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डॉक्टर के सेवा भाव से खार खाए बैठे हैं उनके ही साथी

Sat, 02 Jul 2016 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 02 Jul 2016 01:26 AM IST
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Spirit of service of doctors sulking his only companion
डॉ. द‌िलीप गुप्ता - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
एसआरएन अस्पताल में नौ महीनों में छह सौ मरीजों को पोस्टेट और किडनी के स्टोन से राहत दिलाने वाले डॉ. दिलीप कुमार की लोकप्रियता उनके ही कुछ साथी डॉक्टरों को रास नहीं आ रही है। उन्हें धमकी जी रही है कि इतनी सेवा मत करो। हैरान परेशान डॉक्टर तो चुप्पी साध गए लेकिन मेडिकल प्रशासन तक इसकी जानकारी पहुंच चुकी है। फिलहाल डॉ. दिलीप कुमार गरीब मरीजों को न्यूनतम खर्च पर बेहतर इलाज देने के अपने अभियान में लगे हैं। 
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मरीजों से बदसलूकी और लचर चिकित्सकीय सुविधा के लिए लिए बदनाम मंडल के सबसे बड़े स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में डॉ. दिलीप कुमार ने बहुत कम समय में अपने सेवाभाव और कुशल व्यवहार से लोकप्रियता हासिल कर ली। मरीज उन्हें भगवान का दूसरा रूप मानते हैं। जहां एक ओर दूसरे डॉक्टर मरीजों से बेरुखी से पेश आते हैं और इलाज के लिए उन्हें भटकाया जाता हैं, ऐसे में डॉक्टर दिलीप मरीजों से नम्रता से पेश आते हैं। वह प्रत्येक सोमवार को विभागाध्यक्ष डॉ. सबी अहमद के साथ ओपीडी में बैठ रहे हैं। कॉलेज प्रशासन उन्हें अलग से ओपीडी में बैठाने की तैयारी में है। इससे एसआरएन में आने वाले मरीजों को बहुत ही सहूलियत हुई है। गंभीर रूप से पीड़ित कई मरीजों की जान बचाई है। 

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एसआर डॉ. दिलीप कुमार गुप्ता ने मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से ही एमएस किया है। इसके बाद कोलकाता पीजीआई से एमसीएच करने चले गए। सितंबर 2015 से वह एसआरएन चिकित्सालय के सर्जरी विभाग में बतौर एसआर काम कर रहे हैं। तब से लेकर उन्होंने अब तक छह सौ मरीजों की प्रोस्टेट और किडनी में स्टोन की सर्जरी कर चुके हैं। एसआर डॉ. दिलीप कुमार के होने से गुर्दा एवं मूत्र रोग के परेशान मरीजों को राहत मिली है। सर्जरी विभाग में बतौर यूरोलॉजिस्ट प्रो. दिलीप चौरसिया और प्रो. सिद्धार्थ तैनात हैं।

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पिछले वर्ष शहर के एक सीनियर डॉक्टर (निजी प्रैक्टिसनर) के ऊपर हुए हमले के विरोध मेें चक्काजाम करने पर शासन ने उन्हें और कॉलेज के गैस्ट्रो विभाग में संविदा पर तैनात प्रो. मनीषा द्विवेदी के खिलाफ कार्रवाई कर दी। प्रो. मनीषा द्विवेदी की संविदा समाप्त कर दी गई थी, वहीं प्रो. चौरसिया को निलंबित कर उन्हें चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक के कार्यालय से संबद्ध कर जांच बैठा दी गई। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ गई। बहुत सारे मरीज निजी चिकित्सालयों में भटक रहे थे। इस बीच सितंबर 2015 में डॉ. दिलीप कुमार बतौर एसआर तैनात कर दिया गया। इससे मरीजों को राहत मिली। ओपीडी में परामर्श मिलने के साथ आसानी से सर्जरी होने लगी। हालांकि शासन ने मरीजों के हितों में ध्यान रखते हुए प्रो. मनीषा द्विवेदी की संविदा को निरंतर कर दिया, जबकि प्रो. दिलीप चौरसिया को बहाल कर दिया। उनकी ओपीडी शुरू हो गई है।

 

विभागीय सूत्रों के मुताबिक डॉ. दिलीप कुमार से कुछ वरिष्ठ चिकित्सक खार खाए बैठे हैं और उनको डॉ. दिलीप कुमार का पूरी तन्मयता से मरीजों का इलाज करना रास नहीं आ रहा है। उन्हें धमकी दी जा रही है। बहरहाल विभागाध्यक्ष डॉ. सबी अहमद कहते हैं कि एसआर डॉ. दिलीप कुमार उनके साथ ओपीडी में बैठ रहे हैं। गुर्दा एवं मूत्र रोग के मरीज उनकी ओपीडी में आकर दिखा सकते हैं। उधर, मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह कहते हैं कि एसआर दिलीप के लिए अलग से ओपीडी में बैठाया जाएगा। इसके लिए विभागाध्यक्ष से बातचीत चल रही है। जल्दी ही प्रक्रिया पूरी कर अलग से ओपीडी शुरू कराई जाएगी।     

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