राज्य विश्वविद्यालय: प्रथम वर्ष में सभी, द्वितीय वर्ष में बीकॉम के छात्र होंगे प्रोन्नत
बीए, बीएसी द्वितीय वर्ष और स्नातक तृतीय वर्ष की आयोजित होगी परीक्षा
राज्य विवि की परीक्षा समिति ने लिया निर्णय, सेमेस्टर के छात्रों को भी प्रमोशन
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प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय में स्नातक द्वितीय वर्ष में सिर्फ बीकॉम के छात्रों को तृतीय वर्ष में प्रोन्नत किया जाएगा, जबकि बीए, बीएससी के छात्रों को परीक्षा देनी होगी। स्नातक तृतीय वर्ष में सभी पाठ्यकमों की परीक्षा होगी, जबकि प्रथम वर्ष के सभी छात्र प्रमोट किए जाएंगे। यह निर्णय मंगलवार को राज्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई परीक्षा समिति की बैठक में लिया गया।
स्नातक द्वितीय वर्ष में केवल बीकॉम के छात्रों को प्रमोट किया जाएगा, क्योंकि उन्होंने पिछली बार प्रथम वर्ष की परीक्षा दी थी और उस परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर उनके द्वितीय वर्ष के अंकों का निर्धारण किया जाएगा। बीए, बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्रों को पिछले वर्ष प्रमोट किया गया था और उन्होंने प्रथम वर्ष की परीक्षा नहीं दी थी, सो इस बार उनकी परीक्षा होगी। वहीं, स्नातक तृतीय वर्ष में सभी पाठ्यक्रमों की परीक्षा होगी। स्नातक प्रथम वर्ष के सभी छात्रों को प्रमोट किया जाएगा और द्वितीय वर्ष में मिले अंकों के आधार पर उनके प्रथम वर्ष के अंक निर्धारित किए जाएंगे।
सेमेस्टर प्रणाली के तहत स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं कराई जाएंगी। विश्वविद्यालय में विषम सेमेस्टर सत्र 2020-21 की लिखित परीक्षाएं, जो 26 मार्च, 2021 तक संपन्न कराई ञा चुकी हैं, उनमें मूल्यांकन के बाद प्राप्त अंकों के आधार पर अवशेष प्रायोगिक परीक्षा के अंकों का निर्धारण होगा। स्नातक द्वितीय एवं चतुर्थ और स्नातकोत्तर द्वितीय सेमेस्टर के छात्रों को उनके प्रथम/तृतीय सेमेस्टर के आधार पर अंक निर्धारित कर प्रोन्नत किया जाएगा। सम सेमेस्टर के अन्य पाठ्यक्रमों के संबंध में भी उनके पूर्व के विषम सेमेस्टर के प्राप्तांकों का संज्ञान लेते हुए परीक्षाफल तैयार किया जाएगा।
परीक्षा प्रणाली का हुआ सरलीकरण
स्नातक की परीक्षा प्रणाली का भी सरलीकरण किया गया है। स्नातक वार्षिक पद्धति के पुराने पाठ्यक्रम एवं नए पाठ्यक्रम के छात्रों के लिए समान प्रश्न पत्र होगा। पर्यावरण प्रश्न पत्र की परीक्षा पूर्व की भांति ही होगी। परीक्षा की समयावधि तीन के बजाय डेढ़ घंटे की होगी। एक विषय के सभी प्रश्न पत्रों को न्यूनतम दो एवं अधिकतम तीन प्रश्न पत्र की सीमा तक सम्मिलित करते हुए एक ही प्रश्न पत्र तैयार कराया जाएगा। जो लघु उत्तरीय प्रश्न पत्र होगा।
उदाहरण के तौर पर किसी विषय में पूर्व प्रचलन के अनुसार तीन प्रश्न पत्र हैं तो उस विषय में एक ही प्रश्न पत्र को खड-अ, खड-ब और खड-स में विभाजित करते हुए तीनों प्रश्न पत्रों का समावेश होगा। प्रत्येक खंड के चार-चार प्रश्न होंगे और हर खंड से किन्हीं दो प्रश्नों यानी कुल छह प्रश्नों का लघु उत्तरीय उत्तर देना होगा। अधिकतम 250 शब्दों में जवाब देना होगा और प्रश्न पत्र की समयावधि डेढ़ घंटे की होगी। अगर किसी विषय में दो खंडों ‘अ’ एवं ‘ब ’ का समावेश होगा तो प्रत्येक खंड से तीन-तीन प्रश्नों का उत्तर देना होगा।
नहीं होंगी प्रायोगिक परीक्षाएं
प्रायोगिकी परीक्षाएं आयोजित नहीं की जाएंगी। उनके अंकों का निर्धारण लिखित परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर होगा। मौखिक परीक्षाएं आवश्यकतानुसार ऑनलाइन होंगी। साथ ही जिन प्रश्न-पत्रों में पूर्णतया प्रायोगिक परीक्षा होगी, उनमें 60 फीसदी अंक लिखित परीक्षा और 40 फीसी अंक आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर निर्धारित किए जाएंगे। आंतरिक मूल्यांकन का अंक किसी भी दशा में 80 फीसदी से अधिक नहीं होगा।
स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष की भी डेढ़ घंटे की परीक्षा
स्नातकोत्तर उत्तरार्ध (अंतिम वर्ष) की परीक्षाएं भी आयोजित की जाएंगी, जो अपने पुराने प्रश्न पत्र के पैटर्न के ही अनुसार होंगी, लेकिन परीक्षा की समयावधि तीन के बजाय डेढ़ घंटे की होगी। प्रत्येक खंड में पुराने पद्धति के अनुसार दिए जाने वाले उत्तरों की संख्या आधी हो जाएगी। यानी प्रथम खंड में आठ के बजाय चार प्रश्नों, द्वितीय खंड में दो के बजाय एक प्रश्न और तृतीय खंड से दो के बजाय एक ही प्रश्न का उत्तर देना होगा।
जुलाई-अगस्त होगी कराई जाएगी परीक्षा
वार्षिक एवं सम सेमेस्टर की परीक्षाएंम्जुलाई-अगस्त में कराई जाएंगी। सत्र 2020-21 के वे छात्र जो बैक पेपर की परीक्षा में बैठने के लिए अर्ह हैं और जिन्होंने विश्वविद्यालय के पोर्टल पर बैक पेपर फार्म भर लिए हैं उन्हें परीक्षा में शामिल होने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्हेंसमस्त उत्तीर्ण लिखित प्रश्न पत्रों के अंक एवं संदर्भित बैक प्रश्न पत्रों को सम्मिलित करते हुए उनका औसत निकालते हुए उस बैक प्रश्न पत्र का प्राप्तांक प्रदान किया जाएगा। अगर इस तरह प्रदान किए गग प्राप्तांक के आधार पर कोई छात्र-छात्रा उस प्रश्न पत्र में अनुत्तीर्ण हो रहा तो उसे संबंधित प्रश्न पत्र के अनुसार न्यूनतम उत्तीर्णांक प्रदान करते हुए परीक्षाफल पूर्ण किया जाएगा। परीक्षा के दौरान कोई परीक्षार्थी कोविड-19 से संक्रमित पाया जाता है तो उसे परीक्षा केंद्र पर अन्य कमरे में बैठाकर परीक्षा दिलाई जाएगी।