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कोरोना से बचने के लिए मांगे मनपसंद सेंटर
Mon, 03 Aug 2020 03:49 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Mon, 03 Aug 2020 03:49 PM IST
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यूपीपीएससी
- फोटो : अमर उजाला
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समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ)-२०१६ की प्रारंभिक परीक्षा १३ सितंबर को प्रस्तावित है, लेकिन इसके लिए आवेदन चार साल पहले लिए गए थे। अभ्यर्थियों को तब नहीं मालूम था कि कोरोना महामारी जैसी कोई आपदा आएगी। अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को पत्र भेजकर मांग की है कि परीक्षा में शामिल होने के लिए उन्हें मनपसंद सेंटर आवटित किए जाएं।
अभ्यर्थन वापस लेने के लिए आयोग की ओर से मांगे गए आवेदन से अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं हैं। आरओ/एआरओ-२०१६ की प्रारंभिक परीक्षा ३६१ पदों पर भर्ती के लिए २७ नवंबर २०१६ को आयोजित की गई थी। 21 जिलों के 827 परीक्षा केंद्रों में अयोजित परीक्षा के लिए 385191 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। परीक्षा दो पालियों में हुई थी।
पहली पाली में २०४९०७ (५३.२०) एवं दूसरी पाली में २०३२६१ (५२.७७ फीसदी) अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। प्रारंभिक परीक्षा में पेपर व्हाट्सएप पर वायरल हो जाने के कारण इसकी सीबीसीआईडी जांच कराई गई थी। सीबीसीआई ने तो अपनी रिपोर्ट में कहा दिया था कि पेपर आउट होने के ठोस साक्ष्य नहीं मिल हैंख्, लेकिन बाद में मामला फिर न्यायालय ने चला गया और आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा को निरस्त करते हुए नए सिरे से परीक्षा कराने का निर्णय लिया। इस परीक्षा में उन्हीं अभ्यर्थियों को शामिल होना है, जिन्होंने पूर्व में आवेदन किए थे।
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परीक्षा १३ सितंबर को होनी है और कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कुछ अभ्यर्थियों ने आयोग में प्रत्यावेदन देकर कहा था कि वे अपना अभ्यर्थन वापस लेना चाहते हैं। इस पर आयोग की ओर से विज्ञप्ति जारी कर कहा गया है कि जो आवेदक अपना अभ्यर्थन वापस लेना चाहते हैं, वे आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करें।
अभ्यर्थी इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि फॉर्म भरते वक्त नहीं मालूम था कि कोरोना महामारी जैसी कोई आपदा भी आएगी। चार साल तक परीक्षा के लिए इंतजार किया। उनकी मांग है कि आयोग अभ्यर्थियों को उन्हीं के जिले में सेंटर चुनने का विकल्प प्रदान करे या कोई अन्य मनपंसद सेंटर आवंटित करे। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो परीक्षा को स्थगित करे।
आवेदन मांगे जाने के पीछे आयोग ने तर्क दिया था कि अभ्यर्थियों के आवेदन आने के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि परीक्षा में कितने अभ्यर्थी शामिल होंगे और उसी हिसाब से परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी। अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के रिकार्ड देख लिए जाएं। अभ्यर्थियों की उपस्थिति ५० से ६० फीसदी के बीच होती है। ऐसे में अगर सौ-दो सौ आवेदन आ भी गए तो आयोग क्या कर लेगा।
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अभ्यर्थन वापस लेने के लिए आयोग की ओर से मांगे गए आवेदन से अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं हैं। आरओ/एआरओ-२०१६ की प्रारंभिक परीक्षा ३६१ पदों पर भर्ती के लिए २७ नवंबर २०१६ को आयोजित की गई थी। 21 जिलों के 827 परीक्षा केंद्रों में अयोजित परीक्षा के लिए 385191 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। परीक्षा दो पालियों में हुई थी।
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पहली पाली में २०४९०७ (५३.२०) एवं दूसरी पाली में २०३२६१ (५२.७७ फीसदी) अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी। प्रारंभिक परीक्षा में पेपर व्हाट्सएप पर वायरल हो जाने के कारण इसकी सीबीसीआईडी जांच कराई गई थी। सीबीसीआई ने तो अपनी रिपोर्ट में कहा दिया था कि पेपर आउट होने के ठोस साक्ष्य नहीं मिल हैंख्, लेकिन बाद में मामला फिर न्यायालय ने चला गया और आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा को निरस्त करते हुए नए सिरे से परीक्षा कराने का निर्णय लिया। इस परीक्षा में उन्हीं अभ्यर्थियों को शामिल होना है, जिन्होंने पूर्व में आवेदन किए थे।
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परीक्षा १३ सितंबर को होनी है और कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। कुछ अभ्यर्थियों ने आयोग में प्रत्यावेदन देकर कहा था कि वे अपना अभ्यर्थन वापस लेना चाहते हैं। इस पर आयोग की ओर से विज्ञप्ति जारी कर कहा गया है कि जो आवेदक अपना अभ्यर्थन वापस लेना चाहते हैं, वे आयोग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करें।
अभ्यर्थी इससे संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि फॉर्म भरते वक्त नहीं मालूम था कि कोरोना महामारी जैसी कोई आपदा भी आएगी। चार साल तक परीक्षा के लिए इंतजार किया। उनकी मांग है कि आयोग अभ्यर्थियों को उन्हीं के जिले में सेंटर चुनने का विकल्प प्रदान करे या कोई अन्य मनपंसद सेंटर आवंटित करे। अगर ऐसा नहीं हो सकता तो परीक्षा को स्थगित करे।
आवेदन मांगे जाने के पीछे आयोग ने तर्क दिया था कि अभ्यर्थियों के आवेदन आने के बाद स्पष्ट हो जाएगा कि परीक्षा में कितने अभ्यर्थी शामिल होंगे और उसी हिसाब से परीक्षा की तैयारी कराई जाएगी। अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों के रिकार्ड देख लिए जाएं। अभ्यर्थियों की उपस्थिति ५० से ६० फीसदी के बीच होती है। ऐसे में अगर सौ-दो सौ आवेदन आ भी गए तो आयोग क्या कर लेगा।