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भाजपा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त की गिरफ्तारी को वारंट
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Warrant for the arrest of BJP MP Virendra Singh Mast
प्रयागराज। स्पेशल कोर्ट एमपीएमएलए ने भाजपा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया है। उन पर जिलाधिकारी बलिया के कार्यालय में घुसकर कर्मचारियों से धक्कामुक्की करने और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का आरोप है। इस मुकदमे में हाजिर होने के लिए स्पेशल कोर्ट ने उनको समन भी जारी किया था। इसके बावजूद वह हाजिर नहीं हुए तो शनिवार को कोर्ट ने गैरजमानती वारंट जारी कर दिया है। कोर्ट ने पूर्व विधायक अनिल कुमार के खिलाफ भी इसी मामले में गैरजमानती वारंट जारी किया है।
मामले में सांसद वीरेंद्र सिंह और अन्य की ओर से अपराध से उन्मोचित किए जाने की अर्जी दी गई थी, जिसे स्पेशल कोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट का कहना है कि आरोप तय किए जाने के इस स्तर पर साक्ष्य के मूल्यांकन की आवश्यकता नहीं है। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। कोर्ट ने आरोप तय किए जाने के लिए 26 सितंबर को अगली तारीख नियत की है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने एसपीओ हरिओंकार सिंह और एडीजीसी राजेश गुप्ता को सुनकर दिया है।
सात सितंबर 2010 को सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त जिले के अन्य नेताओं और अपने समर्थकों के साथ नाबालिग की गुमशुदगी के प्रकरण में शीघ्र बरामदगी के लिए जिलाधिकारी कार्यालय ज्ञापन देने गए थे। आरोप है कि सांसद और उनके साथ गए लोग डीएम कार्यालय में नारेबाजी करने लगे। मना करने पर कर्मचारियों से धक्कामुक्की और अभद्रता की व सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई। विवेचना के बाद पुलिस ने सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त, विजय गुप्ता, उपेंद्र तिवारी, रंगनाथ मिश्र, देवेंद्र यादव और अनिल कुमार के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया था।
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सांसद सहित अन्य सभी अभियुक्तगण की ओर से अपराध से उन्मोचित किए जाने के लिए अर्जी दी गई। बचाव में तर्क दिया गया कि अभियुक्तगण निर्दोष हैं। वह डीएम के यहां ज्ञापन देने गए थे। विधि विरुद्ध जमाव साबित नहीं है। अभियुक्तगणों के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। कोर्ट ने इस संदर्भ में तमाम विधि व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए अभियुक्तगण की अर्जी को आधारहीन पाते हुए खारिज कर दिया है। कोर्ट ने आरोप तय किए जाने के लिए 26 सितंबर की तारीख नियत की है।
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मामले में सांसद वीरेंद्र सिंह और अन्य की ओर से अपराध से उन्मोचित किए जाने की अर्जी दी गई थी, जिसे स्पेशल कोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट का कहना है कि आरोप तय किए जाने के इस स्तर पर साक्ष्य के मूल्यांकन की आवश्यकता नहीं है। पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। कोर्ट ने आरोप तय किए जाने के लिए 26 सितंबर को अगली तारीख नियत की है। यह आदेश स्पेशल कोर्ट के जज पवन कुमार तिवारी ने एसपीओ हरिओंकार सिंह और एडीजीसी राजेश गुप्ता को सुनकर दिया है।
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सात सितंबर 2010 को सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त जिले के अन्य नेताओं और अपने समर्थकों के साथ नाबालिग की गुमशुदगी के प्रकरण में शीघ्र बरामदगी के लिए जिलाधिकारी कार्यालय ज्ञापन देने गए थे। आरोप है कि सांसद और उनके साथ गए लोग डीएम कार्यालय में नारेबाजी करने लगे। मना करने पर कर्मचारियों से धक्कामुक्की और अभद्रता की व सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई। विवेचना के बाद पुलिस ने सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त, विजय गुप्ता, उपेंद्र तिवारी, रंगनाथ मिश्र, देवेंद्र यादव और अनिल कुमार के खिलाफ आरोपपत्र कोर्ट में दाखिल किया था।
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सांसद सहित अन्य सभी अभियुक्तगण की ओर से अपराध से उन्मोचित किए जाने के लिए अर्जी दी गई। बचाव में तर्क दिया गया कि अभियुक्तगण निर्दोष हैं। वह डीएम के यहां ज्ञापन देने गए थे। विधि विरुद्ध जमाव साबित नहीं है। अभियुक्तगणों के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। कोर्ट ने इस संदर्भ में तमाम विधि व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए अभियुक्तगण की अर्जी को आधारहीन पाते हुए खारिज कर दिया है। कोर्ट ने आरोप तय किए जाने के लिए 26 सितंबर की तारीख नियत की है।