{"_id":"667a1571b4cd881c5f0e8cfa","slug":"the-leech-that-entered-the-nose-while-bathing-in-the-waterfall-was-removed-after-15-days-allahabad-news-c-358-1-sald1017-113039-2024-06-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj News: वाटरफॉल में नहाते वक्त नाक में घुसी जोंक 15 दिन बाद निकाली गई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj News: वाटरफॉल में नहाते वक्त नाक में घुसी जोंक 15 दिन बाद निकाली गई
विज्ञापन
सिविल लाइंस स्थित नाजरेथ अस्पताल में सोमवार को ईएनटी (आंख-कान-नाक) के चिकित्सकों ने दूरबीन विधि से सर्जरी करके लूकरगंज निवासी सिशील (19) की नाक से जिंदा जोंक निकाली। दो हफ्ते से जोंक मरीज की नाक में खून चूस रही थी। चिकित्सकों का कहना है कि नाक के अंदर जोंक का मिलना अद्भुत घटना है। मात्र 10 मिनट की सर्जरी के बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब वह पूरी तरह से स्वस्थ है। दस दिन बाद उसे फॉलोअप के लिए बुलाया गया है।
करीब दो हफ्ते पहले सिशील मुक्तेश्वर (उत्तराखंड) स्थित भालू गृह वाटरफॉल के रुके हुए पानी में नहाने गए थे। तभी से उनकी नाक से लाल और काले रंग का खून आने लगा। इस दौरान उन्हें नाक में कुछ हलचल सी महसूस होती थी। एक दिन उन्होंने नाक का वीडियो बनाया, तो कोई काली चीज थोड़ी बाहर आई, फिर अंदर चली गई। इसके बाद वह रविवार को सिविल लाइंस स्थित निजी अस्पताल में दिखाने पहुंचे। जहां जांच करने पर कुछ पता नहीं चला।
मरीज का वीडियो देखने के बाद डॉक्टरों ने दूरबीन विधि से सर्जरी करके जीवित फॉरेन बॉडी (जोंक) निकाली। डाॅक्टरों का कहना है कि मरीज के बाईं तरफ नाक में अंदर काफी गहराई में जोंक टर्बिनेट के पीछे छिपी हुई थी और धीरे-धीरे वहां से रक्त चूस रही थी। अस्पताल के ईएनटी विभाग के सर्जन डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा ने दूरबीन विधि से बिना आसपास के नाॅर्मल स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाए सुगमता से जोंक निकाली। चिकित्सकों का कहना है कि जोंक नाक के रास्ते दिमाग या आंख में नहीं गई। सर्जरी के दौरान डॉ. एसबी सिंह, सिस्टर अन, सिस्टर शिनू और डॉ. अनिर्विना उपस्थित रहे।
विज्ञापन
मरीज की नाक में जोंक का होना अपने आपमें एक अद्भुत घटना है। मेरे हिसाब से प्रयागराज में इस प्रकार की सर्जरी पहली बार हुई होगी। जाेंक को एक जार में रखा गया है। मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है। - डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा, ईएनटी विभाग, नाजरेथ अस्पताल
विज्ञापन
करीब दो हफ्ते पहले सिशील मुक्तेश्वर (उत्तराखंड) स्थित भालू गृह वाटरफॉल के रुके हुए पानी में नहाने गए थे। तभी से उनकी नाक से लाल और काले रंग का खून आने लगा। इस दौरान उन्हें नाक में कुछ हलचल सी महसूस होती थी। एक दिन उन्होंने नाक का वीडियो बनाया, तो कोई काली चीज थोड़ी बाहर आई, फिर अंदर चली गई। इसके बाद वह रविवार को सिविल लाइंस स्थित निजी अस्पताल में दिखाने पहुंचे। जहां जांच करने पर कुछ पता नहीं चला।
विज्ञापन
मरीज का वीडियो देखने के बाद डॉक्टरों ने दूरबीन विधि से सर्जरी करके जीवित फॉरेन बॉडी (जोंक) निकाली। डाॅक्टरों का कहना है कि मरीज के बाईं तरफ नाक में अंदर काफी गहराई में जोंक टर्बिनेट के पीछे छिपी हुई थी और धीरे-धीरे वहां से रक्त चूस रही थी। अस्पताल के ईएनटी विभाग के सर्जन डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा ने दूरबीन विधि से बिना आसपास के नाॅर्मल स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाए सुगमता से जोंक निकाली। चिकित्सकों का कहना है कि जोंक नाक के रास्ते दिमाग या आंख में नहीं गई। सर्जरी के दौरान डॉ. एसबी सिंह, सिस्टर अन, सिस्टर शिनू और डॉ. अनिर्विना उपस्थित रहे।
विज्ञापन
मरीज की नाक में जोंक का होना अपने आपमें एक अद्भुत घटना है। मेरे हिसाब से प्रयागराज में इस प्रकार की सर्जरी पहली बार हुई होगी। जाेंक को एक जार में रखा गया है। मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है। - डॉ. सुभाष चंद्र वर्मा, ईएनटी विभाग, नाजरेथ अस्पताल