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ukraine crisis : जान खतरे में डाल बेल्हा की निशा ने सात किमी पैदल तय किया सफर, फिर पहुंची रोमानिया
Tue, 01 Mar 2022 04:45 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 01 Mar 2022 04:45 AM IST
सार
यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहां पढ़ने वाले मेडिकल के छात्र-छात्राओं के परिजनों की नींद उड़ गई थी। वे उनकी सकुशल घर वापसी के लिए प्रयास करने लगे। मानधाता थाना क्षेत्र के देल्हूपुर के रहने वाले दरोगा अनिल कुमार सिंह की बेटी निशी सिंह यूक्रेन में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी।
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यूक्रेन में अपने दोस्तों के साथ प्रतापगढ़ की निशा।
- फोटो : प्रतापगढ़
विस्तार
यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गईं निशा खतरे से खेल गईं। यूनिवर्सिटी की ओर से सीमा तक पहुंचाने के लिए व्यवस्था न हो पाने के बाद निशा समेत करीब बीस बच्चों ने खतरा मोल लिया और सात किमी तक पैदल सफर तय करते हुए रोमानिया की सीमा तक पहुंचे।
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वहां भी कड़ाके की ठंड में बस में बैठने के लिए मशक्कत करनी पड़ी। खतरों से खेलने के बाद निशा सोमवार की देर रात अपने परिवार के बीच पहुंची। उसे अपने सामने देख परिवार के लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
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यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहां पढ़ने वाले मेडिकल के छात्र-छात्राओं के परिजनों की नींद उड़ गई थी। वे उनकी सकुशल घर वापसी के लिए प्रयास करने लगे। मानधाता थाना क्षेत्र के देल्हूपुर के रहने वाले दरोगा अनिल कुमार सिंह की बेटी निशी सिंह यूक्रेन में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रही थी। बृहस्पतिवार की सुबह रूस के यूक्रेन पर हमले की खबर के बाद परिवार के लोग परेशान हो उठे।
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एसटीएफ में तैनात अनिल सिंह ने दूतावास से भी संपर्क साधा था। निशा के भाई सूरज के अनुसार, यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से सभी को सुरक्षित घर पहुंचाने का आश्वासन तो मिल रहा था, मगर कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। इस पर हॉस्टल व बंकर के बीच भागदौड़ करने वाली निशा व उसके साथ पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं ने खतरों से खेलते हुए आनलाइन बस बुक की।
बस पकड़ने के लिए सभी को यूनिवर्सिटी से सात किमी तक पैदल सफर तय करना था। निशा समेत बीस छात्र-छात्राएं 25 फरवरी की रात यूनिवर्सिटी से निकल पड़े। कड़ाके की सर्दी में सभी पैदल ही बस तक पहुंचे। जहां करीब पंद्रह सौ रुपये (15 ग्रेवन) सभी को चुकाने पड़े। किसी तरह यूक्रेन व रोमानिया की सीमा पर निशा पहुंचीं, जहां हजारों छात्र-छात्राएं बस में सवार होने के लिए परेशान थे।
बस चालक ने पहले छात्राओं को बैठाया। कुछ छात्र भी बस में सवार हुए। वहां से सभी को रोमानिया लाया गया। तब जाकर सभी की जान में जान आई। यहां से फ्लाइट पकड़कर रविवार की रात दिल्ली पहुंची। वहां से प्रदेश सरकार की ओर से निशा को प्राइवेट वाहन से घर भेजा गया। देर रात वह घर पहुंची। उसे गले लगाकर परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
दूसरी ओर, नगर कोतवाली के रंजीतपुर चिलबिला के रहने वाले रामजी जायसवाल का बेटा सुधांशु भी यूक्रेन के हिरोवी कुर्त 17/ ट्रेसकोवा ओडेशा में फंसा हुआ था। वह किसी तरह चोप रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया है। वहां से ट्रेन पकड़कर सुधांशू को रोमानिया पहुंचना है। परिवार के लोग लगातार उसके संपर्क में हैं। उसने परिवार के लोगों से बताया कि वहां के हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। अब खाने-पीने की लोगों को समस्या होने लगी है।
पूर्व राज्यमंत्री का भतीजा फंसा, परिजनों को सता रही चिंता
परियावां। कालाकांकर विकासखंड के परियावां के रहने वाले पूर्व राज्य मंत्री अनीस मंसूरी का भतीजा शाहनवाज मेडिकल की पढ़ाई करने यूक्रेन गया था। यूक्रेन पर रूस के हमले ने परिवार के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
पिता मोहम्मद शमीम उर्फ मन्ना मंसूरी का बेटा शाहनवाज मंसूरी यूक्रेन के कयू में अभी रुका हुआ है। कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण अभी तक वह यूक्रेन से बाहर नहीं निकल पा रहा है। परिजन स्थानीय अधिकारियों के साथ ही भारतीय दूतावास के संपर्क में हैं। वे लोग परिजनों को पूरा भरोसा दे रहे हैं कि उसे सुरक्षित पहुंचा दिया जाएगा। उससे परिवार के लोगों की बात भी हो रही है।