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आक्सीजन घोटाले में निलंबित चल रहे डॉ. कफील के खिलाफ दोबारा जांच का आदेश वापस
Sat, 07 Aug 2021 08:38 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 07 Aug 2021 08:38 PM IST
सार
- चार साल से निलंबित रखने के औचित्य पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
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kafeel
विस्तार
बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में ऑक्सीजन खरीद घोटाले के आरोप में निलंबित चल रहे डॉ. कफील अहमद के खिलाफ दोबारा जांच का आदेश प्रदेश सरकार ने वापस ले लिया है। डॉ. कफील अहमद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर निलंबन को चुनौती दी है। इस पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जानकारी मांगी थी कि डॉ. कफील को चार वर्षों से निलंबित क्यों रखा गया है और एक बार जांच रिपोर्ट दाखिल होने के बाद दोबारा जांच का आदेश देने में 11 माह का समय क्यों लगाया गया।
याचिका पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की एकल पीठ सुनवाई कर रही है। इसके जवाब में प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि डॉ. कफील के खिलाफ 24 फरवरी 20 को दोबारा जांच का आदेश वापस ले लिया गया है तथा अधिकारियों को इस बात की छूट दी गई है कि वह हाईकोर्ट के 29 जुलाई 21 के आदेश के परिप्रेक्ष्य में नए सिरे से कार्यवाही प्रारंभ कर सकते हैं। कोर्ट को सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि विभागीय जांच तीन माह में पूरी करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
इसके बाद कोर्ट ने कहा कि अदालत के पास विचारणीय मुद्दा यह रह गया है कि याची को पिछले चार वर्षों से निलंबित रखने का औचित्य क्या है। याचिका में कहा गया है कि याची सहित नौ लोगों के खिलाफ विभागीय जांच प्रारंभ की गई थी। इनमें से सात को बहाल कर दिया गया, जबकि याची के खिलाफ जांच रिपोर्ट में कोई तथ्य न पाए जाने के बावजूद दोबारा जांच का आदेश दिया गया और उसे अब तक निलंबित रखा गया है। कोर्ट इस मामले पर अब दस अगस्त को सुनवाई करेगी।
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याचिका पर न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की एकल पीठ सुनवाई कर रही है। इसके जवाब में प्रदेश सरकार के अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि डॉ. कफील के खिलाफ 24 फरवरी 20 को दोबारा जांच का आदेश वापस ले लिया गया है तथा अधिकारियों को इस बात की छूट दी गई है कि वह हाईकोर्ट के 29 जुलाई 21 के आदेश के परिप्रेक्ष्य में नए सिरे से कार्यवाही प्रारंभ कर सकते हैं। कोर्ट को सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया है कि विभागीय जांच तीन माह में पूरी करने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
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इसके बाद कोर्ट ने कहा कि अदालत के पास विचारणीय मुद्दा यह रह गया है कि याची को पिछले चार वर्षों से निलंबित रखने का औचित्य क्या है। याचिका में कहा गया है कि याची सहित नौ लोगों के खिलाफ विभागीय जांच प्रारंभ की गई थी। इनमें से सात को बहाल कर दिया गया, जबकि याची के खिलाफ जांच रिपोर्ट में कोई तथ्य न पाए जाने के बावजूद दोबारा जांच का आदेश दिया गया और उसे अब तक निलंबित रखा गया है। कोर्ट इस मामले पर अब दस अगस्त को सुनवाई करेगी।
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