{"_id":"69e8bbc8f07056c5910d0aae","slug":"sp-and-congress-are-anti-women-the-public-will-teach-them-a-lesson-keshav-prasad-2026-04-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj : पत्नी ने निरस्त कराया विवाह पंजीकरण और पति को पता ही नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj : पत्नी ने निरस्त कराया विवाह पंजीकरण और पति को पता ही नहीं
Wed, 22 Apr 2026 05:45 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 22 Apr 2026 05:45 PM IST
सार
पत्नी ने अपना विवाह पंजीकरण एक आवेदन देकर निरस्त करा लिया और पति को इस बारे में पता नहीं चला। जानकारी मिलने पर पति एआईजी स्टाम्प के पास पहुंचा और विवाह पंजीकरण बहाल करने की मांग की।
विज्ञापन
मैरिज सर्टिफिकेट
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
पत्नी ने अपना विवाह पंजीकरण एक आवेदन देकर निरस्त करा लिया और पति को इस बारे में पता नहीं चला। जानकारी मिलने पर पति एआईजी स्टाम्प के पास पहुंचा और विवाह पंजीकरण बहाल करने की मांग की। मामला तहसील सदर के उप निबंधक कार्यालय से जुड़ा है।
विज्ञापन
एक महिला पुलिसकर्मी और व्यवसायी का विवाह दो माह पहले हुआ था। दोनों ने तहसील सदर के उप निबंधक कार्यालय में अपना विवाह पंजीकृत कराया था। कुछ दिन पहले महिला पुलिसकर्मी ने तहसील सदर के उप निबंधक कार्यालय में विवाह पंजीकरण निरस्त कराने के लिए आवेदन किया और वहां से विवाह पंजीकरण निरस्त कर दिया गया।
विज्ञापन
जब पति को इसकी जानकारी मिली तो वह एआईजी स्टाम्प राकेश चंद्रा के पास पहुंचा और विवाह पंजीकरण बहाल करने की मांग की। पति का कहना था कि वह तलाक नहीं लेना चाहता, इसलिए वह एआईजी स्टाम्प के न्यायालय में अपील करेगा। इस बारे में एआईजी स्टाम्प का कहना है कि अगर उनके न्यायालय में यह मामला आता है तो दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद कोई फैसला लेंगे।
विज्ञापन
दो भाइयों को जारी किए अलग-अलग जाति प्रमाणपत्र
तहसील सदर से दो भाइयों को अलग-अलग जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने मामला सामने आया है। गोविंदपुर निवासी अभयराज पाल ने एसडीएम सदर को ज्ञापन देकर बताया कि उनके भाई जयराम पाल व सभी बेटों को ‘धनगर’ जाति का प्रमाणपत्र जारी किया गया है। ऐसे में दो सगे भाइयों को अलग-अलग जाति प्रमाणपत्र जारी करना सामाजिक एवं न्यायहित में नहीं है। एसडीएम से मांग की गई है कि प्रार्थी को धनगर जाति का प्रमाणपत्र जारी किया जाए।
(बरेली के विशेष ध्यानार्थ) कॉलोनी में ध्वस्तीकरण पर हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक
- बरेली के टीब्रीनाथ मंदिर नैनीताल रोड स्थित बीडीए कॉलोनी का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के टीब्रीनाथ मंदिर नैनीताल रोड स्थित बीडीए कॉलोनी में एक आवासीय संपत्ति के ध्वस्तीकरण पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मामले की अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई न की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने गीता गुप्ता व अन्य की ओर से दायर याचिका पर दिया है।
याचियों का आरोप है कि नगर निगम ने बिना किसी उचित आधार के उनकी संपत्ति पर लाल निशान लगा दिया और 15 अप्रैल 2026 की शाम को किरायेदार पंजाब नेशनल बैंक के नाम एक नोटिस चस्पा कर दिया। याचियों ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखते हुए अधिवक्ता ने दलील दी कि जिस संपत्ति (एचआईजी-1) को गिराने की धमकी दी जा रही है, उसका नक्शा बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) की ओर से विधिवत स्वीकृत है और निर्माण में किसी भी तरह की अवैधता नहीं है। यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय की ओर से वर्ष 2025 में ध्वस्तीकरण के संबंध में जारी किए गए दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।
वर्ष 2018 में भी इसी तरह लाल निशान लगाकर ध्वस्तीकरण की कोशिश की गई थी, लेकिन उस समय बीडीए के उपाध्यक्ष ने जांच के बाद इस कार्रवाई को अनुचित ठहराया था। अब छह साल बाद फिर से वही तरीका अपनाकर निवासियों को डराया जा रहा है।
वहीं, नगर निगम के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि सड़क पर कुछ निर्माण किए जाने की सूचना मिली थी, जिसके निस्तारण के लिए 22 अप्रैल 2026 की तिथि नियत की गई थी। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद विपक्षी दलों को दस दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया है। तब तक यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।