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Prayagraj : चांद खमरिया से विंध्यवासिनी मंदिर तक बनेगा टूरिज्म सर्किट, वन विभाग ने शासन को भेजा प्रस्ताव
Wed, 11 Dec 2024 03:52 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 11 Dec 2024 03:52 PM IST
सार
ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने मेजा से लेकर विंध्यवासिनी देवी मंदिर तक टूरिज्म सर्किट बनाने की योजना तैयार की है। इसके लिए सिरसा के कोठारी गांव से भदोही के बारीपुर उपरहार गांव तक 30 किलोमीटर के दायरे में फैली कछुवा सेंचुरी, मेजा के चांद खमरिया व मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर तक पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की तैयारी है।
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टूरिज्म।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
वन विभाग की तरफ से जल्द ही चांद खमरिया से लेकर विंध्यवासिनी देवी मंदिर तक टूरिज्म सर्किट बनाने की तैयारी है। इसके लिए वनविभाग ने शासन को 1.5 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है। ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने मेजा से लेकर विंध्यवासिनी देवी मंदिर तक टूरिज्म सर्किट बनाने की योजना तैयार की है। इसके लिए सिरसा के कोठारी गांव से भदोही के बारीपुर उपरहार गांव तक 30 किलोमीटर के दायरे में फैली कछुवा सेंचुरी, मेजा के चांद खमरिया व मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर तक पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की तैयारी है।
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इसके तहत कछुआ सेंचुरी में लोग बोटिंग करते हुए डॉल्फ़िन मछली की अठखेलियों का भी आनंद ले सकेंगे। इतना ही नहीं, यहां पर होम-स्टे की भी सुविधा टूरिस्टों को उपलब्ध रहेगी। अगर कोई चाहे तो यहां पर कुछ दिनों तक रहकर ग्रामीणों के रहन-सहन के संबंध में जानकारी भी ले सकता है। इसके लिए ग्रामीणों को बाकायदा वन विभाग की तरफ से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि उन्हें टूरिस्टों के साथ तालमेल बनाने में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े। टूरिस्टों को अपने यहां ठहराने के लिए वह वन विभाग की तरफ से निर्धारित दर पर किराया भी ले सकेंगे। शासन की तरफ से अगर इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है, तो योजना को साकार रूप देने में कम से कम पांच वर्ष का समय लग सकता है।
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वर्जन
मिर्जापुर से लेकर मां विंध्यवासिनी देवी मंदिर तक टूरिज्म सर्किट बनाने की योजना है। इसे करीब डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से तैयार किये जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अनुमति मिलते ही इस दिशा में काम शुरू किया जाएगा। इस योजना के शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार के नए आयाम भी मिलेंगे। -अरविंद यादव, डीएफओ, वन विभाग
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