जागे श्रीहरि: विष्णु, बजी शहनाई देवोत्थान एकादशी पर सजे मंदिर, वेणी माधव मंदिर में विशेष श्रृंगार-पूजन
देवोत्थान एकादशी पर श्रीहरि: विष्णु जागे। इसी के साथ मांगलिक कार्य भी शुरू हो गए। शहनाई भी बजीं। दारागंज स्थित श्री वेणी माधव मंदिर में विशेष श्रृंगार पूजन किया गया। आरती के बाद भक्तों ने माधो सकल काम साधो का जयकारा लगाया।
देवोत्थान एकादशी यानि हरि प्रबोधनी एकादशी पर बुधवार से ही मांगलिक कार्यक्रमों की शुरूआत हुई। पहले दिन मुंडन, यज्ञोपवीत के साथ वैवाहिक कार्य भी हुए। बारातें भी निकलीं। हरि प्रबोधनी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु की तुलसी के पत्र और पुष्प अर्पित कर श्री हरि: विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया। भजन, कीर्तन और पाठ के साथ शाम को भोग प्रसाद वितरण किया गया। व्रत करने वालों ने अन्न और नमक से परहेज रखा।
दीपदान से जगमग हुए बलुआघाट सहित अन्य घाट
कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी प्रबोधनी एकादशी पर बुधवार को यमुना के घाटों पर सुबह स्नानार्थियों की भीड़ रही। पूजन अर्चन के बाद दान करने वालों की भीड़ जुटी। वहीं शाम को बलुआघाट, संगम, गंगा घाटों पर दीपदान करने वाले जुटे। दीपदान और दीप जलाए जाने से घाटों की छटा देखने वालों का तांता लगा रहा। यमुना पूजा का विशेष महत्व होने के कारण सर्वाधिक भीड़ बलुआघाट पर रही। चौराहे पर सुबह से शाम तक जाम की स्थिति बनी रही। यमुना आरती के साथ दीपदान का क्रम शाम से रात तक जारी रहा।
घर-घर जले दीप, फोड़े गए पटाखे
दीपावली के बाद बुधवार को देवात्थान एकादशी पर घर-घर दीप जलाए गए। नारायण श्रीहरि: का पूजन कर लोगों ने दीप और मोमबत्तियों से घर-आंगन सजाया। शाम को पटाखे भी फोड़े गए। आसमान में पटाखों की रोशनी से सतरंगी छटा मोहने वाली रही। महिलाओं और बच्चों ने घरों में रंगोली सजाई। भगवान को फूलों से सजाकर घरों में विद्युत झालरों से रंगीन रोशनी की गई। तुलसी पूजन कर महिलाओं ने भोग प्रसाद के लिए पकवान बनाए पर बच्चों ने दिवाली की तरह एक बार फिर अपनी खुशियां दोबारा बांटीं।