फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Special on Vasant Panchami: Spring in the form of knowledge removes the darkness of ignorance.

वसंत पंचमी पर विशेष : अज्ञान रूपी अंधकार को दूर करता है ज्ञान रूपी वसंत, इसी दिन हुआ था मां सरस्वती का अवतरण

Mon, 12 Feb 2024 05:45 PM IST
विनोद सिंह डॉ. शंकर सुवन सिंह
डॉ. शंकर सुवन सिंह Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 12 Feb 2024 05:45 PM IST
सार

शुक्ल पक्ष में चंद्र की कलाएं बढ़ती हैं और कृष्ण पक्ष में घटती हैं। चंद्र की बढ़ते कला की पंचमी तिथि को शुक्ल पंचमी कहते हैं। आत्मिक ज्ञान का आयाम अनंत है। मां सरस्वती को अनेकों नामों से जाना जाता है, जैसे शारदा, वीणावादिनी, वीणापाणि, वागेश्वरी, वाणी, भारती, महाश्वेता, ब्राह्मणी, ज्ञानदा, प्रज्ञा, वाग्देवी आदि। वसंत पंचमी माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाया जाता है।

विज्ञापन
Special on Vasant Panchami: Spring in the form of knowledge removes the darkness of ignorance.
डॉ. शंकर सुवन सिंह, शिक्षाविद् - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विज्ञापन

वसंत ऋतु नवीनता का प्रतीक है। नवीनता उल्लास को जन्म देती है। उल्लास सुख समृद्धि का द्योतक है। सुख शांति का वास ज्ञान में है। इस ऋतु में प्रकृति अपना नया रूप दिखती है। वसंत पंचमी ज्ञान की देवी सरस्वती को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता सरस्वती का अवतरण इसी दिन हुआ था। साहित्य, संगीत और कला की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना इस दिन की जाती है। साहित्य बिना चिंतन के नहीं लिखा जा सकता। संगीत बिना भावना के असंभव है और कला बिना संवेदना के।

साहित्य संगीत और कला क्रमशः चिंतन, भावना और संवेदना की प्रतिमूर्ति हैं। मां सरस्वती में चिंतन,भावना और संवेदना का समन्वय है। ज्ञान रूपी सरस्वती ने अज्ञान रूपी अन्धकार (राक्षस) को मारने के लिए वसंत रूपी ऋतु को पैदा किया। वर्ष 2024 में वसंत पंचमी का पर्व 14 फरवरी को मनाया जा रहा है। आत्मिक ज्ञान का आयाम अनंत है। आत्मिक ज्ञान की कोई परिसीमा नहीं होती। ज्ञान का अस्तित्व भौतिक और आध्यात्मिक ज्ञान से है। शारीरिक क्रिया द्वारा प्राप्त ज्ञान भौतिक है। आत्मिक क्रिया द्वारा प्राप्त ज्ञान आध्यात्मिक है।

विज्ञापन


आध्यात्मिक ज्ञान दैवीय शक्तियों से ओतप्रोत होता है। भौतिक ज्ञान सांसारिक शक्तियों से ओतप्रोत होता है। आत्मिक ज्ञान में सूक्ष्मता होती है। सांसारिक ज्ञान में स्थूलता होती है। जो दृश्य है वो स्थूल है और जो अदृश्य है वो सूक्ष्म है। सूक्ष्मता का वास अनुभूति में है। स्थूलता का सम्बन्ध अनुभूति से नहीं है। स्थूलता स्वार्थ से फलित होती है। सूक्ष्मता स्व से फलित होती है। सांसारिक सुख एक दूसरे के स्वार्थ पर टिका है। आत्मिक सुख स्व की चेतना पर टिका है।
विज्ञापन
विज्ञापन


स्थूलता में दिखावा है। भौतिक आँखों से देखी जाने वाली प्रत्येक वस्तु (सजीव या निर्जीव) स्थूलता का परिचायक है। तीसरी आंख ( पीनियल ग्लैंड) से महसूस की जाने वाली प्रत्येक वस्तु (सजीव या निर्जीव) सूक्ष्मता का परिचायक है। अध्यात्म, उपासना सिखाता है। स्व (ईश्वर) के समीप बैठना ही उपासना है। ध्यान उपासना की एक विधि है। आध्यात्मिक ज्ञान को लेकर जब आप भौतिक ज्ञान की तरफ बढ़ते हैं तब वो भौतिक ज्ञान आपको दुःख न देकर सुख देता है।


आत्मिक ज्ञान सांसारिक ज्ञान पर भरी पड़ता है। भारत की धरती पर ऐसे ऋषि मुनि हुए जिनके सामने विज्ञान नतमस्तक हो गया। देवरहा बाबा, नीम करोली बाबा, महाअवतार बाबा, लाहिड़ी महाशय, श्री युक्तेश्वर महाराज एवं परमहंस योगानंदा जी महाराज आदि ऐसे अनेक अद्वितीय छवि के महान संत हुए जिनके चमत्कार और दिव्यता की निशानी आज भी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed