Prayagraj : शिक्षक की आत्महत्या मामले में दो सदस्यीय कमेटी गठित, शास्त्री पुल से लगाई थी छलांग
जुलाई का वेतन जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। वैसे शिक्षक ने 31 जुलाई को वेतन काटे जाने की शिकायत संयुक्त निदेशक से की थी। उस मामले की जांच एडीआईओएस आनंद गिरि कर रहे हैं। वह जांच पूरी नहीं हुई कि शिक्षक ने आत्महत्या कर ली है।
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प्रवक्ता करुणा शंकर शुक्ला की आत्महत्या के कारणों की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है। टीम की रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उनकी पत्नी माधवी ने विद्यालय के प्रबंधक और प्रधानाचार्य पर उत्पीड़न का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि उनका वेतन भी रोका गया था। इस मामले को संयुक्त शिक्षा निदेशक दिब्यकांत शुक्ल ने गंभीरता से लिया।
उन्होंने डीआईओएस पीएन सिंह से इस मामले में आख्या मांगी। डीआईओएस ने मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। उन्होंने बताया कि उनका वेतन क्यों रोका गया, इसकी जांच की जाएगी। इसके लिए विद्यालय से रिकॉर्ड मंगवाए गए हैं। बताया कि वेतन भुगतान तो नियमित हो रहा था।
जुलाई का वेतन जारी करने की प्रक्रिया चल रही है। वैसे शिक्षक ने 31 जुलाई को वेतन काटे जाने की शिकायत संयुक्त निदेशक से की थी। उस मामले की जांच एडीआईओएस आनंद गिरि कर रहे हैं। वह जांच पूरी नहीं हुई कि शिक्षक ने आत्महत्या कर ली है। दूसरी ओर से इस घटना से शिक्षक आहत हैं। माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी, मंडलीय मंत्री अनुज कुमार पांडेय, कोषाध्यक्ष रविंद्र कुमार त्रिपाठी ने कहा कि जो भी दोषी है उसे सजा मिले। साथ ही प्रवक्ता के परिवार को संरक्षण मिले और उनके सभी अधिकार तत्काल दिए जाएं।
माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश संरक्षक डॉ. हरि प्रकाश यादव ने कहा कि दु:ख की इस घड़ी में संगठन दिवंगत शिक्षक के परिवार के साथ है। उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों से मांग की है कि इस घटना की जांच कर वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाए।
प्रवक्ता ने घर में काटी नस, अस्पताल जाते वक्त शास्त्री पुल से लगाई छलांग
गांधी इंटर कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता ने शुक्रवार सुबह अपने हाथ की नस काट ली। दोपहर पत्नी उन्हें एसआरएन अस्पताल लेकर चलीं तो शास्त्री पुल पर सांस लेने में दिक्कत बताकर टेंपो से उतर गए और गंगा में छलांग लगा दी। गोताखोर घंटों उन्हें खोजते रहे, पर कुछ पता न चला। पत्नी ने स्कूल प्रबंधन पर प्रताड़ित करने और वेतन रोकने का आरोप लगाया है।
मूलत: प्रतापगढ़ के उदयपुर थाना क्षेत्र के रामप्रसाद का पुरवा निवासी करुणा शंकर शुक्ल (46) 20 साल से अंदावा स्थित सिटीजन हाउसिंग में परिवार संग रहते थे। वह झूंसी के पटेलनगर गांव स्थित गांधी इंटर कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रवक्ता थे। वह एक अप्रैल-17 से पांच जुलाई-23 तक कार्यवाहक प्रधानाचार्य भी रहे। 13 दिसंबर-23 को दुर्घटना में ब्रेन हेमरेज के बाद से बीमार चल रहे थे।
पत्नी माधवी का आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने उनका दो माह का वेतन रोक रखा है। इस कारण अवसाद में आकर शराब के लती भी हो गए थे। शुक्रवार सुबह करुणा शंकर ने घर में ही हाथ की नस काटकर जान देने की कोशिश की। पत्नी उन्हें आननफानन झूंसी के एक निजी अस्पताल ले गईं। वहां से एसआरएन में एक परिचित डॉक्टर को दिखाने के लिए पत्नी टेंपो से जा रही थीं।
शास्त्री पुल पर पहुंचते ही करुणा शंकर ने सांस लेने में दिक्कत बताकर टेंपो रुकवा लिया। पति-पत्नी वहीं उतर गए। तभी, करुणा शंकर पुल की पटरी पर पहुंचे और लोहे की रेलिंग पर चढ़कर गंगा में छलांग लगा दी। यह देख पत्नी बदहवास होकर चीखने-चिल्लाने लगीं। वहां राहगीरों की भीड़ लग गई। आंखों के सामने पति के गंगा में कूदने से माधवी चक्कर खाकर गिर पड़ीं। पुलिस ने शिक्षक की तलाश में गोताखोरों को उतारा, लेकिन देर रात तक उन्हें खोजा न जा सका।
छुट्टियां खत्म होने के कारण कटा वेतन: प्रधानाचार्य
कॉलेज के प्रधानाचार्य जेपी वर्मा ने घटना पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि करुणा शंकर शुक्ल का दो माह का वेतन नहीं रोका गया है। जुलाई में अभी किसी को वेतन नहीं मिला। वह कई दिनों तक बगैर सूचना दिए गैरहाजिर रहे हैं। शुक्रवार को भी वह कॉलेज नहीं आए थे। उनकी सीएल, ईएल और मेडिकल लीव खत्म हो गई थीं। इसी कारण वेतन कटा है। उन्होंने आत्मघाती कदम क्यों उठाया, इसकी मुझे जानकारी नहीं है।
शोषण के आरोप की जेडी करा रहे थे जांच
करुणा शंकर ने वेतन कटौती और प्रबंधन पर शोषण के आरोप लगाते हुए 31 जुलाई को संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) से शिकायत की थी। कहा था, उनका वेतन गलत तरीके से काटा गया है, जबकि एक दूसरे अध्यापक का वेतन नहीं काटा गया। इस पर जेडी ने एडीआईओएस अजय गिरि को जांच सौंपी थी। गिरि ने प्रधानाचार्य जेपी वर्मा से आरोपों पर आख्या मांगी थी। यह आख्या शुक्रवार को ही देनी थी कि उसके पहले यह घटना हो गई। बताते हैं कि कार्यवाहक प्रधानाचार्य रहते करुणा शंकर दो बार निलंबित किए गए थे। उन पर कॉलेज में मनचाहे अवकाश घोषित करने और गबन जैसे आरोप लगे थे। सूचना आयुक्त के आदेश पर प्रबंधन ने एक बार 25,000 रुपये हर्जाना भी उनके वेतन से काटा था।