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High Court : मृतक आश्रित कोटे से भर्ती दरोगा-इंस्पेक्टर को मिलेगा ट्रेनिंग पीरियड का पूरा वेतन
Sat, 29 Nov 2025 01:39 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 29 Nov 2025 01:39 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे से भर्ती 2010-11 बैच के दरोगा व इंस्पेक्टर को बड़ी राहत दी है। कहा है कि इन्हें ट्रेनिंग अवधि का पूरा वेतन व पदोन्नति में ट्रेनिंग पीरियड जोड़ने और सातवें वेतनमान के सभी लाभ एरियर सहित दिए जाएं।
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अदालत का आदेश
- फोटो : istock
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे से भर्ती 2010-11 बैच के दरोगा व इंस्पेक्टर को बड़ी राहत दी है। कहा है कि इन्हें ट्रेनिंग अवधि का पूरा वेतन व पदोन्नति में ट्रेनिंग पीरियड जोड़ने और सातवें वेतनमान के सभी लाभ एरियर सहित दिए जाएं। अपर पुलिस महानिदेशक,कार्मिक एवं स्थापना, डीजीपी मुख्यालय लखनऊ इस पर दो माह में आवश्यक निर्णय लें। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने इंस्पेक्टर रामचंद्र दूबे सहित 61 पुलिस कर्मियों की याचिका पर दिया।
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प्रयागराज जोन, नोएडा एनसीआर, गाजियाबाद, मेरठ जोन, आगरा जोन, गोरखपुर जोन, कानपुर जोन, बरेली जोन एवं वाराणसी जोन के विभिन्न जनपदों में तैनात 2010-11 बैच के अनुकंपा पर नियुक्त पुलिस सब इंस्पेक्टर, इंस्पेक्टर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनकी मांग थी कि मृतक आश्रित कोटे से चयनित अधिकारियों को ट्रेनिंग अवधि में केवल स्टाइपेंड दिया गया। जबकि, समान बैच के अन्य दरोगा-इंस्पेक्टर को उसी ट्रेनिंग अवधि का पूरा वेतन और भत्ते दिए गए। साथ ही उस अवधि को उनकी सेवा में जोड़कर वेतन वृद्धि और प्रमोशन लाभ भी प्रदान किए गए।
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याचियों के अधिवक्ता वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम ने कोर्ट में दलील दी कि हाईकोर्ट ने आलोक कुमार सिंह बनाम राज्य मामले में आदेश दिया है कि सीधी भर्ती और मृतक आश्रित भर्ती दोनों को ट्रेनिंग अवधि में वेतन मिलना चाहिए। राज्य सरकार की ओर से इस आदेश के खिलाफ दायर एसएलपी सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज का चुका है।
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अधिवक्ता ने दलील दी कि शासन ने 29 मार्च 2022 को आदेश जारी कर याचियों के समकक्ष अधिकारियों को ट्रेनिंग अवधि का वेतन देने की अनुमति दे दी और उन्हें लाभ भी दे दिया गया। वहीं, याचियों को अब तक लाभ नहीं दिया गया, जो भेदभावपूर्ण और अवैध है। हाईकोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए एडीजी कार्मिक को निर्देश दिया कि दो माह के भीतर कानून के अनुरूप निर्णय लेकर याचियों को लाभ दिया जाए।