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अदालत बदलने की वलीउल्ला की मांग नामंजूर
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Waliullah's demand to change the court rejected
प्रयागराज। देश में आतंकी गतिविधियां संचालित करने के आरोपी वलीउल्ला का मुकदमा दूसरी कोर्ट में स्थानांतरित करने की उसकी मांग नामंजूर कर दी गई है। वलीउल्ला राष्ट्रद्रोह के मुकदमे में गाजियाबाद जेल में बंद है। सोमवार को उसके मामले की सुनवाई थी और उसे गाजियाबाद से यहां पेशी पर लाना था। मगर, सुरक्षा कारण से उसे लाया नहीं जा सका, इसलिए मुकदमे की सुनवाई टल गई। हालांकि, वलीउल्ला की कोर्ट बदलने की अर्जी पर जिला जज ने सुनवाई की।
अर्जी में कहा गया कि उसके मुकदमे की सुनवाई कर रहे पीठासीन अधिकारी ने 13 मई 2019 की सुनवाई के दौरान ऐसी टिप्पणी की थी, जिसके बाद उसे उनकी अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। डीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि ने इस अर्जी का विरोध करते हुए बताया कि अभियुक्त इस प्रकार की अर्जियां देने का आदी है। ऐसा वह मुकदमे की सुनवाई टालने और मुकदमे को लंबित रखने के इरादे से करता है। इससे पहले भी वह कई पीठासीन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करते हुए कोर्ट बदलने की अर्जी दे चुका है।
जिला जज एके ओझा ने अर्जी पर सुनवाई के बाद कहा कि अर्जी में यह नहीं बताया गया कि पीठासीन अधिकारी ने कौन सी टिप्पणी की थी, जिसकी वजह से अभियुक्त को उनसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। दस्तावेजों से जाहिर है कि अभियुक्त ऐसी अर्जियां देने का आदी है, इसलिए मुकदमा दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने का कोई आधार नहीं है। वलीउल्ला के खिलाफ दर्ज मुकदमे की सुनवाई अब 30 अगस्त 2019 को होगी।
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डीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि ने बताया कि फूलपुर थाने में वलीउल्ला, वसीउल्ला, उवैद उल्ला और उजैर आलम के खिलाफ भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक षड्यंत्र और राष्ट्रद्रोह की धाराओं में फूलपुर थाने में 2001 में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके अलावा वलीउल्ला पर वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में हुए आतंकी हमले और लखनऊ में मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों की मदद का आरोप भी लग चुका है।
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अर्जी में कहा गया कि उसके मुकदमे की सुनवाई कर रहे पीठासीन अधिकारी ने 13 मई 2019 की सुनवाई के दौरान ऐसी टिप्पणी की थी, जिसके बाद उसे उनकी अदालत से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। डीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि ने इस अर्जी का विरोध करते हुए बताया कि अभियुक्त इस प्रकार की अर्जियां देने का आदी है। ऐसा वह मुकदमे की सुनवाई टालने और मुकदमे को लंबित रखने के इरादे से करता है। इससे पहले भी वह कई पीठासीन अधिकारियों के खिलाफ शिकायत करते हुए कोर्ट बदलने की अर्जी दे चुका है।
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जिला जज एके ओझा ने अर्जी पर सुनवाई के बाद कहा कि अर्जी में यह नहीं बताया गया कि पीठासीन अधिकारी ने कौन सी टिप्पणी की थी, जिसकी वजह से अभियुक्त को उनसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है। दस्तावेजों से जाहिर है कि अभियुक्त ऐसी अर्जियां देने का आदी है, इसलिए मुकदमा दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने का कोई आधार नहीं है। वलीउल्ला के खिलाफ दर्ज मुकदमे की सुनवाई अब 30 अगस्त 2019 को होगी।
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डीजीसी गुलाब चंद्र अग्रहरि ने बताया कि फूलपुर थाने में वलीउल्ला, वसीउल्ला, उवैद उल्ला और उजैर आलम के खिलाफ भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक षड्यंत्र और राष्ट्रद्रोह की धाराओं में फूलपुर थाने में 2001 में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके अलावा वलीउल्ला पर वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में हुए आतंकी हमले और लखनऊ में मारे गए पाकिस्तानी आतंकियों की मदद का आरोप भी लग चुका है।