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फर्जी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी कर रहे छह शिक्षकों की नौकरी जाएगी
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Six teachers working for fake certificates will get jobs
फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे बने अध्यापक, अब जाएगी नौकरी
0 बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य भारत ग्वालियर से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट का प्रमाणपत्र मान्य नहीं
0 हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही जांच, जांच में बोर्ड की वैधानिकता सही नहीं पाई गई
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। प्रयागराज, कौशांबी, कन्नौज सहित अन्य जिलों के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे छह शिक्षकों की नौकरी जानी तय है। इन सभी ने बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य भारत ग्वालियर से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करके नौकरी हासिल की है। इन शिक्षकों के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र संदिग्ध लगने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी कन्नौज और अन्य की याचिका पर हाईकोर्ट ने 26 मई 2017 को इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई को जांच में पता चला कि बिना मान्यता के बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य भारत ग्वालियर लोगों को फर्जी प्रमाणपत्र बांट रहा है।
बेसिक शिक्षा परिषद के सूत्रों का कहना है कि इस मामले में एक शिक्षक प्रयागराज और एक कौशांबी जनपद से हैं, जबकि दो शिक्षकों का मामला कन्नौज जिले का है, बाकी दो अन्य जिले से हैं। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की जांच में भी यह बोर्ड फर्जी पाया गया। अब फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी हासिल करने वालों पर कार्रवाई तय है। सीबीआई की ओर से फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य भारत ग्वालियर पर आरोप है कि बिना मान्यता के छात्रों को गुमराह कर उन्हें फर्जी प्रमाणपत्र दे रहा है। इस गैंग का पूरे देश में नेटवर्क होने के चलते ही 26 मई 2017 को इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की दो जजों की पीठ ने पूरे मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। कोर्ट में यह याचिका बीएसए कन्नौज एवं कुछ अभ्यर्थियों की ओर से की गई थी। इस मामले में यूपी बोर्ड सचिव की रिपोर्ट में भी बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य भारत ग्वालियर को फर्जी बताया गया है। बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य भारत बोर्ड ग्वालियर को परीक्षा लेने का अधिकार नहीं है।
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0 बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य भारत ग्वालियर से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट का प्रमाणपत्र मान्य नहीं
0 हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई कर रही जांच, जांच में बोर्ड की वैधानिकता सही नहीं पाई गई
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। प्रयागराज, कौशांबी, कन्नौज सहित अन्य जिलों के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे छह शिक्षकों की नौकरी जानी तय है। इन सभी ने बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य भारत ग्वालियर से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करके नौकरी हासिल की है। इन शिक्षकों के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के प्रमाणपत्र संदिग्ध लगने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी कन्नौज और अन्य की याचिका पर हाईकोर्ट ने 26 मई 2017 को इस मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई को जांच में पता चला कि बिना मान्यता के बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य भारत ग्वालियर लोगों को फर्जी प्रमाणपत्र बांट रहा है।
बेसिक शिक्षा परिषद के सूत्रों का कहना है कि इस मामले में एक शिक्षक प्रयागराज और एक कौशांबी जनपद से हैं, जबकि दो शिक्षकों का मामला कन्नौज जिले का है, बाकी दो अन्य जिले से हैं। सचिव बेसिक शिक्षा परिषद की जांच में भी यह बोर्ड फर्जी पाया गया। अब फर्जी प्रमाणपत्र के सहारे नौकरी हासिल करने वालों पर कार्रवाई तय है। सीबीआई की ओर से फर्जी डिग्री उपलब्ध कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
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बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य भारत ग्वालियर पर आरोप है कि बिना मान्यता के छात्रों को गुमराह कर उन्हें फर्जी प्रमाणपत्र दे रहा है। इस गैंग का पूरे देश में नेटवर्क होने के चलते ही 26 मई 2017 को इस मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की दो जजों की पीठ ने पूरे मामले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। कोर्ट में यह याचिका बीएसए कन्नौज एवं कुछ अभ्यर्थियों की ओर से की गई थी। इस मामले में यूपी बोर्ड सचिव की रिपोर्ट में भी बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजूकेशन मध्य भारत ग्वालियर को फर्जी बताया गया है। बोर्ड की रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य भारत बोर्ड ग्वालियर को परीक्षा लेने का अधिकार नहीं है।
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