फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   ved prakash

पापुलर कल्चर के आइकन थे वेदप्रकाश शर्मा

Sun, 19 Feb 2017 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 19 Feb 2017 01:40 AM IST
विज्ञापन
प्रख्यात उपन्यासकार वेदप्रकाश शर्मा के उपन्यासों को भले ही साहित्य की श्रेणी में न स्वीकारा जाता हो, लेकिन उनकी लोकप्रियता का लोहा साहित्य जगत भी मानता है। साहित्यकारों का कहना है कि जब हमारे पास मनोरंजन के साधन नहीं थे, तब उनके उपन्यासों ने पाठकों का मनोरंजन किया। उनके उपन्यास बेस्ट सेलर रहे। वह पापुलर कल्चर के आइकन थे। उनके उपन्यासों ने हिंदी भाषा को भी बढ़ावा दिया है।  
विज्ञापन


 साहित्यकार एवं समाजशास्त्री डॉ. बद्री नारायण ने कहा, ‘वेदप्रकाश शर्मा का उपन्यास ‘वर्दी वाला गुंडा’ अब तक का बेस्ट सेलर माना जाता है। लोग उनके उपन्यास एडवांस में बुक करवाते थे। अपने पाठकों में वह बहुत लोकप्रिय थे। समाज का एक खास वर्ग उनको पसंद करता था’। युवा उपन्यासकार एवं लेखिका लीमा धर का मनाना है कि वह युवाओं के उपन्यासकार थे। राजीव गांधी की हत्या के बाद लिखा गया उनका जासूसी उपन्यास ‘वर्दीवाला गुंडा’ युवा वर्ग का पसंदीदा बन गया। कैंसर जैसी बीमारी से निधन के कारण हमारा समाज उनके उपन्यासों से वंचित हो गया। इविवि के हिंदी विभाग के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. मुश्ताक अली ने कहा, ‘भले ही वेदप्रकाश की गिनती साहित्य के क्षेत्र में नहीं होती है, परंतु उन्हें लोकप्रिय लेखक के तौर पर माना जाता है। विदेश में उनके जैसे लेखकों पर शोध कार्य होता है, अपने देश में उन्हें कलावाद के नाम पर वंचित कर दिया गया है।
विज्ञापन


बेदखल और पाही घर जैसे उपन्यासों के लेखक कमलाकांत त्रिपाठी ने कहा, साहित्य का एक लक्ष्य मनोरंजन भी है और वेदप्रकाश शर्मा जैसे लोगों ने पाठकों का भरपूर मनोरंजन किया है, इसलिए वह सफल भी रहे। वेदप्रकाश उन लेखकों से बहुत अच्छे हैं जो साहित्य में अश्लीलता का प्रचार-प्रसार करते हैं। वेदप्रकाश कम से कम पॉर्न तो नहीं लिखते थे’। साहित्यकार डॉ. देवी प्रसाद कुंवर ने कहा कि आज से 30 वर्ष पूर्व जब हमारे पास मनोरंजन के साधन नहीं थे, ऐसे समय में वेद प्रकाश शर्मा के उपन्यास घर-घर में लोगों के पास पढ़ने को होते थे। लोग उनके उपन्यासों की प्रतीक्षा करते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने लोगों के मनोरंजन के लिए कथाएं लिखीं। इसी क्रम में आलोचक डॉ. सूर्य नारायण ने कहा कि वेदप्रकाश ‘पल्प लिटरेचर’ के लेखक हैं। उन्होंने अपने उपन्यासों में सामाजिक सरोकारों को उठाया। उन्होंने गंभीर साहित्यिक रचना नहीं की अपितु उन्होंने लोगों के मनोरंजन के लिए लिखा। उन्होंने ऐसे समय लोगों का मनोरंजन किया जब रेडियो, टेलीविजन नहीं थे। साहित्यकार असरार गांधी ने कहा कि उन्होंने अपनी रचनाओं से लोगों में पढ़ने की कला विकसित की। लोगों की पसंद का लेखन किया। उनकी रचनाएं युवा वर्ग में खूब पढ़ी जाती थी। हालांकि, उनकी रचनाओं का कोई साहित्यिक अवदान नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed