{"_id":"6a861abda087ae8c520d244e","slug":"visiting-a-brothel-as-a-customer-is-not-a-crime-high-court-allahabad-news-c-3-ald1034-954987-2026-08-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"वेश्यालय में ग्राहक बनकर जाना अपराध नहीं : हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वेश्यालय में ग्राहक बनकर जाना अपराध नहीं : हाईकोर्ट
Thu, 20 Aug 2026 02:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Thu, 20 Aug 2026 02:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वेश्यालय में ग्राहक बनकर जाना अपराध नहीं है। सेवाएं लेकर कीमत अदा करने वालों पर अनैतिक देह व्यापार विरोधी कानून के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।
इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति डॉ.गौतम चौधरी की एकल पीठ ने वेश्यालय में पकड़े गए गाजियाबाद के एक आरोपी के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। गाजियाबाद के भोजपुरा चौराहे के निकट डीएलएफ पुलिस चौकी के पास एक मकान में देह व्यापार की सूचना पर पुलिस ने छापा मारा था। मौके से महिलाओं और याची सात पुरुषों समेत 16 लोग पकड़े गए थे। इनमें आरोपी भी शामिल था।
आरोप है कि वहां मौजूद महिलाएं देह व्यापार में शामिल थीं और अपनी कमाई का एक हिस्सा मकान मालिक को देती थीं। मामले में आरोपी के खिलाफ भी अनैतिक देह व्यापार विरोधी अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया। ट्रायल कोर्ट ने ट्रायल का सामना करने के लिए आरोपी को बतौर याची तलब किया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दलील दी कि वह केवल ग्राहक के रूप में वहां गया था। उसके खिलाफ वेश्यालय चलाने, उसका प्रबंधन करने या देह व्यापार के व्यावसायिक शोषण में शामिल होने का कोई आरोप या साक्ष्य मौजूद नहीं है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी की भूमिका महज ग्राहक की थी। कोर्ट ने कहा कि कानून में अपराध के लिए व्यावसायिक शोषण से जुड़ा तत्व होना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि ग्राहक के रूप में वेश्यालय जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। लिहाजा, कोर्ट ने याची की याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही, आरोपपत्र और समन आदेश निरस्त कर दिया।
विज्ञापन
इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति डॉ.गौतम चौधरी की एकल पीठ ने वेश्यालय में पकड़े गए गाजियाबाद के एक आरोपी के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी। गाजियाबाद के भोजपुरा चौराहे के निकट डीएलएफ पुलिस चौकी के पास एक मकान में देह व्यापार की सूचना पर पुलिस ने छापा मारा था। मौके से महिलाओं और याची सात पुरुषों समेत 16 लोग पकड़े गए थे। इनमें आरोपी भी शामिल था।
विज्ञापन
आरोप है कि वहां मौजूद महिलाएं देह व्यापार में शामिल थीं और अपनी कमाई का एक हिस्सा मकान मालिक को देती थीं। मामले में आरोपी के खिलाफ भी अनैतिक देह व्यापार विरोधी अधिनियम के तहत आरोपपत्र दाखिल किया गया। ट्रायल कोर्ट ने ट्रायल का सामना करने के लिए आरोपी को बतौर याची तलब किया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दलील दी कि वह केवल ग्राहक के रूप में वहां गया था। उसके खिलाफ वेश्यालय चलाने, उसका प्रबंधन करने या देह व्यापार के व्यावसायिक शोषण में शामिल होने का कोई आरोप या साक्ष्य मौजूद नहीं है।
विज्ञापन
हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी की भूमिका महज ग्राहक की थी। कोर्ट ने कहा कि कानून में अपराध के लिए व्यावसायिक शोषण से जुड़ा तत्व होना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि ग्राहक के रूप में वेश्यालय जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। लिहाजा, कोर्ट ने याची की याचिका स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही, आरोपपत्र और समन आदेश निरस्त कर दिया।