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Umesh Pal Case: क्या है वो मामला जिसमें अतीक समेत अन्य आरोपियों को होगी सजा, उमेश को लगा था आज आखिरी रात है...
Mon, 27 Mar 2023 11:08 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 27 Mar 2023 11:08 AM IST
सार
राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल का 2006 में अपहरण कर लिया गया था। 2007 में बसपा सरकार आने पर उमेश पाल की ओर से इस मामले में अधिक समेत 11 लोगों के खिलाफ धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस मामले की सुनवाई 23 मार्च को पूरी हो चुकी है और 28 मार्च को फैसला सुनाया जाना है।
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अतीक अहमद
- फोटो : ANI
विस्तार
माफिया अतीक अहमद के खिलाफ सत्र न्यायालय ने प्रोडक्शन वारंट जारी किया है। वारंट को तामील कराने के बाद अतीक की प्रयागराज वापसी के लिए प्रक्रिया पूरी कराई गई। अतीक ने वर्ष 2006 में राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल का अपहरण कर अपने पक्ष में हलफनामा लिखवा लिया था।
2007 में अतीक और उसके भाई अशरफ समेत 10 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। सुनवाई पूरी होने के बाद इसी मामले में 28 मार्च को सजा का एलान होना है। अतीक समेत सारे आरोपी उस दिन अदालत के कटघरे में रहेंगे।
दरअसल, राजू पाल हत्याकांड में गवाह बनने के बाद उमेश पाल के ऊपर खतरा मंडराने लगा था। अतीक ने कई लोगों से कहलवाया कि वह केस से हट जाए नहीं तो उसे दुनिया से हटा दिया जाएगा। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उसका अपहरण कर लिया गया। उसे करबला स्थित कार्यालय में ले जाकर अतीक ने रात भर पीटा था। उससे हलफनामा पर दस्तखत भी करवा लिए थे।
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24 फरवरी को उमेश की हत्या
अगले दिन उमेश ने अतीक के पक्ष में अदालत में गवाही भी दे दी। हालांकि वह समय बदलने का इंतजार कर रहे थे। जब 2007 में बसपा सरकार बनी तो उमेश ने अपने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया। इसी मुकदमे में पैरवी कर 24 फरवरी को उमेश घर लौट रहे थे, तभी उनकी हत्या कर दी गई। अब अदालत ने इस मामले में फैसले की तारीख 28 मार्च मुकर्रर की है।
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2007 में अतीक और उसके भाई अशरफ समेत 10 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। सुनवाई पूरी होने के बाद इसी मामले में 28 मार्च को सजा का एलान होना है। अतीक समेत सारे आरोपी उस दिन अदालत के कटघरे में रहेंगे।
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दरअसल, राजू पाल हत्याकांड में गवाह बनने के बाद उमेश पाल के ऊपर खतरा मंडराने लगा था। अतीक ने कई लोगों से कहलवाया कि वह केस से हट जाए नहीं तो उसे दुनिया से हटा दिया जाएगा। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उसका अपहरण कर लिया गया। उसे करबला स्थित कार्यालय में ले जाकर अतीक ने रात भर पीटा था। उससे हलफनामा पर दस्तखत भी करवा लिए थे।
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24 फरवरी को उमेश की हत्या
अगले दिन उमेश ने अतीक के पक्ष में अदालत में गवाही भी दे दी। हालांकि वह समय बदलने का इंतजार कर रहे थे। जब 2007 में बसपा सरकार बनी तो उमेश ने अपने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया। इसी मुकदमे में पैरवी कर 24 फरवरी को उमेश घर लौट रहे थे, तभी उनकी हत्या कर दी गई। अब अदालत ने इस मामले में फैसले की तारीख 28 मार्च मुकर्रर की है।
25 जनवरी 2005 को राजू पाल की हत्या हुई
25 जनवरी 2005 को सुलेमसराय में तत्कालीन विधायक राजू पाल की हत्या हुई तो उमेश पाल मुख्य गवाहों में से एक थे। अतीक ने अपने लोगों से कई बार उमेश को धमकाया कि वह राजू पाल केस की गवाही से हट जाए नहीं तो मार दिया जाएगा। लेकिन उमेश नहीं माने। 28 फरवरी 2006 को उमेश का अपहरण कर लिया गया। उसे करबला स्थित कार्यालय लाया गया। उमेश की रात भर पिटाई की गई।
25 जनवरी 2005 को सुलेमसराय में तत्कालीन विधायक राजू पाल की हत्या हुई तो उमेश पाल मुख्य गवाहों में से एक थे। अतीक ने अपने लोगों से कई बार उमेश को धमकाया कि वह राजू पाल केस की गवाही से हट जाए नहीं तो मार दिया जाएगा। लेकिन उमेश नहीं माने। 28 फरवरी 2006 को उमेश का अपहरण कर लिया गया। उसे करबला स्थित कार्यालय लाया गया। उमेश की रात भर पिटाई की गई।
लगने लगा था यह आखिरी रात है...
उमेश को उस समय लगा था कि यह उसकी आखिरी रात है। अतीक ने उससे हलफनामा पर दस्तखत करा लिए। हलफनामा पर लिखा था कि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। न ही उसने किसी को वहां देखा था। अगले दिन यानी एक मार्च को अतीक ने अदालत में उमेश के हलफनामा को प्रस्तुत कर अदालत के सामने गवाही भी दिलवा दी थी। उस समय शासन प्रशासन में अतीक की तूती बोलती थी।
उमेश को उस समय लगा था कि यह उसकी आखिरी रात है। अतीक ने उससे हलफनामा पर दस्तखत करा लिए। हलफनामा पर लिखा था कि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। न ही उसने किसी को वहां देखा था। अगले दिन यानी एक मार्च को अतीक ने अदालत में उमेश के हलफनामा को प्रस्तुत कर अदालत के सामने गवाही भी दिलवा दी थी। उस समय शासन प्रशासन में अतीक की तूती बोलती थी।
उमेश ने अपने केस में पैरवी की
2007 में जब बसपा सरकार बनी तो स्थिति बदलने लगी। अतीक के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई। पांच जुलाई 2007 को उमेश ने अतीक, अशरफ और उनके गुर्गों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दिया। उमेश ने लगकर अपने केस में पैरवी की।
2007 में जब बसपा सरकार बनी तो स्थिति बदलने लगी। अतीक के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई। पांच जुलाई 2007 को उमेश ने अतीक, अशरफ और उनके गुर्गों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दिया। उमेश ने लगकर अपने केस में पैरवी की।
फैसला आने से पहले ही उमेश की हत्या
उसे मुकाम तक लगभग पहुंचा ही दिया था, लेकिन फैसला आने से तकरीबन एक महीने पहले ही उमेश की हत्या कर दी गई। 28 मार्च को उमेश अपहरण कांड में सजा का ऐलान होगा। कटघरे में उसे रात भर पीटने वाले अतीक, अशरफ समेत अन्य गुर्गे होंगे।
उसे मुकाम तक लगभग पहुंचा ही दिया था, लेकिन फैसला आने से तकरीबन एक महीने पहले ही उमेश की हत्या कर दी गई। 28 मार्च को उमेश अपहरण कांड में सजा का ऐलान होगा। कटघरे में उसे रात भर पीटने वाले अतीक, अशरफ समेत अन्य गुर्गे होंगे।
यह है पूरा मामला
राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल का 2006 में अपहरण कर लिया गया था। 2007 में बसपा सरकार आने पर उमेश पाल की ओर से इस मामले में अधिक समेत 11 लोगों के खिलाफ धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस मामले की सुनवाई 23 मार्च को पूरी हो चुकी है और 28 मार्च को फैसला सुनाया जाना है।
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राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल का 2006 में अपहरण कर लिया गया था। 2007 में बसपा सरकार आने पर उमेश पाल की ओर से इस मामले में अधिक समेत 11 लोगों के खिलाफ धूमनगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इस मामले की सुनवाई 23 मार्च को पूरी हो चुकी है और 28 मार्च को फैसला सुनाया जाना है।
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11 में से एक की मौत हो चुकी है जबकि 10 आरोपियों पर आरोप तय हुए हैं। जिन पर आरोप तय हुए हैं उनमें अतीक अहमद के अलावा उसका भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ और गुर्गा आबिद प्रधान, आशिक उर्फ मल्ली, जावेद इसरार, एजाज अख्तर, दिनेश पासी, खान सौलत, हनीफ और एक अन्य शामिल हैं।
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