प्रयागराज : न्यायविद् हनुमान मंदिर के स्थान परिवर्तन को लेकर वकीलों में दो फाड़, भूमि पूजन के बाद बढ़ा विवाद
मामले में एक पक्ष मंदिर को किसी भी सूरत में तोड़ने, स्थानांतरित करने के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि यह तकरीबन सौ साल पुराने मंदिर को हटाने की साजिश है। इसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। दूसरी तरफ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के साथ यूपी सरकार के बड़े पदों पर तैनात अधिवक्ता मंदिर बनवाने में जुट गए हैं।
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हाईकोर्ट के आंबेडकर चौराहे के पास स्थित न्यायविद हनुमान मंदिर के स्थानांतरण को लेकर मंगलवार को अधिवक्ता दो फाड़ हो गए। यहां से हनुमान जी की प्रतिमा को हटाकर दूसरी जगह मंदिर का निर्माण कराने के लिए शिलान्यास कराए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। न्यायविद हनुमान मंदिर बचाओ संघर्ष समिति ने स्थानांतरण के विरोध में आंदोलन का एलान कर दिया है।
मामले में एक पक्ष मंदिर को किसी भी सूरत में तोड़ने, स्थानांतरित करने के लिए तैयार नहीं है। उनका कहना है कि यह तकरीबन सौ साल पुराने मंदिर को हटाने की साजिश है। इसे सफल नहीं होने दिया जाएगा। दूसरी तरफ हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के साथ यूपी सरकार के बड़े पदों पर तैनात अधिवक्ता मंदिर बनवाने में जुट गए हैं। मंदिर की बाउंड्रीवॉल बनाने का काम शुरू हो गया है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष अशोक सिंह का कहना है कि यह मंदिर अधिवक्ताओं की ओर से बनवाया जा रहा है। इसे बनवाने का खर्चा भी अधिवक्ताओं की ओर से ही दिया जाएगा। दूसरी तरफ पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र नाथ सिंह का कहना है कि सरकारी जमीन पर अधिवक्ता, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन या दूसरे लोग मंदिर कैसे बनवा सकते हैं। मंदिर बनवाने के लिए भूस्वामित्व होना जरूरी है। बार के पास या किसी और के पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है कि वह सरकारी जमीन पर मंदिर बनवाए। मंदिर का कोई नक्शा पास नहीं है।
पहले भी हो चुका है विवाद
पूर्व अध्यक्ष राकेश पांडेय का कहना है कि वर्तमान न्यायविद मंदिर को बचाने के लिए अधिवक्ताओं ने बहुत संघर्ष किया है। इसका आकार छोटा कर व्यवस्था बनाई जा सकती है और विकास कार्य हो सकता है, लेकिन इस तरह से किया जाने वाला कार्य साजिश को दर्शाता है।
न्यायविद हनुमान मंदिर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीकांत मिश्रा का कहना है कि किसी भी दशा में इस साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने अध्यक्ष से इस मुद्दे पर बातचीत की और उनसे स्थिति जाननी चाही, लेकिन स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन यह मंदिर नहीं बनवा सकता है। शिलान्यास वाली जगह के पीछे शौचालय है। उन्होंने कहा कि यह एक साजिश का हिस्सा है। ऐसा तब हो रहा है, जब न्यायविद हनुमान मंदिर को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका लंबित है।