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High Court : सीपीएफ के बदले पेंशन योजना का विकल्प न चुनने वाले पेंशन के हकदार नहीं

Sat, 10 May 2025 11:26 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 10 May 2025 11:26 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 1987 के ज्ञापन के मुताबिक, निर्धारित समय में अंशदाई भविष्य निधि (सीपीएफ) के बदले पेंशन योजना में शामिल होने का विकल्प न चुन पाने वाले कर्मचारी पेंशन के हकदार नहीं हैं।

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Those who do not opt for pension scheme instead of CPF are not entitled to pension
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 1987 के ज्ञापन के मुताबिक, निर्धारित समय में अंशदाई भविष्य निधि (सीपीएफ) के बदले पेंशन योजना में शामिल होने का विकल्प न चुन पाने वाले कर्मचारी पेंशन के हकदार नहीं हैं। 1986 के बाद नियुक्त कर्मचारी को पेंशन योजना का लाभ दिया जा सकता है, बशर्ते वे सीपीएफ के तहत मिली राशि आठ फीसदी प्रतिवर्ष के ब्याज संग दो माह में लौटा दें।

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यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति पीके गिरि की अदालत ने बीएचयू के कर्मचारी अखौरी सुधीर कुमार सिन्हा की विशेष अपील स्वीकार करते हुए और प्रो.हरीश चंद्र चौधरी, प्रो.अजय कुमार सिंह व 25 अन्य याचियों की अपील खारिज करते हुए दिया है।

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मामला बीएचयू के ऐसे शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कर्मचारियों से जुड़ा है, जो सीपीएफ के तहत लाभ पा रहे थे। ये एक मई 1987 के कार्यालय ज्ञापन के तहत पेंशन योजना में शामिल होने का विकल्प नहीं चुन पाए थे। अखौरी सुधीर सिन्हा के अधिवक्ता का तर्क था कि 2013 में समान स्थिति वाले डॉ. सुशील कुमार सिंह को पेंशन योजना का लाभ दिया गया है। याची की नियमित नियुक्ति 1990 में हुई थी। उन्हें विकल्प चुनने की जरूरत ही नहीं थी, लिहाजा वह पेंशन के हकदार हैं।

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वहीं, प्रो.हरीश चंद्र चौधरी, प्रो.अजय कुमार सिंह व 25 अन्य शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक कर्मचारियों ने तय समय सीमा में पेंशन योजना में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना था। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने यह कहते हुए इनकी याचिका खारिज कर दी थी कि विवि प्रशासन को समय सीमा बढ़ाने का अधिकार नहीं है। एकल पीठ के इस आदेश को सभी ने खंडपीठ में चुनौती दी थी। कोर्ट ने सुधीर कुमार सिन्हा की अपील स्वीकार कर ली बाकी अन्य विशेष अपीलें खारिज कर दी।

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