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डिवाइस का इस्तेमाल कर उड़ाते थे लज्जरी गाडिय़ां, पांच गिरफ्तार
Sun, 18 Jul 2021 09:16 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 18 Jul 2021 09:16 PM IST
सार
- फॉर्च्यूनर व पांच स्कॉर्पियो बरामद, अन्य साथियों की तलाश जारी
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prayagraj news : वाहन चोर गिरोह के कब्जे से बरामद लग्जरी वाहन।
- फोटो : prayagraj
विस्तार
हाईटेक तरीके से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, टैबलेट का इस्तेमाल कर लज्जरी वाहन चुराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ रविवार को हुआ। जिला पुलिस ने पांच सदस्यों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से एक फॉच्र्यूनर व पांच स्कॉर्पियो बरामद की है। यह सभी वाहन अलग-अलग जगहों से चुराए गए थे। पुलिस उनके साथियों की तलाश में जुटी है।
अफसरों ने बताया कि सटीक सूचना पर शनिवार को बेली चौराहे के पास से वाहन चोर गिरोह के पांच सदस्यों को पकड़ा गया। उनके कब्जे से दो वाहन बरामद हुए जिनके न तो वह कागजात दिखा पाए और न ही कोई संतोषजनक जवाब दे पाए। थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ करने पर पता चला कि वह अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य हैं जिन्होंने दिल्ली, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों में भी वाहन चोरी की वारदातें की हैं।
उनकी निशानदेही पर परेड ग्राउंड में चकर्ड प्लेट की आड़ में छिपाकर रखी गई चार स्कॉर्पियो बरामद की गईं जो अलग-अलग जगहों से चुराई गई थीं। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार सदस्यों में रामू उर्फ राजकुमार यादव, मो. साद, प्रेम कुमार, मैनुद्दीन मियां और सुनीत कुणाल सभी निवासी बिहार शामिल हैं। इनमें रामू और प्रेम पर पहले से मुकदमे दर्ज हैं।
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हाईटेक तरीके से करते थे चोरी
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अफसरों ने बताया कि सटीक सूचना पर शनिवार को बेली चौराहे के पास से वाहन चोर गिरोह के पांच सदस्यों को पकड़ा गया। उनके कब्जे से दो वाहन बरामद हुए जिनके न तो वह कागजात दिखा पाए और न ही कोई संतोषजनक जवाब दे पाए। थाने लाकर कड़ाई से पूछताछ करने पर पता चला कि वह अंतरराज्यीय गिरोह के सदस्य हैं जिन्होंने दिल्ली, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों में भी वाहन चोरी की वारदातें की हैं।
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उनकी निशानदेही पर परेड ग्राउंड में चकर्ड प्लेट की आड़ में छिपाकर रखी गई चार स्कॉर्पियो बरामद की गईं जो अलग-अलग जगहों से चुराई गई थीं। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार सदस्यों में रामू उर्फ राजकुमार यादव, मो. साद, प्रेम कुमार, मैनुद्दीन मियां और सुनीत कुणाल सभी निवासी बिहार शामिल हैं। इनमें रामू और प्रेम पर पहले से मुकदमे दर्ज हैं।
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हाईटेक तरीके से करते थे चोरी
- टेप लगाकर शीशा काटने के बाद डिवाइस लगाकर लॉक व टैबलेट के जरिए सेंसर डिएक्टिवेट करना। फिर डिवाइस से नई कोडिंग कर मास्टर की से स्टार्ट कर लेते थे गाड़ी।
- चोरी के वाहन को फर्जी नंबर प्लेट लगाकर दो-चार दिनों के लिए सुनसान जगहों पर खड़ी करते थे ताकि जीपीएस लगा होने पर पुलिस इसे ट्रेस कर ले।
- इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से दुर्घटना के बाद वाहन को कबाड़ घोषित न कर सबसे ज्यादा बोली लगाने वाले को पेपर सहित बेचा जाता है, जिसे वाहन चोर गिरोह के सदस्य खरीद लेते थे।
- दुर्घटनाग्रस्त वाहन का इंजन व चेचिस नंबर चोरी किए गए वाहन पर उकेरकर उसे किसी दूसरे राज्य में ले जाकर ज्यादा दामों में बेचकर करते थे कमाई। इससे पहले वाहन का ईसीएम व आईडेंटिफिकेशन चिप भी बदल देते हैं।