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मां के खून से लथपथ हो गया था छह माह का मासूम
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Six months innocent was soaked with mother's blood
- फोटो : SIRSA
थरवई। गंगापार के थरवई स्थित हसनपुर कोरारी गांव में रविवार की रात कातिलों ने सीमा और संतोष को सोते हुए ही मार दिया था। हत्यारों ने घर में घुसते ही दंपति पर धारदार हथियार से हमला किया। सीमा के बगल में सो रहा छह माह का मासूम नितिन मां के खून से लथपथ था तो दो साल का साहिल भी रोते-रोते सो गया था। घटना के बाद कातिलों ने घर के दोनों कमरों को ढंग से खंगाला। सोमवार सुबह जांच के दौरान आलमारी का लॉकर टूटा मिला। उसमें से रकम और गहने गायब थे। बर्तन भी घर के बाहर बिखरे थे। पुलिस का पहला शक घुमंतू गिरोह पर है। जिसे घर वालों ने नामजद कराया है, उसकी भी तलाश हो रही है।
संतोष प्रजापति स्व. शोभनाथ के चार बेटों में सबसे छोटा था। शादी के बाद भाइयों से बनी नहीं तो कुछ साल पहले उसने गांव के बाहर ही अलग घर बनवा लिया था। पास में चाय पान की दुकान खोलकर परिवार चला रहा था। सोमवार तड़के सात बजे तक जब वह नहीं उठा तो पासपड़ोस के लोग पहुंचे। मकान की बाउंड्री से दिख रहा था पूरा सामान बिखरा है। उन लोगों ने शोर मचाकर गांववालों को इकट्ठा किया। जब अंदर पहुंचे तो दृश्य देख सन्न रह गए। संतोष और सीमा की लाशें पड़ी थीं। नितिन मां के खून से लथपथ था। पुलिस को सूचना दी गई। डबल मर्डर की जानकारी होते ही कई थानों की फोर्स पहुंच गई। फील्ड यूनिट ने मौके पर पहुंचे कर फिंगर प्रिंट तथा अन्य सुबूत इकट्ठे किए। गांववालों का कहना था कि भले ही संतोष ने अलग घर बनवा लिया था, लेकिन आर्थिक रूप से वह काफी कमजोर था।
एसपी गंगापार ने बताया कि बदमाशों ने रात में उसके घर से जिस तरह खंगाला है, उससे पुलिस का शक घुमंतू गिरोहों पर गहरा रहा है। हालांकि, संतोष के भाई शंकरलाल ने सराय इनायत के राजकुमार तथा अन्य अज्ञात को नामजद किया गया। संतोष की छह बहनें हैं। एक बहन बड़की की शादी सराय इनायत के नसीरापुर गांव में हुई है। राजकुमार बड़की के पड़ोस में रहता है। 15 अगस्त को वह संतोष की दुकान पर भी आया था। वहीं पर दोनों में कुछ कहासुनी हुई। इसके बाद मारपीट भी हुई। राजकुमार ने जाते-जाते जान से मारने की धमकी भी दी थी। एसपी के मुताबिक इन्हीं दोनों एंगल पर जांच चल रही है। राजकुमार अपने घर से फरार है। उसके घरवालों को पकड़ा गया है। घुमंतू गिरोहों की भी तलाश हो रही है।
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पुलिस पर दो बार पथराव, एसओ घायल, एसडीएम के आश्वासन पर माने
सुबह घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठे हो गए थे। संतोष के रिश्तेदार भी आ गए थे। सुबह करीब नौ बजे पुलिस ने पंचनामा के बाद शवों को उठाना चाहा तो ग्रामीणों के साथ-साथ परिवार की महिलाओं ने भी पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पत्थर लगने से एसओ थरवई कुलदीप तिवारी और एक सिपाही घायल हो गए। पुलिस ने उस समय कदम पीछे खींच लिए।
दस बजे एसपी गंगापार एनके सिंह ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों का कहना था कि दोनों बच्चे अनाथ हो गए हैं। उनकी परवरिश के लिए मुआवजे का एलान किया जाय। इसके बाद लाश उठाने देंगे। उन्होंने कहा कि यह बात वह प्रशासनिक अधिकारियों से बता देंगे, लेकिन गांववाले इस पर नहीं माने। उन्होंने दोबारा पथराव कर दिया। बाद में एसडीएम मौके पर पहुंचे और समझाया-बुझाया। आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद भी जब ग्रामीण नहीं माने तो एसपी ने रुख कड़ा कर लिया। दोनों महिलाओं को पकड़कर जीप में बिठा लिया गया। कहा गया कि अगर किसी ने पथराव किया तो उसके खिलाफ तुरंत रिपोर्ट दर्ज कर ली जाएगी। ग्रामीणों ने पुलिस पर ही स्थिति बिगाड़ने का आरोप लगाया।
चाइल्ड लाइन को फोन कर दिया था पुलिस ने
शव उठाने से पहले पुलिस बार-बार घरवालों से तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराने को कह रही थी, लेकिन कोई तैयार नहीं हो रहा था। इस पर पुलिस वाले कहने लगे कि जब एफआईआर नहीं दर्ज करा रहे हैं तो दोनों मासूम बच्चों को क्या पालेंगे। इसके बाद किसी ने चाइल्ड लाइन को फोन कर दिया। हालांकि, इसके बाद भाई शंकर लाल ने तुरंत तहरीर दी।
भाइयों से अलग रहता था संतोष
शादी के बाद संतोष की भाइयों से पटी नहीं तो उसने गांव के बाहर घर बनवा लिया। उसके सबसे बड़े भाई शंकरलाल गांव में खेतीबारी करते हैं। दूसरे नंबर के पुन्नी लाल मुंबई में रहते हैं। तीसरा पृथ्वीपाल लोहगरा में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत है। छह बहनें भी हैं। सभी की शादी हो चुकी है।
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संतोष प्रजापति स्व. शोभनाथ के चार बेटों में सबसे छोटा था। शादी के बाद भाइयों से बनी नहीं तो कुछ साल पहले उसने गांव के बाहर ही अलग घर बनवा लिया था। पास में चाय पान की दुकान खोलकर परिवार चला रहा था। सोमवार तड़के सात बजे तक जब वह नहीं उठा तो पासपड़ोस के लोग पहुंचे। मकान की बाउंड्री से दिख रहा था पूरा सामान बिखरा है। उन लोगों ने शोर मचाकर गांववालों को इकट्ठा किया। जब अंदर पहुंचे तो दृश्य देख सन्न रह गए। संतोष और सीमा की लाशें पड़ी थीं। नितिन मां के खून से लथपथ था। पुलिस को सूचना दी गई। डबल मर्डर की जानकारी होते ही कई थानों की फोर्स पहुंच गई। फील्ड यूनिट ने मौके पर पहुंचे कर फिंगर प्रिंट तथा अन्य सुबूत इकट्ठे किए। गांववालों का कहना था कि भले ही संतोष ने अलग घर बनवा लिया था, लेकिन आर्थिक रूप से वह काफी कमजोर था।
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एसपी गंगापार ने बताया कि बदमाशों ने रात में उसके घर से जिस तरह खंगाला है, उससे पुलिस का शक घुमंतू गिरोहों पर गहरा रहा है। हालांकि, संतोष के भाई शंकरलाल ने सराय इनायत के राजकुमार तथा अन्य अज्ञात को नामजद किया गया। संतोष की छह बहनें हैं। एक बहन बड़की की शादी सराय इनायत के नसीरापुर गांव में हुई है। राजकुमार बड़की के पड़ोस में रहता है। 15 अगस्त को वह संतोष की दुकान पर भी आया था। वहीं पर दोनों में कुछ कहासुनी हुई। इसके बाद मारपीट भी हुई। राजकुमार ने जाते-जाते जान से मारने की धमकी भी दी थी। एसपी के मुताबिक इन्हीं दोनों एंगल पर जांच चल रही है। राजकुमार अपने घर से फरार है। उसके घरवालों को पकड़ा गया है। घुमंतू गिरोहों की भी तलाश हो रही है।
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पुलिस पर दो बार पथराव, एसओ घायल, एसडीएम के आश्वासन पर माने
सुबह घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण इकट्ठे हो गए थे। संतोष के रिश्तेदार भी आ गए थे। सुबह करीब नौ बजे पुलिस ने पंचनामा के बाद शवों को उठाना चाहा तो ग्रामीणों के साथ-साथ परिवार की महिलाओं ने भी पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पत्थर लगने से एसओ थरवई कुलदीप तिवारी और एक सिपाही घायल हो गए। पुलिस ने उस समय कदम पीछे खींच लिए।
दस बजे एसपी गंगापार एनके सिंह ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों का कहना था कि दोनों बच्चे अनाथ हो गए हैं। उनकी परवरिश के लिए मुआवजे का एलान किया जाय। इसके बाद लाश उठाने देंगे। उन्होंने कहा कि यह बात वह प्रशासनिक अधिकारियों से बता देंगे, लेकिन गांववाले इस पर नहीं माने। उन्होंने दोबारा पथराव कर दिया। बाद में एसडीएम मौके पर पहुंचे और समझाया-बुझाया। आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद दिलाने का प्रयास किया जाएगा। इसके बाद भी जब ग्रामीण नहीं माने तो एसपी ने रुख कड़ा कर लिया। दोनों महिलाओं को पकड़कर जीप में बिठा लिया गया। कहा गया कि अगर किसी ने पथराव किया तो उसके खिलाफ तुरंत रिपोर्ट दर्ज कर ली जाएगी। ग्रामीणों ने पुलिस पर ही स्थिति बिगाड़ने का आरोप लगाया।
चाइल्ड लाइन को फोन कर दिया था पुलिस ने
शव उठाने से पहले पुलिस बार-बार घरवालों से तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराने को कह रही थी, लेकिन कोई तैयार नहीं हो रहा था। इस पर पुलिस वाले कहने लगे कि जब एफआईआर नहीं दर्ज करा रहे हैं तो दोनों मासूम बच्चों को क्या पालेंगे। इसके बाद किसी ने चाइल्ड लाइन को फोन कर दिया। हालांकि, इसके बाद भाई शंकर लाल ने तुरंत तहरीर दी।
भाइयों से अलग रहता था संतोष
शादी के बाद संतोष की भाइयों से पटी नहीं तो उसने गांव के बाहर घर बनवा लिया। उसके सबसे बड़े भाई शंकरलाल गांव में खेतीबारी करते हैं। दूसरे नंबर के पुन्नी लाल मुंबई में रहते हैं। तीसरा पृथ्वीपाल लोहगरा में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत है। छह बहनें भी हैं। सभी की शादी हो चुकी है।