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Court : बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के दोषी फूफा को फांसी की सजा, ससुराल में रहता था अभियुक्त

Fri, 16 May 2025 02:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 16 May 2025 02:31 PM IST
सार

जिला अदालत ने 13 साल पहले सात वर्षीय बच्ची संग दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले फूफा को फांसी व 80 हजार रुपये की सजा सुनाई है। यह फैसला जिला अपर सत्र और पॉक्सो की विशेष न्यायाधीश अंजू कन्नौजिया की अदालत ने सुनाई है।

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Uncle convicted of harassing and murdering a girl sentenced to death, accused lived in his in-laws' house
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जिला अदालत ने 13 साल पहले सात वर्षीय बच्ची संग दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले फूफा को फांसी व 80 हजार रुपये की सजा सुनाई है। यह फैसला जिला अपर सत्र और पॉक्सो की विशेष न्यायाधीश अंजू कन्नौजिया की अदालत ने सुनाई है। मामला नवाबगंज थाना क्षेत्र का है।

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21 अप्रैल 2012 को पीड़िता के चाचा ने आरोपी के खिलाफ सात वर्षीय भतीजी के साथ दुष्कर्म और हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी। तहरीर में बताया कि उसकी बहन और बहनोई उसके साथ ही रहते थे। बच्ची 20 अप्रैल से लापता थी। गांव के लोगों ने उसे बहनोई के साथ देखा था। इसके बाद बच्ची का शव उपहार गांव के पास गंगा के किनारे मिला था।

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पुलिस ने मामले में आरोपी फूफा को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर ही बच्ची के कपड़े और हत्या में प्रयुक्त ईंट बरामद की गई। इसके बाद ट्रायल कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। करीब 13 साल चले ट्रायल के दौरान अभियोजन की ओर से एडीजीसी मनोज पांडेय ने पांच गवाहों को पेश किया।

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अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट, सबूतों और गवाहों के बयान के आधार फूफा को बच्ची संग दुष्कर्म, ईंट से कूंचकर हत्या व सुबूत मिटाने का दोषी करार दिया। कोर्ट ने अबोध बच्ची संग फूफा के इस जघन्य कृत्य को दुर्लभतम मानते हुए फांसी की सजा व 80 हजार जुर्माने की सजा सुनाई है। हालांकि, दोषी फूफा को मिली फांसी की सजा हाईकोर्ट से पुष्टि होने के बाद अमल में लाई जाएगी।

मां ने 13 साल किया इंतजार, तब बेटी को मिला इंसाफ

पांच वर्षीय मासूम बेटी के हत्यारे को फांसी की सजा मिलने के बाद मां ने भी चैन की सांस ली है। इससे पहले वह 13 साल तक अदालत के चक्कर काटती रही। अब फैसला आने के बाद मां ने कहा कि उनकी बेटी को इंसाफ मिलने से उसके कलेजे को ठंडक पहुंची है। उनकी इकलौती बेटी के साथ दुष्कर्म करने के बाद फूफा ने ही माैत के घाट उतार दिया था।

मामला 13 साल पहले का है। 21 अप्रैल 2012 को मासूम को खिलौना दिलाने के बहाने फूफा ने बच्ची के साथ पहले दुष्कर्म किया और फिर उसकी जान ले ली थी। इस जघन्य घटना ने पूरे परिवार के साथ इलाके को भी झकझोर कर रख दिया था। तब से लेकर अब तक पांच वर्षीय मासूम बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए उसकी मां न्याय की लड़ाई लड़ रही थी। हर तारीख पर अदालत में उनकी उम्मीद टिकी रहती कि कातिल को उसके कर्मों की सजा मिलेगी।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आखिरकार अदालत ने दोषी फूफा को फांसी की सजा सुनाई। इस फैसले की सूचना मिलने के बाद मां की आंखों में आंसू छलक पड़े। फैसला आने के बाद मां ने कहा कि देर से ही सही, लेकिन न्यायालय पर उसे भरोसा था। आखिरकार बेटी को इंसाफ मिल ही गया। उसका कहना है कि हर पल मेरी आंखों के सामने इकलौती बेटी का चेहरा घूमता रहता था। अब इस फैसले से मन को शांति मिली है।

इलाहाबाद सत्र अदालत ने 48 साल में नौ बार सुनाई फांसी
 

जिला एवं सत्र न्यायालय इलाहाबाद में बीते 48 वर्षों में फांसी की यह नौवीं सजा है। इनमें दो मामले ऐसे हैं, जिनमें क्रमशः छह-छह लोगों को मृत्युदंड की सजा हुई। सबसे ज्यादा फांसी की सजा वर्ष 2009 में सुनाई गई। पूर्व डीजीसी क्रिमिनल गुलाब चंद्र अग्रहरि बताते हैं कि मार्च 2009 में बहरिया के करनईपुर गांव में पत्नी और बेटी का गला घोंटने के दोषी रामसमुझ को फांसी की सजा सुनाई थी। यह मामला हाईकोर्ट से पुनर्विचार के लिए वापस भेजा गया था। नए सिरे से आरोप सृजित हुए थे लेकिन दिसंबर में फिर से फांसी की सजा सुनाई गई थी।

इसके बाद कोरांव के चर्चित देवशरण मामले में अपर सत्र न्यायाधीश डीपीएन सिंह ने दो लोगों को फांसी व चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसी तरफ उतरांव के कल्लू हत्याकांड में संजय को भी 2009 में ही फांसी की सजा सुनाई गई थी।

फांसी की पहली सजा 1977 में तत्कालीन अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बीएन श्रीवास्तव ने छह लोगों को सुनाई थी। 1983 में एडीजे केएल शर्मा ने एक ही दिन में दो मामलों में दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद 1996 में तत्कालीन अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश भूर्तहरि प्रसाद ने मऊआइमा के बेनीपुर गांव में नौटंकी देखने के दौरान हुई चार लोगों की हत्या में छह लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी।

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