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एसआरएन प्रकरण : वकील व डॉक्टर एक दूसरे के खिलाफ अड़े, मरीज दर-दर भटके

Thu, 21 May 2026 08:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 21 May 2026 08:29 PM IST
सार

एसआरएन अस्पताल में डॉक्टरों व वकीलों में मारपीट का मामला दूसरे दिन भी तूल पकड़े रहा। दोनों पक्ष एक दूसरे के खिलाफ अड़े हैं। डॉक्टर क्रॉस एफआईआर की मांग कर रहे हैं तो आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग पर वकीलों ने बृहस्पतिवार को भी धरना दिया।

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SRN case: Lawyers and doctors pitted against each other, patients wander from door to door
प्रदर्शन करते एसआरएन के जूनियर डॉक्टर और अधिवक्ता। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

एसआरएन अस्पताल में डॉक्टरों व वकीलों में मारपीट का मामला दूसरे दिन भी तूल पकड़े रहा। दोनों पक्ष एक दूसरे के खिलाफ अड़े हैं। डॉक्टर क्रॉस एफआईआर की मांग कर रहे हैं तो आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी की मांग पर वकीलों ने बृहस्पतिवार को भी धरना दिया। वहीं, डॉक्टर भी क्रॉस एफआईआर की मांग करते हुए ओपीडी बंद कर धरने पर बैठ गए। मरीजों को ओपीडी से बाहर कर दिया गया। उधर, इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन (एएमए) ने आज बंद का एलान किया है। इसके जवाब में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि हड़ताल करने वाले संस्थानों के खिलाफ कराई जाएगी।

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बुधवार को हड़ताल समाप्त करने पर राजी हुए जूनियर डॉक्टर बृहस्पतिवार को दोबारा धरने पर बैठ गए। उन्होंने सीसीटीवी में दिख रहे जूनियर डॉक्टर की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। इनका आरोप है कि सोशल मीडिया पर डॉक्टरों को धमकी मिल रही है। साथ ही आरोपियों की तरफ से कई लोग अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा का भरोसा जब नहीं मिलता हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। जूनियर डॉक्टरों ने सामूहिक तौर पर एक्स पर सीएम से मामले की शिकायत भी की है।

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इस दौरान पीएमएसएसवाई बिल्डिंग की ओपीडी में पहुंचे मरीजों को सुरक्षा कर्मियों ने बाहर कर दिया। उनसे कहा गया कि हड़ताल है इसलिए ओपीडी बंद रहेगी। कई गंभीर मरीज फर्श पर ही लेट गए। उप प्रधानाचार्य जेआर को समझाने पहुंचे। लेकिन, जेआर क्रॉस एफआईआर दर्ज करने पर अड़े रहे।इसके बाद, प्रमुख अधीक्षक कार्यालय में एसआईसी डॉ. नीलम सिंह, उप प्रधानाचार्य डॉ. मोहित जैन व अन्य सीनियर कंसल्टेंट ने जूनियर डॉक्टरों को बुलाकर समझाने का प्रयास किया। जूनियर डॉक्टरों ने कहा कि क्रॉस एफआईआर दर्ज होने के वह काम पर लौट आएंगे।

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प्राचार्य से मिले डीएम व पुलिस कमिश्नर

जिलाधिकारी मनीष वर्मा, पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार व एसीएम फर्स्ट सत्यम मिश्रा जेआर की हड़ताल को लेकर प्राचार्य डॉ. वीके पांडेय से मिलने मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जहां क्रॉस एफआईआर दर्ज करने का मामला उठा।

प्रार्थना पत्र लेने के बाद भी पुलिस क्रॉस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही है। इस कारण जूनियर डॉक्टर हड़ताल समाप्त नहीं कर रहे हैं। हड़ताल समाप्त करने का पूरा प्रयास किया गया। - डॉ. वीके पांडेय, प्राचार्य, एमएलएन मेडिकल कॉलेज

एएमए ने दिया समर्थन, आज बंद रहेंगे सभी निजी अस्पताल

इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन (एएमए) बृहस्पतिवार को हड़ताल पर बैठे जूनियर डॉक्टरों के समर्थन में उतर गया। एएमए ने शुक्रवार को हड़ताल का एलान किया है। ऐसे में जिले के सभी निजी चिकित्सालयों की स्वास्थ्य सेवाएं ठप रहेंगी। अध्यक्ष डॉ. एके मिश्रा ने कहा कि डॉक्टरों की तरफ से की गई शिकायत पर एफआईआर दर्ज क्यों नहीं हो रही है। उनका कहना है कि शुक्रवार को टोकेन हड़ताल चिकित्सकों की तरफ से की जाएगी। ऐसे में एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो निजी चिकित्सालयों की स्वास्थ्य सेवाएं अनिश्चितकालीन बंद हो जाएंगी। 

निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे : राकेश पांडे

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश पांडे ने कहा कि हड़ताल से दबाव बनाने या ब्लैकमेल करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। निष्पक्ष तरीके से पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की गंभीरता से पड़ताल कर दोषी जूनियर डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो हम भी शांत नहीं बैठेंगे। उन्होंने कहा कि अगर निजी नर्सिंग होम और अस्पताल हड़ताल में शामिल होते हैं तो उनकी टीम मौके पर जाकर जांच करेगी। जहां हड़ताल होगी उनके खिलाफ क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत कार्रवाई कराई जाएगी।

उन्होंने कहा कि गंभीर या आपातकालीन स्थिति में अस्पताल और डॉक्टरों के लिए मरीज का उपचार करना अनिवार्य है। किसी भी हालत में मरीज को इलाज देने से मना नहीं किया जा सकता। राकेश पांडे ने कहा कि उनकी केवल यही मांग है कि सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर पर कार्रवाई की जाए और संबंधित संस्थान दोषी डॉक्टरों को निलंबित करें। उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टर संगठन दोषियों को बचाने के लिए हड़ताल का सहारा लेते हैं तो यह बेहद गंभीर विषय है। जनता को परेशान करने के लिए हड़ताल को हथियार बनाना स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ शासन, प्रशासन और मुख्यमंत्री से शिकायत कर लाइसेंस रद्द कराने की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे। 

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