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टीजीटी, प्रवक्ता भर्ती एक बार फिर विवादों में
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
Updated Wed, 04 Jan 2017 12:22 AM IST
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माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की भर्ती एक बार फिर विवादों में है। अध्यक्ष से मिलने पहुंचे प्रतियोगियों ने आरोप लगाया कि साक्षात्कार में शामिल होने वाले अभ्यर्थयों को कोड तथा सीरियल नंबर बता दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं कई अभ्यर्थियों के फर्जी खेल प्रमाण पत्र भी बनवाए जा रहे हैं। इन आरोपों के साथ प्रतियोगियों ने तीन सदस्यों के काम पर रोक लगाने की भी मांग का ज्ञापन भी अध्यक्ष को सौंपा।
अध्यक्ष से मिलने पहुंचे प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय, प्रशांत कुमार और दिनेश तिवारी का कहना था कि कोड सार्वजनिक करने से साफ है कि इंटरव्यू में धांधली हो रही है। उन्होंने चहेतों को अधिक नंबर देने का आरोप लगाया। प्रतियोगियों ने तीन सदस्यों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका यह भी कहना था कि एक सदस्य हाईस्कूल के अध्यापक हैं। ऐसे लोगों को सदस्य बनाकर प्राचार्य और प्रवक्ता भर्ती का इंटरव्यू लेना योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है।
वार्ता के बाद प्रतियोगियों का कहना था कि अध्यक्ष ने साक्षात्कार में गड़बड़ी की शिकायतों की जांच कराने का आश्वासन दिया लेकिन सदस्यों के काम करने पर रोक लगाने से मना कर दिया। उनका कहना था कि इस पूरे प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी। इसके अलावा राज्यपाल से भी शिकायत की जाएगी। उनका कहना था कि वे पूर्व में राष्ट्रपति से भी इसकी शिकायत कर चुके हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से मुख्य सचिव को उचित कार्रवाई का निर्देश भी दिया गया है लेकिन शासन मौन है।
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अध्यक्ष से मिलने पहुंचे प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय, प्रशांत कुमार और दिनेश तिवारी का कहना था कि कोड सार्वजनिक करने से साफ है कि इंटरव्यू में धांधली हो रही है। उन्होंने चहेतों को अधिक नंबर देने का आरोप लगाया। प्रतियोगियों ने तीन सदस्यों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका यह भी कहना था कि एक सदस्य हाईस्कूल के अध्यापक हैं। ऐसे लोगों को सदस्य बनाकर प्राचार्य और प्रवक्ता भर्ती का इंटरव्यू लेना योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय है।
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वार्ता के बाद प्रतियोगियों का कहना था कि अध्यक्ष ने साक्षात्कार में गड़बड़ी की शिकायतों की जांच कराने का आश्वासन दिया लेकिन सदस्यों के काम करने पर रोक लगाने से मना कर दिया। उनका कहना था कि इस पूरे प्रकरण को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जाएगी। इसके अलावा राज्यपाल से भी शिकायत की जाएगी। उनका कहना था कि वे पूर्व में राष्ट्रपति से भी इसकी शिकायत कर चुके हैं। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से मुख्य सचिव को उचित कार्रवाई का निर्देश भी दिया गया है लेकिन शासन मौन है।
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