रेडियो स्टेशन पर संकट : तो अब नहीं सुनाई देगा- यह आकाशवाणी का इलाहाबाद केंद्र है...
लोक कलाकार हों या फिर रंगकर्मी या इस माटी की महक से जुड़े लोग, आकाशवाणी इलाहाबाद के विलय की चर्चा से सभी सन्न रह गए हैं। इसे लेकर कलाकारों में चिंता भी है और आक्रोश भी।
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यह आकाशवाणी का इलाहाबाद केंद्र है। आपको यह जानकारी देते हुए हमें बेहद अफसोस हो रहा है कि एक जमाने में उत्तर भारत के बड़े और सात दशक पुराने रेडियो स्टेशन को खत्म करने की तैयारी चल रही है। इसके साथ ही इलाहाबादी लोक कला-संस्कृति, बोली वाले वे सारे कार्यक्रम आवाज खो देंगे, जो इस इलाके के सैकड़ों लोक कलाकारों की पहचान हुआ करते थे।
लोक कलाकार हों या फिर रंगकर्मी या इस माटी की महक से जुड़े लोग, आकाशवाणी इलाहाबाद के विलय की चर्चा से सभी सन्न रह गए हैं। इसे लेकर कलाकारों में चिंता भी है और आक्रोश भी। उनका कहना है कि इससे अवधी-इलाहाबादी बोली, संस्कृति, परंपराओं, त्योहारों के संरक्षण का कार्य करने वाले इलाहाबाद आकाशवाणी केंद्र की भूमिका सीमित हो जाएगी। सेवानिवृत्त उद्घोषक अविनाश श्रीवास्तव प्रसार भारती के इस निर्णय से हैरान हैं।
वह बताते हैं कि इलाहाबाद केंद्र उत्तर भारत का सबसे समृद्ध आकाशवाणी है। महात्मा गांधी, पं. जवाहर लाल नेहरू, विनोवा भावे, ठुमरी गायिकाओं में रसूलनबाई, जद्दनबाई के अलावा निराला, सुमित्रानंदन पंत, राम कुमार वर्मा, अयोध्यासिंह उपाध्याय हरिऔध समेत कई दिग्गज साहित्यकारों की रिकार्डिंग यहां की धरोहर रही है। इसे खत्म करने से आकाशवाणी के एक सुनहरे युग का खात्मा हो जाएगा। इस केंद्र से बहरू काका, कक्का जी कहिन के अलावा नन्हीं दुनिया, पनघट जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम अब भी लोगों के जेहन में बने हुए हैं।
पंडवानी लोक गायिका मंजू नारायण बताती हैं कि इससे लोक कला संस्कृति के विकास की प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाएगी। प्रसार भारती कुछ नया तो कर नहीं रहा है और अब इलाहाबाद केंद्र को बंद करना खुद से पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा है। लोक गायक उदयचंद्र परदेशी कहते हैं कि लोक संस्कृति के प्रति इससे बड़ा अन्याय कुछ नहीं होगा। महिलाओं के सबसे लोकप्रिय अवधी कार्यक्रम पनघट, इलाहाबादी बोली में आने वाले किसानों के कार्यक्रम पंचायत घर के बंद होने से बड़े हिस्से में रेडियो श्रोताओं को मायूसी होगी। साथ ही आकाशवाणी के रूप में इस धरोहर की आत्मा मर जाएगी।
ये हैं रेडियो पर बजने वाले आकाशवाणी इलाहाबाद के लोकप्रिय कार्यक्रम
कक्का जी कहिन, बहरू काका, अवध प्रांत के संस्कार गीत, मौसम के गीत, ये पुरानी बस्तियां, आज इतवार है, ग्रामीण संस्कृति पर आधारित पंचायत घर, कानून और हम, ज्ञान-विज्ञान, संस्कृत वार्ता और हिंदी वार्ता, काव्यांजलि, विविध भारती इलाहाबाद, फोन टाइम, फोन इन आपकी पसंद, पत्रों पर आधारित आपकी पसंद, आपकी फरमाइश जैसे प्रसारण रेडियो श्रोताओं के बीच बेहद लोकप्रिय रहे हैं।
उद्घोषकों-कंपेयरों ने उठाई आवाज, संस्कृति के लिए इलाहाबाद आकाशवाणी केंद्र का बने रहना जरूरी
उद्घोषक और कंपेयर आकाशवाणी के स्थानीय कार्यक्रम यहीं तैयार करने और प्रसारित करने की आवाज उठा रहे हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर को पत्र भेजने की तैयारी है। उनका कहना है कि इलाहाबाद आकाशवाणी केंद्र की आवाज को सीमित करने से यहां की कला और संस्कृति का बहुत नुकसान होगा। अवध के लोक संगीत, परंपराओं और कलाकारों के संरक्षण के लिए यह इलाहाबाद आकाशवाणी केंद्र का बने रहना बहुत जरूरी है।