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UPPSC : परीक्षा एक दिन में कराने और नॉर्मलाइजेशन निरस्त करने का नोटिस लेकर ही उठेंगे छात्र, बनाई रणनीति

Sun, 10 Nov 2024 12:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 10 Nov 2024 12:17 PM IST
सार

अभ्यर्थियों का कहना है कि पहले की भांति एक ही दिन में परीक्षा कराए और नॉर्मलाइेजशन निरस्त करने का आयोग से नोटिस लेकर ही हटेंगे। धरना सुबह 11 बजे से शुरू होगा। प्रतियोगी छात्र राजन त्रिपाठी, युगल पांडेय, प्रियांशु श्रीवास्तव, नितिन प्रताप और आशीष सुमन ने शनिवार को प्रेस क्लब में कहा, भर्ती प्रक्रिया के बीच आयोग की ओर से किया गया बदलाव किसी भी अभ्यर्थी को मंजूर नहीं है।

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Students will wake up only after receiving the notice of holding the exam in one day and canceling the normali
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) - फोटो : Amar Ujala Graphics

विस्तार

पीसीएस और आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा दो दिन कराने और नॉर्मलाइजेशन (मानकीकरण) के विरोध में अभ्यर्थी सोमवार से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सामने धरने पर बैठेंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि पहले की भांति एक ही दिन में परीक्षा कराए और नॉर्मलाइेजशन निरस्त करने का आयोग से नोटिस लेकर ही हटेंगे। धरना सुबह 11 बजे से शुरू होगा। प्रतियोगी छात्र राजन त्रिपाठी, युगल पांडेय, प्रियांशु श्रीवास्तव, नितिन प्रताप और आशीष सुमन ने शनिवार को प्रेस क्लब में कहा, भर्ती प्रक्रिया के बीच आयोग की ओर से किया गया बदलाव किसी भी अभ्यर्थी को मंजूर नहीं है।

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यह बदलाव उन गरीब छात्रों के साथ धोखा है, जिनके मां-बाप के सपने और बहन की विदाई, इस परीक्षा में अभ्यर्थी की सफलता और असफलता पर निर्भर करती है। धरने में उत्तर प्रदेश के साथ दिल्ली, उत्तरांखड, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के करीब आठ हजार अभ्यर्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस मसले पर आठ नवंबर को दिल्ली में कैंडल मार्च निकाला गया। अभ्यर्थियों ने कहा कि दो दिन परीक्षा कराने और नॉर्मलाइेजशन के खिलाफ 15 अक्तूबर को आयोग में ज्ञापन दिया गया था, लेकिन जवाब नहीं मिला।

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21 अक्तूबर को आयोग को घेराव किया तो सचिव ने अभ्यर्थियों के बीच आकर कहा कि तीन दिन में स्थिति से अवगत करा दिया जाएगा, लेकिन जवाब नहीं आया। एक दिन अचानक दो दिन परीक्षा कराने और नॉर्मलाइजेशन का नोटिस जारी कर दिया गया। ऐसे में अभ्यर्थी धरना देने को मजबूर हैं।

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अभ्यर्थियों ने गिनाए मानकीकरण के नुकसान

  • आयोग ने सिर्फ पर्सेंटाइल स्कोर का फॉर्मूला सार्वजनिक किया है। मानकीकरण कैसे होगा, यह स्पष्ट नहीं किया है।
  • एक परीक्षा के लिए सामान्य अध्ययन के दो अलग-अलग पेपर होंगे। यह कैसे तय होगा कि सामान्य अध्ययन का कोई भी सवाल किसके लिए कठिन और किसके लिए आसान है।नॉर्मलाइजेशन के फॉर्मूले के अनुसार, जिस शिफ्ट में उपस्थित अभ्यर्थियों की संख्या कम होगी, वहां पर्सेंटाइल स्कोर उच्च होगा। ऐसे में नाॅर्मलाइजेशन के किस फार्मूले के तहत एक समान मूल्यांकन संभव है।
  • आयोग ने जनसूचना अधिकार के तहत एक सवाल के जवाब में बताया था कि पीसीएस-2019 और 2020 की प्रारंभिक परीक्षा में 38 सवाल गलत होने पर बदले गए थे। भविष्य अलग-अलग शिफ्ट में होने वाली परीक्षाओं में गलत सवाल पूछे गए तो मानकीकरण कैसे होगा।
  • प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों के लिए यह आकलन कर पाना मुश्किल हो कि मुख्य परीक्षा के लिए सफल होंगे या नहीं।

न्यायालय होगा आखिरी विकल्प

अभ्यर्थियों ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश में स्पष्ट कहा है कि भर्ती के बीच में नियम नहीं बदले जा सके। अभ्यर्थी पहले आयोग के अध्यक्ष और सचिव के समक्ष अपनी बात रखेंगे। वहां सुनवाई नहीं हुई तो अभ्यर्थी गार्जियन के रूप में सीधे मुख्यमंत्री को समस्या बताएंगे। कहीं सुनवाई नहीं हुई तो आखिरी विकल्प न्यायालय होगा।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर 10 हजार का ग्रुप

लंबे समय बाद अभ्यर्थियों का ऐसा आंदोलन हो रहा है, जिसका कोई नेतृत्वकर्ता नहीं है। इसमें हर अभ्यर्थी व्यक्तिगत रूप से शामिल है। आंदोलन के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलिग्राम में 10 हजार अभ्यर्थियों का ग्रुप बना है। यहअभ्यर्थी 11 नवंबर को प्रस्तावित धरने में शामिल होने के लिए तैयार हैं।

परीक्षा के लिए मिली सिर्फ तारीख पर तारीख  

अभ्यर्थियों का कहना है कि पीसीएस परीक्षा के लिए उन्हें सिर्फ तारीख पर तारीख मिली है। पहले 17 मार्च, 2024 को परीक्षा होनी थी, लेकिन आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा में पेपर लीक के बाद यह परीक्षा जून, फिर अक्तूबर और अब दिसंबर में प्रस्तावित की गई है।

भर्ती नहीं, छलावा करती है भाजपा : अखिलेश यादव

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अभ्यर्थियों को समर्थन देते हुए प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा भर्ती नहीं, छलावा करती है और जब एक छल पकड़ा जाता है तो भाजपाई दूसरा धोखा ले आते हैं। वहीं, कांग्रेस ने भी अभ्यर्थियों को समर्थन दिया है।

अखिलेश यादव ने लिखा कि अभ्यर्थी अब भाजपा की साजिश को भांप गए हैं, इसीलिए उसके खिलाफ आंदोलनरत हैं। हम उनकी आवाज में अपनी आवाज मिलाते हैं और अभ्यर्थियों की जायज मांग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। दरअसल, यह भाजपा की चाल है कि युवाओं को सरकारी नौकरी न मिले और वो बेरोजगार ही रहें, एक दिन सस्ते में मजदूरों की तरह काम करने पर मजबूर हो जाएं।

अब पढ़ा-लिखा लेकिन बेरोजगार युवा भाजपा का यह चुनावी दुष्चक्र समझ गया है और भाजपा की मंशा भी, इसीलिए वो अब चुनाव में भाजपा को हराने के लिए मुट्ठी बांध कर संकल्प ले रहा है। भाजपा का भविष्य और युवाओं का भविष्य दो विरोधाभासी बातें हैं।

दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्र आदेश शर्मा को कांग्रेस प्रदेश कार्यालय ने समर्थन पत्र सौंप कर कहा है कि इस मुद्दे पर जल्द ही राष्ट्रीय नेतृत्व से छात्रों की मुलाकात कराने का प्रयास किया जा रहा है।

कांग्रेस आंदोलन में छात्रों के साथ कदम से कदम मिलाकर लड़ाई के लिए तैयार है। प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा है कि आयोग को अभ्यर्थियों की मांग मान लेनी चाहिए।

बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने किया समर्थन

छात्रों के आंदोलन को बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश और जिला अधिवक्ता संघ ने भी समर्थन दिया है। बार कौंसिल के उपाध्यक्ष अनुराग पांडेय और जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद मिश्र ‘रज्जू’ की ओर से अलग-अलग जारी समर्थन पत्र में कहा गया है कि 11 नवंबर को आयोग पर प्रस्तावित छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हैं।

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