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यूपीपीएससी : देर रात तक आयोग में डटी रही सीबीआई, खंगाले दस्तावेज

Sat, 07 Aug 2021 10:46 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 07 Aug 2021 10:46 AM IST
सार

  • एपीएस भर्ती-2010 के कुछ चयनित अभ्यर्थियों से भी हुई पूछताछ

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UPPSC: CBI remained in commission till late night, documents searched
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विस्तार

एपीएस भर्ती-2010 मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद सीबीआई टीम शुक्रवार देर रात तक उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में डटी रही। इस दौरान एपीएस भर्ती से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज खंगाले गए और आयोग के कुछ अफसरों/कर्मचारियों सहित एपीएस भर्ती के चयनितों से भी पूछताछ हुई। 

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पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद आयोग में हलचल बढ़ गई है। सीबीआई की ओर से दर्ज की गई एफआईआर में आयोग के अज्ञात अफसरों/कर्मचारियों की भूमिका को भी संदिग्ध माना गया है। सीबीआई की एक टीम शुक्रवार दोपहर अचानक आयोग पहुंची और एपीएस भर्ती से जुड़े दस्तावेजों की जांच-पड़ताल शुरू कर दी।
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सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने पूछताछ के लिए एपीएस भर्ती के कुछ चयनितों को भी बुलाया और उनसे पूछताछ की गई। वहीं, गोविंदपुर स्थित सीबीआई के कैंप ऑफिस में भी हलचल तेज हुई है। सूत्रों के मुताबिक एपीएस भर्ती के कुछ चयनितों से शनिवार को भी कैंप कार्यालय में पूछताछ किए जाने की तैयारी है। साथ ही आयोग के कुछ कर्मचारियों को भी कैंप कार्यालय बुलाया गया है। 

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UPPSC: CBI remained in commission till late night, documents searched
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

एपीएस भर्ती की जांच के लिए मिली थी विशेष अनुमति
सीबीआई आयोग की उन परीक्षाओं की जांच कर रही हैं, जिनके रिजल्ट अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच जारी किए गए थे। एपीएस भर्ती परीक्षा-2010 सीबीआई जांच के दायरे में नहीं आ रही थी। कुछ अभ्यर्थियों से मिले दस्तावेजों के आधार पर सीबीआई को जब प्राथमिक जांच में गड़बड़ी मिली तो सीबीआई ने शासन को पत्र भेजकर एपीएस भर्ती-2010 की जांच के लिए विशेष अनुमति मांगी थी। बाद में शासन से अनुमति मिलने पर सीबीआई ने आधिकारिक रूप से इसकी जांच शुरू की। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने इस परीक्षा की जांच के दौरान पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ से भी कई बार पूछताछ की थी।

छह महीने पहले मांगी थी मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति
सीबीआई ने आयोग की भर्ती परीक्षाओं में जांच के दौरान मिली गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोक सेवकों पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए दिसंबर 2020 में शासन को पत्र भेजकर अनुमति मांगी थी। तकरीबन छह माह तक अभियोजन स्वीकृति की फाइल शासन स्तर पर अटकी रही। सूत्रों का कहना है कि कुछ अफसर नहीं चाहते थे कि सीबीआई को मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति मिले और इसी वजह से फाइल अटकी रही। अब अनुमति मिलने के बाद सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया है।

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UPPSC - फोटो : अमर उजाला

28 चयनितों की ज्वाइनिंग सरकार ने रोक रखी है
एपीएस-2010 के तहत 250 पदों पर भर्ती की गई थी। इनमें से 222 चयनित अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश सचिवालय में कार्यरत हैं, जबकि 22 चयनित अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग सरकार ने जांच पूरी होने तक रोक कर रखी है। 

सीवीसी ने कार्रवाई के लिए सीबीआई को लिखा था पत्र
सीबीआई आयोग की भर्ती परीक्षाओं की जांच साढ़े तीन साल से कर रही है, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में अभ्यर्थियों ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को पत्र लिखा था, जिसके बार सीवीसी ने मामले में कार्रवाई के लिए सीबीआई को पत्र लिखा था।

सीबीआई ने दर्ज की दूसरी एफआईआर
आयोग की परीक्षाओं में धांधली के मामले में सीबीआई ने दूसरी एफआईआर दर्ज की है। इससे पूर्व सीबीआई ने पीसीएस परीक्षा-2015 में धांधली के मामले में पांच मई 2018 को एफआईआर दर्ज की थी। यह मुकदमा आयोग के अज्ञात अफसरों और बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था। सीबीआई ने जांच में कुछ अभ्यर्थियों की कॉपियों पर विश्ेाष चिह्न लगा हुआ पाया था, जिससे उनकी पहचान की जा सकती थी। इसके साथ ही जांच में पाया था कि स्केलिंग और मॉडरेशन की आड़ में अंकों के साथ छेड़छाड़ की गई है। हालांकि मुकदमा दर्ज होने के बाद सीबीआई ने अब तक किसी के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई नहीं की है।

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इससे पहले भी परीक्षा नियंत्रक पर हुआ था मुकदमा
सीबीआई ने पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है, लेकिन इससे पहले पद पर तैनाती के दौरान परीक्षा नियंत्रक रहीं अंजू कटियार के खिलाफ एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में पेपर आउट होने के मामले में एसटीएफ ने मुकदमा दर्ज किया था। अंजू कटियार को गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई थी।

598 भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई
सीबीआई की टीम आयोग की 598 भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही है और इन परीक्षाओं के तहत तकरीबन 40 हजार अभ्यर्थियों का चयन हो चुका है। आयोग को एपीएस-2010 और पीसीएस-2015 के अलावा कुछ अन्य परीक्षाओं में भी धांधली के ठोस सुबूत मिले हैं। सीबीआई की ओर से जुलाई 2020 में आरओ/एआरओ-2013, सम्मिलित राज्य अवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा-2013, उत्तर प्रदेश प्रांतीय न्यायिक सेवा परीक्षा-2013, मेडिकल परीक्षा-2014 के मामले में भी पीई दर्ज की गई। 

कब क्या हुआ
20 जुलाई 2017 को मुख्यमंत्री ने यूपीपीएससी की भर्ती परीक्षाओं की जांच कराने की घोषणा की।
31 जुलाई 2017 को इस संबंध में केंद्र सरकार को सिफारिश भेजी गई और 21 न वंबर को केंद्र सरकार के कार्मिक एवं पेंशन मंत्रालय ने सीबीआई जांच की अधिसूचना जारी कर दी। 
सीबीआई ने 19 जून 2018 को उत्तर प्रदेश शासन को पत्र लिखकर एपीएस भर्ती की जांच के लिए विशेष अनुमति मांगी। 
फरवरी 2019 में एपीएस भर्ती-2010 की जांच के लिए पीई दर्ज कर ली गई।
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