{"_id":"6a8501df557f0783db05f2d6","slug":"the-allahabad-high-court-stated-that-no-organization-can-be-blacklisted-indefinitely-2026-08-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- किसी भी संस्था को अनिश्चितकाल के लिए ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकते, समय तय हो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- किसी भी संस्था को अनिश्चितकाल के लिए ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकते, समय तय हो
Wed, 19 Aug 2026 06:38 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 19 Aug 2026 06:38 AM IST
सार
हाईकोर्ट ने कहा कि बिना वैध कारण या तय समय-सीमा के ब्लैकलिस्टिंग का आदेश जारी करना कानूनन गलत है।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी भी संस्था या ठेकेदार को अनिश्चितकाल के लिए ब्लैकलिस्ट नहीं किया जा सकता है। बिना वैध कारण या तय समय-सीमा के ब्लैकलिस्टिंग का आदेश जारी करना कानूनन गलत है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने रामपुर की आरंभ एग्रो परपज कोऑपरेटिव सोसाइटी लि. व अन्य की याचिका पर किया। याची संस्था में वर्ष 2019 में नए चुनाव के बाद रितु मीना संस्था की अध्यक्ष चुनी गईं। आरोप है कि पूर्व अध्यक्ष और कुछ निजी व्यक्तियों ने कथित रूप से फर्जी समझौता पत्र तैयार कर रामपुर में गेहूं खरीद का अधिकार हासिल कर लिया।
विज्ञापन
इस प्रक्रिया के बाद जब गेहूं की गुणवत्ता और आपूर्ति में गड़बड़ी मिली तो संभागीय खाद्य नियंत्रक (आरएफसी) मुरादाबाद ने नोटिस जारी किया। हालांकि, यह नोटिस चुनी हुई अध्यक्ष या संस्था के अधिकृत प्रतिनिधियों को देने के बजाय फर्जी तरीके से काम कर रहे व्यक्तियों को भेजा गया। 5 अक्तूबर, 2019 को संस्था को अनिश्चितकाल के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इसे याची संस्था ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
विज्ञापन
इसके अलावा कृषि उत्पादन मंडी समिति, रामपुर की ओर से संस्था से 4,08,191 रुपये के मंडी शुल्क और विकास उपकर की मांग का नोटिस भी जारी कर दिया गया।
नागरिक मृत्यु के समान होती है ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का हवाला दिया। कहा कि ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई व्यक्ति या संस्था के लिए ‘नागरिक मृत्यु’ के समान होती है। ऐसी कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाना आवश्यक है। साथ ही ब्लैकलिस्टिंग की अवधि निश्चित होनी चाहिए। अदालत ने यह भी माना कि गेहूं खरीद की वास्तविक प्रक्रिया संस्था की ओर से नहीं, बल्कि फर्जीवाड़ा करने वाले निजी व्यक्तियों ने की थी। इसलिए संस्था पर मंडी शुल्क और विकास शुल्क की देनदारी नहीं डाली जा सकती।
विज्ञापन