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दुष्कर्म पीड़िता का मुकदमा दर्ज न करने पर एसएसपी तलब
Sat, 17 Oct 2020 04:46 PM IST
इलाहाबाद ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 17 Oct 2020 04:46 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
प्रयागराज। प्रयागराज पुलिस द्वारा दुष्कर्म पीड़िता की शिकायत तीन माह तक दर्ज न करने की घटना को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए एसएसपी और एसओ फूलपुर को तलब कर लिया है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की फरियाद न सुनना आपराधिक न्याय व्यवस्था के प्रति गंभीर लापरवाही है। इस मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पीड़िता की प्राथमिकी दर्ज की गई और मेडिकल जांच की गई।
अदालत ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय करने के लिए एसएसपी व थाना प्रभारी फूलपुर को 20 अक्तूबर को तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि गंभीर अपराधों में कार्रवाई के मामले में उम्मीद के विपरीत पुलिस विफल हो रही है। दुष्कर्म जैसे अपराध में तीन माह बाद एफआईआर दर्ज करना जांच की खानापूर्ति मात्र है। इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने दुष्कर्म पीड़िता की याचिका पर दिया है ।
पीड़िता फूलपुर थाने पर 11 जुलाई 20 को शिकायत लेकर गई थी। पुलिस ने उसकी शिकायत सुने बिना भगा दिया। 22 जुलाई को एसएसपी प्रयागराज से शिकायत की गई। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। 30 जुलाई तक रेप की एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो उसने हाईकोर्ट की शरण ली। याचिका की सुनवाई 12 अक्तूबर को हुई । कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता बीपी सिंह कछवाहा से जानकारी लेने को कहा।
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14 अक्तूबर को कोर्ट को बताया गया कि एसएसपी ने 23 जुलाई की पीड़िता की अर्जी फूलपुर थाना भेज दी थी। 13 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज की गई है। पीड़िता का बयान व मेडिको लीगल जांच की गई है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की एफआईआर दर्ज करने में तीन माह लग गए। देरी का कारण नहीं बताया गया है। गंभीर अपराध की एफआईआर तब दर्ज की गई जब कोर्ट ने जानकारी मांगी।
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अदालत ने इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय करने के लिए एसएसपी व थाना प्रभारी फूलपुर को 20 अक्तूबर को तलब किया है। कोर्ट ने कहा है कि गंभीर अपराधों में कार्रवाई के मामले में उम्मीद के विपरीत पुलिस विफल हो रही है। दुष्कर्म जैसे अपराध में तीन माह बाद एफआईआर दर्ज करना जांच की खानापूर्ति मात्र है। इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता तथा न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की खंडपीठ ने दुष्कर्म पीड़िता की याचिका पर दिया है ।
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पीड़िता फूलपुर थाने पर 11 जुलाई 20 को शिकायत लेकर गई थी। पुलिस ने उसकी शिकायत सुने बिना भगा दिया। 22 जुलाई को एसएसपी प्रयागराज से शिकायत की गई। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। 30 जुलाई तक रेप की एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो उसने हाईकोर्ट की शरण ली। याचिका की सुनवाई 12 अक्तूबर को हुई । कोर्ट ने सरकारी अधिवक्ता बीपी सिंह कछवाहा से जानकारी लेने को कहा।
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14 अक्तूबर को कोर्ट को बताया गया कि एसएसपी ने 23 जुलाई की पीड़िता की अर्जी फूलपुर थाना भेज दी थी। 13 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज की गई है। पीड़िता का बयान व मेडिको लीगल जांच की गई है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की एफआईआर दर्ज करने में तीन माह लग गए। देरी का कारण नहीं बताया गया है। गंभीर अपराध की एफआईआर तब दर्ज की गई जब कोर्ट ने जानकारी मांगी।