षु उपस्थित रहे।
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भगवान बुद्ध जयंती की पूर्व संध्या रविवार को इलाहाबाद संग्रहालय व बौद्ध कम्यून इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वावधान में परिचर्चा व भगवान बुद्ध के जीवन प्रसंगों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी लगाई गई। चित्रों के माध्यम से बुद्ध के संदेश मुखरित हुए। प्रदर्शनी का उद्घाटन थाईलैंड के खेमापेम, श्रीलंका के भंते विशुद्धि, भंते देवानंदवर्धन ने किया। संग्रहालय के निदेशक राजेश पुरोहित ने कहा कि बैर से बैर नहीं मिटता।
मैत्री ही मानव जीवन का कल्याण कर सकती है। बौद्ध कम्यून के प्रबंध निदेशक जीएस शाक्या ने कहा कि भगवान बुद्ध ने अपने उपदेश में कहा है कि अपने स्वामी आप स्वयं हैं कोई दूसरा आपका स्वामी नहीं हो सकता है। इसलिए मानव को अपने कल्याण के लिए स्वयं ही प्रयास करने चाहिए। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. वामन वानखेडे़, संचालन डॉ. ओंकार वानखेडे़, धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुनील गुप्ता ने किया। इस अवसर पर डॉ. संजू मिश्रा, डॉ. राजेश मिश्रा आदि उपस्थित रहे।