{"_id":"6a47a603a121fee588016220","slug":"stepfather-s-life-sentence-for-the-murder-of-a-two-year-old-child-upheld-mother-s-testimony-deemed-credible-2026-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"High Court : दो साल के मासूम की हत्या में सौतेले पिता की उम्रकैद बरकरार, मां की गवाही माना विश्ववसनीय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court : दो साल के मासूम की हत्या में सौतेले पिता की उम्रकैद बरकरार, मां की गवाही माना विश्ववसनीय
Fri, 03 Jul 2026 05:37 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 03 Jul 2026 05:37 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो साल के मासूम की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए सौतेले पिता की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि मृतक की मां की चश्मदीद गवाही पूरी तरह विश्वसनीय है और उसे अविश्वास करने का कोई आधार नहीं है।
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो साल के मासूम की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए सौतेले पिता की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने कहा कि मृतक की मां की चश्मदीद गवाही पूरी तरह विश्वसनीय है और उसे अविश्वास करने का कोई आधार नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने प्रदीप उर्फ अमन चौरसिया की याचिका पर दिया।
विज्ञापन
मामला गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार दो साल के बच्चे की गला दबाकर हत्या कर दी गई थी। बच्चे की मां ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि उसका दूसरा पति प्रदीप, उसके पहले पति से जन्मे बच्चे से नफरत करता था। घटना के दिन प्रदीप को उसकी पिटाई करते देखा। इसके बाद आरोपी मौके से फरार हो गया और कुछ देर बाद बच्चे की मौत हो गई।
विज्ञापन
ट्रायल कोर्ट ने को प्रदीप को हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि एफआईआर दर्ज करने में देरी, गवाहों के मुकर जाने और तहरीर पुलिस के कहने पर लिखे जाने जैसी दलीलें पेश कीं। कोर्ट ने कहा कि कोई मां अपने बेटे के वास्तविक हत्यारे को बचाकर अपने पति को झूठे मामले में नहीं फंसा सकती। विशेषकर तब जब उसने उसी व्यक्ति के लिए अपना पहला पति छोड़ दिया हो। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के निर्णय में कोई कानूनी या तथ्यात्मक त्रुटि न पाते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी।
विज्ञापन