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राज्य की खींचतान में अटकी ‘नमामि गंगे’ योजना
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 20 Jun 2016 01:54 AM IST
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गंगा
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हरिद्वार की तर्ज पर संगमनगरी में गंगा किनारे घाट बनाए जाने और पहले से बने घाटों के विस्तार का प्रस्ताव केंद्र और राज्य सरकार की खींचतान में फंस गया है। मामले में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश के मुख्य अभियंता (गंगा) सुधीर कुमार शर्मा ने केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प विभाग को पत्र जारी कर परिस्थितियों से अवगत कराया है। इस बाबत प्रदेश के मुख्य सचिव को भी पत्र भेजा गया है। पत्र के जरिये नामामि गंगे योजना के तहत गंगा घाटों के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार के विभागों से समय से एनओसी न मिलने के कारण प्रोजेक्ट लागू करने में हो रही देरी पर चिंता जताई गई है।
पत्र की प्रति सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव के साथ उन सभी जिलों के डीएम को भी जारी की गई है, जहां नमामि गंगे योजना के तहत काम होना है। इनमें इलाहाबाद समेत अमरोहा, बिजनौर, हापुड़, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, मथुरा, वाराणसी और कानपुर जिले शामिल हैं। नमामि गंगे योजना के तहत घाटों के विकास और विस्तार का काम शुरू करने के लिए 20 जून की तिथि प्रस्तावित है लेकिन चीफ इंजीनियर (गंगा) के कार्यालय को अब तक सिर्फ ब्रिजघाट-मुक्तेश्वर और अनूपशहर, मेरठ से ही प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्राप्त हुई है।
चीफ इंजीनियर (गंगा) की ओर से जारी पत्र में इन प्रोजेक्ट्स के डीपीआर में भी कई खामियां बताई गई हैं। यह भी नहीं बताया गया है कि घाट के लिए जमीन पर किसका स्वामित्व होगा या जमीन किसके नाम ट्रांसफर होगी। इन तमाम तथ्यों के साथ प्रदेश सरकार से आग्रह किया गया है कि ‘नमामि गंगे’ योजना के सफलता के लिए उन विभागों की ओर से मानक के अनुरूप अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी जारी किया जाना चाहिए, जिन्हें इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बाद ही योजना को गति मिल सकेगी।
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पत्र की प्रति सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव के साथ उन सभी जिलों के डीएम को भी जारी की गई है, जहां नमामि गंगे योजना के तहत काम होना है। इनमें इलाहाबाद समेत अमरोहा, बिजनौर, हापुड़, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलंदशहर, मथुरा, वाराणसी और कानपुर जिले शामिल हैं। नमामि गंगे योजना के तहत घाटों के विकास और विस्तार का काम शुरू करने के लिए 20 जून की तिथि प्रस्तावित है लेकिन चीफ इंजीनियर (गंगा) के कार्यालय को अब तक सिर्फ ब्रिजघाट-मुक्तेश्वर और अनूपशहर, मेरठ से ही प्रोजेक्ट रिपोर्ट प्राप्त हुई है।
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चीफ इंजीनियर (गंगा) की ओर से जारी पत्र में इन प्रोजेक्ट्स के डीपीआर में भी कई खामियां बताई गई हैं। यह भी नहीं बताया गया है कि घाट के लिए जमीन पर किसका स्वामित्व होगा या जमीन किसके नाम ट्रांसफर होगी। इन तमाम तथ्यों के साथ प्रदेश सरकार से आग्रह किया गया है कि ‘नमामि गंगे’ योजना के सफलता के लिए उन विभागों की ओर से मानक के अनुरूप अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी जारी किया जाना चाहिए, जिन्हें इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके बाद ही योजना को गति मिल सकेगी।
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