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अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के 30 हजार पद खाली, भर्ती की मांग

Thu, 10 Feb 2022 01:18 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 10 Feb 2022 01:18 AM IST
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Thirty thousand posts are vacant, but there is no problem of recruitment
प्रयागराज। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के 30 हजार पद खाली पड़े हुए हैं। इनमें से तकरीबन पांच हजार पदों का अधियाचन उतर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को मिल चुका है। इसके बावजूद नई भर्तियां नहीं निकाली जा रहीं हैं। वहीं, बड़ी संख्या में तमाम पुरानी भर्तियां लंबित पड़ी हुईं हैं। भर्तियों में भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के खिलाफ मोर्चा खोल चुके प्रतियोगी छात्रों ने रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शीघ्र शुरू किए जाने और लंबित भर्तियों को समय से पूरा किए जाने की मांग की है।
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प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति की ओर से सोशल मीडिया पर जारी किए गए मांग पत्र में शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती की मांग किए जाने के साथ ही कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चयन बोर्ड को घेरा गया है। छात्र चाहते हैं कि पूर्व में लंबित सभी भर्तियों को 90 दिन के अंदर पूरा कर लिया जाए। इनमें प्रधानाचार्य भर्ती-2013 भी शामिल है, जिसके लिए इंटरव्यू की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। सहायक अध्यापक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती-2011 के तहत कुछ विषयों में भर्तियां अभी अधूरी पड़ी हुईं हैं। प्रतियोगी छात्र यह मांग भी कर रहे हैं कि रिक्त पड़े 30 हजार पदों का विज्ञापन जारी कर 180 दिनों के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।
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इसके अलावा भी छात्रों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। वे चाहते हैं कि पुरुष वर्ग एवं महिला वर्ग की भर्ती अलग-अलग करने के बजाय अभ्यर्थियों की एक मेरिट बनाई जाए और परीक्षा के उपरांत अभ्यर्थियों को पुरुष या महिला वर्ग के स्कूल/कालेज चुनने की स्वतंत्रता प्रदान की जाए। साथ ही परीक्षा की उत्तरकुंजी जारी होने के बाद अभ्यर्थियों को अपनी आपत्ति दर्ज कराने के लिए 15 दिन का समय दिया जाए।
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अधिकारियों-कर्मचारियों की संपत्ति की हो जांच
प्रतियोगी छात्रों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भी चयन बोर्ड को घेरा है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय और समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने आरोप लगाए हैं कि नकल माफिया और चयन बोर्ड के भीतर बैठे कुछ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के बीच सांठगांठ है। उन्होंने इसकी जांच कराए जाने और अधिकारियों, सदस्यों एवं कर्मचारियों के चयन बोर्ड ज्वाइन करने से पहले एवं चयन बोर्ड छोड़ने के बाद संपत्ति का विवरण सार्वजनिक किए जाने की मांग भी की है।

चयन के बाद नियुक्ति के लिए भटक रहे अभ्यर्थी
चयन के बाद अभ्यर्थियों को नियुक्ति के लिए भटकना पड़ता है। समिति ने मांग की है कि आवंटित कॉलेजों में समयबद्ध ढंग से चयनितों को ज्वाइन कराने की बाध्यता हो और परीक्षा सरकारी एजेंसी के माध्यम से कराई जाए। प्रतियोगी छात्र यह भी चाहते हैं कि इंटरव्यू में कोडिंग व्यवस्था समाप्त कर रैंडम आधार पर अभ्यर्थियों को साक्षात्कार बोर्ड में भेजा जाए और साक्षात्कार के समय समस्त मोबाइल फोन को जैमर के माध्यम से निष्क्रिय किया जाए।
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