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UP: तप... खाक चौक के तपस्वी नगर में धूनी तपस्या, बड़ी संख्या में पंचधूनी साधना में साधु-संत; जानें इसका महत्व
Sat, 24 Jan 2026 11:52 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 24 Jan 2026 11:52 AM IST
सार
प्रयागराज में माघ मेला क्षेत्र स्थित तपस्वी नगर में वसंत पंचमी से पूर्व पंचधूनी (पंचाग्नि तप) साधना की सैकड़ों साधु-संतों में शुरू कर दी है। यह साधना तीन माह तक निरंतर चलेगी।
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संगम स्नान कर खाक चौक तपस्वी नगर में धूनी तपस्या करते साधु
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रयागराज मेला क्षेत्र स्थित रामानंद मार्ग के तपस्वी नगर, पांटून पुल नंबर एक व संगम नोज के पास सहित करीब दस से अधिक शिविरों में शुक्रवार को वसंत पंचमी से बड़ी संख्या में साधु-संतों ने पंचधूनी (पंचाग्नि तपन) साधना आरंभ कर दी।
अयोध्या के महामंडलेश्वर संत श्रीराम संतोष दास ने बताया कि पंचधूनी साधना गंगा दशहरा तक चलेगी। शास्त्रों में 32 भगवत अपराधों का उल्लेख है, जिनसे बचना हर साधक और भक्त के लिए आवश्यक है। भगवान के शयन काल में परिक्रमा करना, विग्रह के सम्मुख पैर फैलाकर बैठना, ऊंचे आसन पर बैठकर भगवान की पूजा करना, भगवान के सामने ऊंचे स्वर में बोलना या चिल्लाना, विग्रह के सामने किसी को आशीर्वाद देना जैसे कृत्य भगवत अपराध की श्रेणी में आते हैं।
महामंडलेश्वर गोपालदास जी महाराज के अनुसार पंचधूनी साधना का मुख्य उद्देश्य इंद्रियों पर नियंत्रण, आत्मिक शुद्धि और आत्मबोध की प्राप्ति है।
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अयोध्या के महामंडलेश्वर संत श्रीराम संतोष दास ने बताया कि पंचधूनी साधना गंगा दशहरा तक चलेगी। शास्त्रों में 32 भगवत अपराधों का उल्लेख है, जिनसे बचना हर साधक और भक्त के लिए आवश्यक है। भगवान के शयन काल में परिक्रमा करना, विग्रह के सम्मुख पैर फैलाकर बैठना, ऊंचे आसन पर बैठकर भगवान की पूजा करना, भगवान के सामने ऊंचे स्वर में बोलना या चिल्लाना, विग्रह के सामने किसी को आशीर्वाद देना जैसे कृत्य भगवत अपराध की श्रेणी में आते हैं।
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महामंडलेश्वर गोपालदास जी महाराज के अनुसार पंचधूनी साधना का मुख्य उद्देश्य इंद्रियों पर नियंत्रण, आत्मिक शुद्धि और आत्मबोध की प्राप्ति है।
माघ मेला क्षेत्र स्थित तपस्वी नगर में वसंत पंचमी से पूर्व पंचधूनी (पंचाग्नि तप) साधना की सैकड़ों साधु-संतों में शुरू कर दी है। यह साधना तीन माह तक निरंतर चलेगी। इस आध्यात्मिक अनुष्ठान के लिए मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा समेत विभिन्न राज्यों के सैकड़ों साधु-संतों मेला क्षेत्र के खाक चौक में डेरा डाल लिया था।