High Court: फर्जी समझौतानामे पर केस रद्द कराने पहुंचे याचियों पर दो लाख जुर्माना, 3 माह में अदा करनी होगी राशि
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमसेरी की अदालत ने बागपत निवासी पीड़िता के पति असलम, सास भूरी और ननद आसमां नाजमा की ओर से ट्रायल कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए दिया।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के मामले में फर्जी समझौतानामा दाखिल कर मुकदमा रद्द करवाने वाले पति, सास और दो ननदों के खिलाफ पर दो लाख का जुर्माना लगाया है। तीन हफ्ते में जुर्माना न अदा करने पर ट्रायल कोर्ट की ओर से वसूली की कार्यवाही की जाएगी। साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट में खत्म हो चुके मामलों की फिर से सुनवाई शुरू करने का आदेश भी दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमसेरी की अदालत ने बागपत निवासी पीड़िता के पति असलम, सास भूरी और ननद आसमां नाजमा की ओर से ट्रायल कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए दिया। मामला बागपत के बागपत थाना क्षेत्र का है। पीड़िता अफसाना का निकाह असलम संग वर्ष 2016 में हुआ था। वर्ष 2020 में अफसाना ने पति, सास, ससुर और दो ननदों के खिलाफ घरेलू हिंसा, मारपीट और दहेज उत्पीड़न का तीन मुकदमा दर्ज कराया।
दो मुकदमों में फर्जी समझौतानामा लगा कर ट्रायल कोर्ट में लंबित घरेलू हिंसा और मारपीट दो मुकदमे वापस करवा लिए। जबकि, दहेज उत्पीड़न का मामला रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट मेें याचिका दाखिल किया। याचियों के अधिवक्ता पवन कुमार ने दलील दी कि मामला पारिवारिक है। दोनों पक्षों में सुलह समझौता हो गया है। लिहाजा, यह मुकदमा भी रद्द किया जाना चाहिए।
कोर्ट में पेश पीड़िता के अधिवक्ता राजेश कुमार यादव ने समझौतानामे पर आपत्ति दर्ज कराई। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को अदालत में तलब किया। कोर्ट के आदेश पीड़िता तो पेश हुई, लेकिन चारों याची बीमारी का हवाला देकर गैरहाजिर रहे। पीड़िता ने समझौतानामे को फर्जी बताया है।
खफा कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए सभी याचियों पर दो लाख का जुर्मना लगा दिया। साथ ही ट्रायल कोर्ट में खत्म चुके दोनों मुकदमों में फिर से शुरू कराने की अर्जी दाखिल करने की इजाजत दे दी।