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यूपीटीईटी सॉल्वर गैंग : 80 हजार में सौदा, 60 हजार सॉल्वर को
Sun, 23 Jan 2022 11:51 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 23 Jan 2022 11:51 PM IST
सार
पुलिस अफसरों के मुताबिक, पूछताछ में सरगना व उसके साथियों ने बताया कि गिरोह में सबका अलग-अलग काम तय था। मेजा में तैनात लेखपाल कमलेश मौर्या मांडा निवासी अपने साथी जयदीप के साथ मिलकर अभ्यर्थी की तलाश करता था और फिर उनसे रुपये लेता था।
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विस्तार
खुल्दाबाद में जंक्शन के पास से गिरफ्तार सॉल्वर गिरोह के सदस्यों से पूछताछ में कई अहम खुलासे हुए। उन्होंने बताया कि अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने का सौदा 80 हजार में तय किया जाता था। इनमें से 60 हजार सॉल्वर को दिए जाते थे, जबकि 20 हजार रुपये सरगना व उसके साथी रख लेते थे। सॉल्वर को भी रुपये दो बार में दिए जाते थे। परीक्षा से पहले एडवांस के तौर पर उसे 20 हजार और फिर बाकी के 40 हजार रुपये परीक्षा पास होने पर दिए जाते थे।
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सबका अलग-अलग तय था काम
पुलिस अफसरों के मुताबिक, पूछताछ में सरगना व उसके साथियों ने बताया कि गिरोह में सबका अलग-अलग काम तय था। मेजा में तैनात लेखपाल कमलेश मौर्या मांडा निवासी अपने साथी जयदीप के साथ मिलकर अभ्यर्थी की तलाश करता था और फिर उनसे रुपये लेता था।
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गिरफ्तार अन्य दोनों लेखपाल राहुल यादव व राधेश्याम वर्मा अभ्यर्थियों से उनके दस्तावेज एकत्र कर पवन तक पहुंचाते थे। इसके बाद पवन सॉल्वरों की व्यवस्था करता था। साथ ही पटना के सुल्तानगंज मुसलमपुर हाट में यूनिक साइबर कैफे संचालित करने वाले मुन्ना की मदद से जाली आधार व प्रवेश पत्र बनवाता था। युगल किशोर व सर्वेश भट्ट इनका सहयोग करते थे।
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अवधेश ने कराई थी सरगना से मुलाकात
गिरफ्तार लेखपाल राहुल ने बताया कि फरार चल रहा अवधेश पास के गांव का रहने वाला होने के कारण उसका परिचित है। वह मौजूदा समय में बिहार में सरगना पवन के पड़ोस में रहता है। अवधेश ने ही उसकी मुलाकात पवन से कराई, जिसने बताया कि परीक्षा में सॉल्वर बैठाकर अच्छा पैसा कमाया जा सकता है। इसके बाद राहुल ने अपने अन्य दोनों लेखपाल साथियों को भी इस काम के लिए राजी कर लिया।
पहले की रौब झाड़ने की कोशिश
सॉल्वर गिरोह के सदस्यों ने पकड़े जाने के दौरान पहले पुलिस टीम पर रौब झाड़ने की भी कोशिश की। आठ सॉल्वरों ने खुद को अभ्यर्थी और अन्य ने खुद को अभिभावक बताया और पुलिसकर्मियों पर दबाव बनाया कि परीक्षा छूटने पर सारी जिम्मेदारी उनकी होगी। लेकिन जब उन्हें केंद्र पर ले जाकर जांच पड़ताल की गई तो सच्चाई सामने आ गई, जिसके बाद वह माफी मांगने लगे।
अभ्यर्थियों से होगी पूछताछ
एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि जांच पड़ताल में उन मूल अभ्यर्थियों के भी नाम सामने आए हैं, जिनकी जगह पर सॉल्वरों को परीक्षा में बैठना था। इनमें विपिन कुमार निवासी झूंसी, दीपचंद निवासी करछना, कृष्ण कुमार निवासी तरवा आजमगढ़, जितेंद्र कुमार निवासी दुबेपुर उपरहार, सर्वेश कुमार दुबे निवासी दुबेपुर कछार, रमेश कुमार निवासी चंद्रभान का पूरा जसरा, प्रशांत कुमार और शैलेश कुमार शामिल हैं। इन सभी से पूछताछ की जाएगी और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सामान्य ज्ञान के मामूली सवालों का भी जवाब नहीं दे सके सॉल्वर
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों का बौद्धिक स्तर प्रतियोगी जैसा नहीं लगा। सामान्य ज्ञान के मामूली सवालों का भी वह जवाब नहीं दे सके। ऐसे में यह भी आशंका है कि सॉल्वर बैठाने के नाम पर वह अभ्यर्थियों से ठगी करते थे।