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किताबों से होती है भाषा की सही पहचान

Wed, 02 Sep 2015 12:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 02 Sep 2015 12:54 AM IST
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There is the correct identification of language books
इलाहाबाद। साहित्य भंडार और मीरा फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार से पांच दिनी पुस्तक प्रदर्शनी शुरू हुई। प्रदर्शनी का उद्घाटन राजेंद्र कुमार ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि पुस्तकों के अभाव में न तो हम वर्तनी सीख सकते हैं और न सही भाषा की पहचान करना। किताबों से अच्छा मित्र कोई नहीं है। प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि पुस्तकों का सानिध्य संस्कारित करता है। वरिष्ठ उपन्यासकार श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा कि बिना पुस्तकों के देश दुनिया की ऐतिहासिक, भौगोलिक, आर्थिक, सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को नहीं जान सकते।
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विषय प्रवर्तन करते हुए नंदल हितैषी ने कहा कि पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं है। जब हम पुस्तक पढ़ रहे होते हैं तो रचना प्रक्रिया से भी गुजरते हैं। किताबें अकेले में भी अकेलेपन का अहसास नहीं कराती हैं। इस दौरान हरिश्चंद्र पांडेय, यश मालवीय, धनंजय चोपड़ा ने भी विचार व्यक्त किए। प्रदर्शनी में विभिन्न विषयों की 500 से अधिक पुस्तकें प्रदर्शित की गईं है। कार्यक्रम में साहित्य भंडार के सतीश चंद्र अग्रवाल, विभोर अग्रवाल, स्मिता, श्रीरंग पांडेय, रतिनाथ योगेश्वर समेत काफी संख्या में लोग मौजूद रहे।
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