फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The Education Service Selection Commission acknowledged that 29 questions in the TGT exam were asked from outside the syllabus.

Prayagraj News: शिक्षा सेवा चयन आयोग ने माना, टीजीटी परीक्षा में पाठ्यक्रम के बाहर से पूछे गए 29 प्रश्न

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 02:39 AM IST
विज्ञापन
The Education Service Selection Commission acknowledged that 29 questions in the TGT exam were asked from outside the syllabus.
इलाहाबाद हाईकोर्ट में टीजीटी अंग्रेजी विषय की भर्ती परीक्षा के विवादित प्रश्नों के मामले में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि जिन 37 प्रश्नों के पाठ्यक्रम से बाहर होने के आरोप लगे थे उनमें से विशेषज्ञ समिति ने 29 प्रश्नों को पाठ्यक्रम से बाहर माना है।
विज्ञापन

हालांकि, चार अन्य प्रश्नों को गलत बताए जाने संबंधी अभ्यर्थियों की आपत्तियों को विशेषज्ञ समिति ने स्वीकार नहीं किया। आयोग के अधिवक्ता ने कोर्ट में कहा कि वह विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर दाखिल करेंगे।
विज्ञापन

यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की अदालत ने आदित्य कुमार सिंह एवं 17 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर दिया। याचियों ने आरोप लगाया है कि टीजीटी अंग्रेजी विषय की परीक्षा के प्रश्न संख्या तीन, 11, 12 और 100 गलत हैं। इसके अलावा याचिका के पैरा-31 में उल्लिखित 37 प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर पूछे गए हैं। इसी विवाद को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि सामान्यतः अदालत विशेषज्ञ समिति की राय पर विशेषज्ञ की तरह विचार नहीं करती लेकिन यदि रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि दिखाई देती है तो न्यायालय हस्तक्षेप कर सकता है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद याची अपनी आपत्तियां दाखिल करेंगे और यह भी स्पष्ट करेंगे कि किन परिस्थितियों में अदालत विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में हस्तक्षेप कर सकती है।

इससे पहले सुनवाई के दौरान आयोग के अधिवक्ता हाईकोर्ट के निर्देश के क्रम में मांगी गई जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सके थे। तब याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी थी कि दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने वाली है और समय रहते सुनवाई नहीं होने पर उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने आयोग को आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था और चेतावनी दी थी कि आदेश का पालन न होने पर आयोग के सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। सुनवाई के बाद अदालत ने मामले को 20 जुलाई 2026 को दोपहर 12:30 बजे पुनः सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed