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दूसरे दिन भी नहीं खुला कचहरी का ताला
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 28 Jul 2016 01:40 AM IST
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सुमित पांडेय हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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वकीलों की हड़ताल के कारण बुधवार को भी कचहरी का ताला नहीं खुला। न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप रहा। अधिवक्ताओं ने सुमित पांडेय की हत्या के विरोध और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखा है। दूसरे दिन वादकारी मुकदमों में बिना तारीख के वापस लौट गए।
जिला अधिवक्ता संघ के मंत्री कौशलेश सिंह ने बताया कि संघ की आम सभा पहले जिला जज के गेट पर हुई। बरसात के कारण बाद में संघ हाल में राकेश कुमार तिवारी की अध्यक्षता में हुई, जो अपराह्न दो बजे तक चली। न्यायालय परिसर के चारों गेट पर मंगलवार की तरह तालाबंदी की गई। आम सभा में वक्ताओं ने मृतक अधिवक्ता के परिवार को 50 लाख की आर्थिक सहायता देने, पत्नी को सरकारी नौकरी और घटना की सीबीआई से जांच करा कर वास्तविक अभियुक्तों की गिरफ्तारी करने की पूर्व मांगों के पूरा होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया। सभा में चंद्रिका प्रसाद शर्मा, सूबेदार सिंह, भगवत प्रसाद पांडेय, रविशंकर मिश्र, विजय सिंह आकाश, बाल गोविंद, कृष्ण चंद्र मिश्र बऊ, प्रमोद सिंह नीरज, राकेश दुबे, वीरेंद्र शुक्ल, अरुण उपाध्याय, श्रीमती ऊषा मिश्र, श्रीकान्त पांडेय मानस, ललित ओझा और कुश पांडेय ने अपने विचार रखा है। आम सभा के बाद पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मंत्रियों की एक बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया गया।
बैठक में जगतपाल सिंह, सीता राम सिंह, विनोद चंद दुबे, राजेंद्र श्रीवास्तव, उमाशंकर तिवारी, कृष्ण बिहारी तिवारी, शीतला प्रसाद मिश्र, धारा सिंह, अखिलेश झा, दिनेश श्रीवास्तव, अनिल तिवारी, देवेंद्र मिश्र नगरहा, राजेंद्र प्रसाद मिश्र और संघ के पदाधिकारी लक्ष्मी कांत मिश्र, प्रभात श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश शुक्ल, कमलेश्वर, प्रिया तिवारी आदि उपस्थित रहे है। एडवोकेट एसोसिएशन की कल्पना श्रीवास्तव, रमेश नारायण, शिव शरण श्रीवास्तव आदि ने आंदोलन का समर्थन किया है।
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अधिवक्ता सुमित पांडेय की हत्या के मामले में हाईकोर्ट के अधिवक्ता बृहस्पतिवार को दिन में 11 बजे के बाद धरने पर बैठ जाएंगे। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार 11 बजे तक कोई घोषणा नहीं करती है तो वकील धरना शुरू कर देंगे, जो मांगे पूरी होने तक जारी रहेगा। इस मामले में एक सभा लाइब्रेरी हॉल में हुई जिसकी अध्यक्षता पूर्व उपाध्यक्ष विष्णु पांडेय ने की। सभा में कहा गया कि यदि किसी वर्ग विशेष से जुड़े व्यक्ति की हत्या होती है तो सरकार मुआवजे के साथ ही परिवार के दो-दो लोगों को नौकरी देती है, जबकि अधिवक्ता की हत्या पर उसे किसी भी प्रकार की सहायता नहीं दी जा रही है।
बैठक को राजेश पांडेय, कालिका प्रसाद पाल, सुनील चौधरी, अमित शुक्ला, अनुज त्रिपाठी, श्रवण पांडेय, अभिषेक शुक्ला आदि ने भी संबोधित किया। एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की इस मामले को लेकर एक शोक सभा हुई, जिसमें दिवंगत अधिवक्ता को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। सभा में सरकार से मांग की गई है कि वकीलों की सुरक्षा को गंभीरता से ले। सभा को अजीत भारती, चंद्र प्रकाश निगम आदि ने संबोधित किया।
वादकारी और वकीलों से गुलजार रहने वाली कचहरी इन दिनों सन्नाटे में है। वहीं स्टैंप वेंड़र, टाइपिंग वाले, फोटो स्टेट संचालक और चाय पान के दुकानदारों को खासी परेशानी हो रही है। वहीं दूर दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले वादकारियों को भी मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
कचहरी में न्यायिक कार्य न होने से सरकार को भी लाखों के राजस्व की रोज हानि हो रही है। रजिस्ट्री कार्यालय में होने वाले बैनामे और कोषागार से लाखों रुपए के स्टाम्प पेपर की खपत प्रभावित हो रही है। आम लोगों का कहना है कि वकीलों की मांगों पर शासन को विचार करना चाहिए ताकि कचहरी का कामकाज बहाल हो सके ।
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जिला अधिवक्ता संघ के मंत्री कौशलेश सिंह ने बताया कि संघ की आम सभा पहले जिला जज के गेट पर हुई। बरसात के कारण बाद में संघ हाल में राकेश कुमार तिवारी की अध्यक्षता में हुई, जो अपराह्न दो बजे तक चली। न्यायालय परिसर के चारों गेट पर मंगलवार की तरह तालाबंदी की गई। आम सभा में वक्ताओं ने मृतक अधिवक्ता के परिवार को 50 लाख की आर्थिक सहायता देने, पत्नी को सरकारी नौकरी और घटना की सीबीआई से जांच करा कर वास्तविक अभियुक्तों की गिरफ्तारी करने की पूर्व मांगों के पूरा होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया। सभा में चंद्रिका प्रसाद शर्मा, सूबेदार सिंह, भगवत प्रसाद पांडेय, रविशंकर मिश्र, विजय सिंह आकाश, बाल गोविंद, कृष्ण चंद्र मिश्र बऊ, प्रमोद सिंह नीरज, राकेश दुबे, वीरेंद्र शुक्ल, अरुण उपाध्याय, श्रीमती ऊषा मिश्र, श्रीकान्त पांडेय मानस, ललित ओझा और कुश पांडेय ने अपने विचार रखा है। आम सभा के बाद पूर्व अध्यक्ष और पूर्व मंत्रियों की एक बैठक हुई, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार किया गया।
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बैठक में जगतपाल सिंह, सीता राम सिंह, विनोद चंद दुबे, राजेंद्र श्रीवास्तव, उमाशंकर तिवारी, कृष्ण बिहारी तिवारी, शीतला प्रसाद मिश्र, धारा सिंह, अखिलेश झा, दिनेश श्रीवास्तव, अनिल तिवारी, देवेंद्र मिश्र नगरहा, राजेंद्र प्रसाद मिश्र और संघ के पदाधिकारी लक्ष्मी कांत मिश्र, प्रभात श्रीवास्तव, श्रीप्रकाश शुक्ल, कमलेश्वर, प्रिया तिवारी आदि उपस्थित रहे है। एडवोकेट एसोसिएशन की कल्पना श्रीवास्तव, रमेश नारायण, शिव शरण श्रीवास्तव आदि ने आंदोलन का समर्थन किया है।
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अधिवक्ता सुमित पांडेय की हत्या के मामले में हाईकोर्ट के अधिवक्ता बृहस्पतिवार को दिन में 11 बजे के बाद धरने पर बैठ जाएंगे। वकीलों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार 11 बजे तक कोई घोषणा नहीं करती है तो वकील धरना शुरू कर देंगे, जो मांगे पूरी होने तक जारी रहेगा। इस मामले में एक सभा लाइब्रेरी हॉल में हुई जिसकी अध्यक्षता पूर्व उपाध्यक्ष विष्णु पांडेय ने की। सभा में कहा गया कि यदि किसी वर्ग विशेष से जुड़े व्यक्ति की हत्या होती है तो सरकार मुआवजे के साथ ही परिवार के दो-दो लोगों को नौकरी देती है, जबकि अधिवक्ता की हत्या पर उसे किसी भी प्रकार की सहायता नहीं दी जा रही है।
बैठक को राजेश पांडेय, कालिका प्रसाद पाल, सुनील चौधरी, अमित शुक्ला, अनुज त्रिपाठी, श्रवण पांडेय, अभिषेक शुक्ला आदि ने भी संबोधित किया। एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की इस मामले को लेकर एक शोक सभा हुई, जिसमें दिवंगत अधिवक्ता को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। सभा में सरकार से मांग की गई है कि वकीलों की सुरक्षा को गंभीरता से ले। सभा को अजीत भारती, चंद्र प्रकाश निगम आदि ने संबोधित किया।
वादकारी और वकीलों से गुलजार रहने वाली कचहरी इन दिनों सन्नाटे में है। वहीं स्टैंप वेंड़र, टाइपिंग वाले, फोटो स्टेट संचालक और चाय पान के दुकानदारों को खासी परेशानी हो रही है। वहीं दूर दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाले वादकारियों को भी मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
कचहरी में न्यायिक कार्य न होने से सरकार को भी लाखों के राजस्व की रोज हानि हो रही है। रजिस्ट्री कार्यालय में होने वाले बैनामे और कोषागार से लाखों रुपए के स्टाम्प पेपर की खपत प्रभावित हो रही है। आम लोगों का कहना है कि वकीलों की मांगों पर शासन को विचार करना चाहिए ताकि कचहरी का कामकाज बहाल हो सके ।