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तहसीलदार नहीं बदल सकता भूमि की प्रकृति, बंजर भूमि को नवीन पर्ती कर सड़क भूमि घोषित करने का आदेश रद्द
Fri, 13 Nov 2020 06:41 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 13 Nov 2020 06:41 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि तहसीलदार को किसी भूमि की प्रकृति बदलने का अधिकार नहीं है। बंजर भूमि को नवीन पर्ती कर सड़क भूमि दर्ज करना तहसीलदार के क्षेत्राधिकार में नहीं आता है। कोर्ट ने तहसीलदार मछलीशहर जौनपुर के 23 फरवरी 20 को पारित आदेश को रद्द कर दिया है। और कहा है कि राज्य सरकार को किसी भी भूमि को लेने का अधिकार है। बंजर भूमि गाव सभा की होने के नाते सरकार कीहै।कोर्ट ने कहा कि यदि सड़क बनाना जरूरी हो तो सरकार जमीन लेकर सड़क बना सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र ने विश्वनाथ बाबुल सिंह की याचिका पर दिया है।
याची का कहना था कि जौनपुर की मछलीशहर तहसील के नीभापुर गांव के प्लाट 473 व 474 को तहसीलदार ने नवीन पर्ती दर्ज कर सड़क बनाने का आदेश दिया है। जिसके खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में सवाल उठाया गया कि तहसीलदार को किसी जमीन की प्रकृति बदलने का अधिकार नहीं है। जिसे कोर्ट ने सही माना।
सरकार की तरफ से कहा गया कि तहसीलदार धारा 25 में रास्ते का विवाद तय कर सकता है।इसलिए ऐसा किया।कोर्ट ने इसे नहीं माना और कहा कि रास्ते के विवाद को तय करने के अधिकार के तहत जमीन की प्रकृति नहीं बदली जा सकती।
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याची का कहना था कि जौनपुर की मछलीशहर तहसील के नीभापुर गांव के प्लाट 473 व 474 को तहसीलदार ने नवीन पर्ती दर्ज कर सड़क बनाने का आदेश दिया है। जिसके खिलाफ यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में सवाल उठाया गया कि तहसीलदार को किसी जमीन की प्रकृति बदलने का अधिकार नहीं है। जिसे कोर्ट ने सही माना।
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सरकार की तरफ से कहा गया कि तहसीलदार धारा 25 में रास्ते का विवाद तय कर सकता है।इसलिए ऐसा किया।कोर्ट ने इसे नहीं माना और कहा कि रास्ते के विवाद को तय करने के अधिकार के तहत जमीन की प्रकृति नहीं बदली जा सकती।
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