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यूपीपीएससीः सीबीआई ने पहले ही दिए थे धांधली के संकेत
Mon, 03 Jun 2019 09:40 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 03 Jun 2019 09:40 PM IST
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं में भ्रष्टाचार का खुलासा सीबीआई पहले ही कर चुकी है और इस बात के संकेत भी दे चुकी हैं कि भ्रष्टाचार के इस खेल में कोई एक अफसर नहीं, बल्कि आयोग के कुछ अफसरों-कर्मचारियों के साथ बाहरी लोगों का रैकेट भी काम कर रहा है। हालांकि सीबीआई की ओर से किए गए इस खुलासे के बावजूद सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए और एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती में हुई धांधली के मामले में परीक्षा नियंत्रक अंजू कटियार को जेल जाना पड़ा।
हालांकि सीबीआई की टीम अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही है लेकिन इन परीक्षाओं की जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जो आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है। सीबीआई ने पीसीएस-2015 में धांधली को लेकर मुकदमा भी दर्ज किया है और एफआईआर में स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा को लेकर हुई धांधली में कोई एक अफसर नहीं, बल्कि कई मॉडरेटर्स और आयोग के तमाम कर्मचारी भी लिप्त हैं।
मामले में सीबीआई ने सीधे तौर पर किसी को चिह्नित नहीं किया है लेकिन मुकदमा आयोग के अज्ञात अफसरों एवं कर्मचारियों और बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ ही दर्ज किया है। पीसीएस-2015 की परीक्षा में किस तरह कॉपियों पर विशेष प्रकार के चिह्न लगाए गए और उन कॉपियों में मॉडरेशन की आड़ में किस तरह नंबर घटा-बढ़ाकर अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया, सीबीआई इसका खुलासा कर चुकी है। इसी तरह एपीएस-2010 में भी सीबीआई को धांधली सुबूत मिले। इस जांच में तो सीधे आयोग और शासन के मौजूदा अफसरों पर उंगली उठी। मामला बढ़ने पर आयोग को अपने स्तर से भी जांच करानी पड़ी और अंतिम परिणाम आने के बाद कई अभ्यर्थियों का चयन निरस्त करना पड़ा।
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इतना कुछ होने के बाद भी आयोग में वो तमाम पुराने अफसर और कर्मचारी जमे रहे, जो सीबीआई के रडार पर थे। सूत्रों का कहना है कि एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी के लिए भी अकेले परीक्षा नियंत्रक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस परीक्षा में भी पेपर आउट कराने के लिए पीछे पुराने रैकेट का हाथ हो सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री ने बयान दिया है कि आयोग में गंदगी साफ की जा रही है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही आयोग में कई अन्य अफसरों और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने सीबीआई निदेशक को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि आयोग की भर्ती परीक्षाओं की जांच में तेजी लाई जाए। पीसीएस परीक्षाओं और एपीएस परीक्षा-2010 की जांच लंबे समय से जारी है लेकिन जांच पूरी नहीं हो पा रही और न ही अब तक किसी दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है।
,सीबीआई के स्तर से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियां की जांच पूरी न होने का परिणाम है कि आयोग की भर्तियों में भ्रष्टाचार और अनयिमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एमएलसी में पत्र में लिखा है कि पिछले सप्ताह यूपीएसटीएफ ने परीक्षा नियंत्रक और पेपर आउट करने वाले गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर लिया। भर्ती में भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद प्रतियोगी छात्र लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, भर्ती घोटाल में लिप्त आयोग के पदाधिकारियों ने दबाव बनाने के लिए आगामी सभी भर्ती परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। इससे प्रतियोगियों में रोष है। एमएलसी ने सीबीआई निदेशक से आग्रह किया है कि पीसीएस भर्ती परीक्षाओं और एपीएस परीक्षा-2010 की लंबित सीबीआई जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता पर अंतिम परिणाम तक पहुंचाते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
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हालांकि सीबीआई की टीम अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच हुई भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही है लेकिन इन परीक्षाओं की जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए, जो आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाती है। सीबीआई ने पीसीएस-2015 में धांधली को लेकर मुकदमा भी दर्ज किया है और एफआईआर में स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा को लेकर हुई धांधली में कोई एक अफसर नहीं, बल्कि कई मॉडरेटर्स और आयोग के तमाम कर्मचारी भी लिप्त हैं।
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मामले में सीबीआई ने सीधे तौर पर किसी को चिह्नित नहीं किया है लेकिन मुकदमा आयोग के अज्ञात अफसरों एवं कर्मचारियों और बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ ही दर्ज किया है। पीसीएस-2015 की परीक्षा में किस तरह कॉपियों पर विशेष प्रकार के चिह्न लगाए गए और उन कॉपियों में मॉडरेशन की आड़ में किस तरह नंबर घटा-बढ़ाकर अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया, सीबीआई इसका खुलासा कर चुकी है। इसी तरह एपीएस-2010 में भी सीबीआई को धांधली सुबूत मिले। इस जांच में तो सीधे आयोग और शासन के मौजूदा अफसरों पर उंगली उठी। मामला बढ़ने पर आयोग को अपने स्तर से भी जांच करानी पड़ी और अंतिम परिणाम आने के बाद कई अभ्यर्थियों का चयन निरस्त करना पड़ा।
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इतना कुछ होने के बाद भी आयोग में वो तमाम पुराने अफसर और कर्मचारी जमे रहे, जो सीबीआई के रडार पर थे। सूत्रों का कहना है कि एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा में हुई गड़बड़ी के लिए भी अकेले परीक्षा नियंत्रक को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। सूत्रों के मुताबिक इस परीक्षा में भी पेपर आउट कराने के लिए पीछे पुराने रैकेट का हाथ हो सकता है। हालांकि मुख्यमंत्री ने बयान दिया है कि आयोग में गंदगी साफ की जा रही है। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि जल्द ही आयोग में कई अन्य अफसरों और कर्मचारियों पर भी गाज गिर सकती है।
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने सीबीआई निदेशक को पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि आयोग की भर्ती परीक्षाओं की जांच में तेजी लाई जाए। पीसीएस परीक्षाओं और एपीएस परीक्षा-2010 की जांच लंबे समय से जारी है लेकिन जांच पूरी नहीं हो पा रही और न ही अब तक किसी दोषी के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है।
,सीबीआई के स्तर से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियां की जांच पूरी न होने का परिणाम है कि आयोग की भर्तियों में भ्रष्टाचार और अनयिमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एमएलसी में पत्र में लिखा है कि पिछले सप्ताह यूपीएसटीएफ ने परीक्षा नियंत्रक और पेपर आउट करने वाले गिरोह के सरगना को गिरफ्तार कर लिया। भर्ती में भ्रष्टाचार का मामला सामने आने के बाद प्रतियोगी छात्र लगातार धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं, भर्ती घोटाल में लिप्त आयोग के पदाधिकारियों ने दबाव बनाने के लिए आगामी सभी भर्ती परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। इससे प्रतियोगियों में रोष है। एमएलसी ने सीबीआई निदेशक से आग्रह किया है कि पीसीएस भर्ती परीक्षाओं और एपीएस परीक्षा-2010 की लंबित सीबीआई जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता पर अंतिम परिणाम तक पहुंचाते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।