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छात्र हित में उठाया यह कदम : जाबिर
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
Updated Fri, 10 Feb 2017 01:46 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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कुलपति कार्यालय पर आत्मदाह करने वाले छात्र जाबिर का कहना है कि उसने छात्र हित में यह कदम उठाया है। छात्रों के लिए वह आगे भी संघर्ष करता रहेगा। जाबिर 2015 छात्रसंघ चुनाव में सांस्कृतिक सचिव पद के लिए चुनाव लड़ चुका है। छात्रों के आंदोलन में वह काफी सक्रिय रहता है। इसी क्रम में फोरम फॉर कैंपस डेमोक्रेसी की ओर से आयोजित सभा में भी वह शामिल रहा। हालांकि फोरम से उसका सीधा कोई जुड़ाव नहीं है।
बृहस्पतिवार दोपहर आंदोलन के बीच में वह बेली गांव स्थित घर चला गया। जाबिर की मां ने बताया कि घर पर वह सामान्य था लेकिन तकरीबन चार बजे वह कुलपति दफ्तर पर जारी आंदोलन में फिर शामिल होेने चला गया। उसे पता चला कि छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ है तो वह नाराज हो गया। फिर उसने पेट्रोल लाकर आत्मदाह जैसा घातक कदम उठा लिया। फोरम के छात्र भी जाबिर के इस कदम से हतप्रभ रह गए। आंदोलन की अगुवाई करने वाले छात्र नेताओं को भी इसका अंदेशा नहीं था कि जाबिर आत्मदाह कर लेगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की सभी मांगे मान ली है। छात्रों का कहना है कि इस पर अंतिम फैसला कुलपति के लौटने पर सोमवार को लिया जाएगा। छात्रों के अनुसार बंधक बने रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ला ने छात्रसंघ अध्यक्ष कक्ष में वार्ता के दौरान आश्वासन दिया कि प्रवेश समिति भंग करने पर फैसला कुलपति के आने के बाद लिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि लाइब्रेरी से स्नातक के विद्यार्थियों को भी किताबें निर्गत की जाएंगी। प्रवेश परीक्षा में ऑफलाइन का विकल्प भी दिया जाएगा। उन्हाेंने रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी के पद पर जल्द स्थाई नियुक्ति का भी आश्वासन दिया। हालांकि विश्वविद्यालय के अफसर अभी इस पर अधिकृत बयान से बच रहे हैं।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर रामसेवक दुबे ने आंदोलनरत छात्रों की सभी मांगों को जायज ठहराया है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की है कि उनकी सभी मांगे बिना शर्त मानी जाए। उन्होंने जाबिर के आत्मदाह तथा छात्रों पर लाठीचार्ज की घटना पर दुख प्रकट किया।
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बृहस्पतिवार दोपहर आंदोलन के बीच में वह बेली गांव स्थित घर चला गया। जाबिर की मां ने बताया कि घर पर वह सामान्य था लेकिन तकरीबन चार बजे वह कुलपति दफ्तर पर जारी आंदोलन में फिर शामिल होेने चला गया। उसे पता चला कि छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ है तो वह नाराज हो गया। फिर उसने पेट्रोल लाकर आत्मदाह जैसा घातक कदम उठा लिया। फोरम के छात्र भी जाबिर के इस कदम से हतप्रभ रह गए। आंदोलन की अगुवाई करने वाले छात्र नेताओं को भी इसका अंदेशा नहीं था कि जाबिर आत्मदाह कर लेगा।
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की सभी मांगे मान ली है। छात्रों का कहना है कि इस पर अंतिम फैसला कुलपति के लौटने पर सोमवार को लिया जाएगा। छात्रों के अनुसार बंधक बने रजिस्ट्रार प्रोफेसर एनके शुक्ला ने छात्रसंघ अध्यक्ष कक्ष में वार्ता के दौरान आश्वासन दिया कि प्रवेश समिति भंग करने पर फैसला कुलपति के आने के बाद लिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि लाइब्रेरी से स्नातक के विद्यार्थियों को भी किताबें निर्गत की जाएंगी। प्रवेश परीक्षा में ऑफलाइन का विकल्प भी दिया जाएगा। उन्हाेंने रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी के पद पर जल्द स्थाई नियुक्ति का भी आश्वासन दिया। हालांकि विश्वविद्यालय के अफसर अभी इस पर अधिकृत बयान से बच रहे हैं।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय अध्यापक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर रामसेवक दुबे ने आंदोलनरत छात्रों की सभी मांगों को जायज ठहराया है। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से अपील की है कि उनकी सभी मांगे बिना शर्त मानी जाए। उन्होंने जाबिर के आत्मदाह तथा छात्रों पर लाठीचार्ज की घटना पर दुख प्रकट किया।