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दाल में उबाल, कड़वी होने लगी चीनी

Thu, 21 Apr 2016 02:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 21 Apr 2016 02:04 AM IST
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Simmer the lentils , became bitter Chinese
foods to keep young - फोटो : getty images
दालों की बढ़ती कीमतों ने एक बार फिर आम आदमी के किचन का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। अरहर, चना, उड़द, मूंग, मटर की दालों में पिछले 15 दिन में एक से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल तक की तेजी आई है। इसका सीधा असर फुटकर बाजार पर है, जहां दालों की कीमतों में प्रतिकिलो 10 से 20 रुपये तक की तेजी आई है। यही हाल चीनी का है। वहीं पखवारे भर पहले तक 35-36 रुपये प्रतिकिलो बिक रही चीनी छलांग मारते हुए प्रतिकिलो 40 रुपये के पार पहुंच गई है। मौसम की बेरुखी और फसल कम होने के कारण इन खाद्य पदार्थों की कीमतों में अभी और तेजी की संभावना जताई जा रही है। 
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कहीं सूखा तो कहीं बेमौसम बारिश का सीधा असर फसलों पर पड़ा है। कई राज्यों में सूखे के कारण फसल नहीं उग सकी या फिर उम्मीद से कम काफी कम पैदावार हुई। मौसम की मार इससे सबसे ज्यादा दालों पर ही पड़ी है। नतीजा यह हुआ कि बाजारों में इनकी कीमतें फिर रफ्तार पकड़ने लगी हैं। आमतौर पर घरों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल अरहर दाल का होता है। उसके बाद चना दाल फिर मटर और उड़द, मूंग आदि दालें लोग इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनकी बढ़ती कीमतें लोगों पर भारी पड़ने लगी है।
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हालत यह है कि पखवारे भर पहले तक अरहर की जो दाल 12000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिक रही थी, उसकी कीमत में दो हजार का उछाल आ गया है और प्रति क्विंटल 14000 रुपये के स्तर तक पहुंच गई है। कमोबेश यही स्थिति चीनी की है, जो तकरीबन हर घर में इस्तेमाल होती है। इसकी बढ़ती कीमत ने चाय से लेकर मिठाई तक का स्वाद बिगाड़ना शुरू कर दिया है। चीनी के साथ पूरे उत्तर भारत में दालों में सबसे ज्यादा अरहर की ही खपत होती है, लेकिन इनकी मांग ज्यादा और उपलब्धता कम होने का असर कीमत पर पड़ रहा है। 
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दो सौ के पार पहुंचने पर आएगी आयात की याद
अरहर दाल की कीमत एक बार फिर रफ्तार पकड़ने लगी है, लेकिन इसे लेकर केंद्र सरकार अब तक गंभीर नहीं है। मौसम की वजह से पैदावार कम हुई, सरकार इससे भलीभांति वाकिफ है, लेकिन इसके लिए दाल के आयात और पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता को लेकर गंभीर नहीं है। सरकार शायद तब जागेगी, जब अरहर दाल की कीमत 200 प्रतिकिलो या उसके पार पहुंच जाएगी। गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश चंद्र केसरवानी का कहना है कि दाल की फसल तीन वर्ष से प्रभावित है। सरकार ने इस बार गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ा दिया, जिसका असर चीनी के भाव पर दिख रहा है। कहा कि अरहर दाल के आयात के लिए सरकार को अभी से कदम उठाने चाहिए, क्योंकि समय रहते पर्याप्त मात्रा में दाल उपलब्ध हो जाएगी तो कीमत पर नियंत्रण लगेगा, वर्ना एक बार फिर अरहर आम लोगों की पहुंच से बाहर होगी।
थोक मंडी (कीमत प्रति क्विंटल में)
              वर्तमान             15 दिन पहले
दाल अरहर  14000                12000
दाल चना      7000                  6000
दाल उड़द   13000                11000
दाल मटर     4000                  3500
चीनी          3700                  3600
खुदरा बाजार (कीमत प्रतिकिलो में)
                      वर्तमान             15 दिन पहले
दाल अरहर         150-160             130-140
दाल चना            80                     70
दाल उड़द छिलका 160                    130
दाल उड़द धुली    190                    170
चीनी                40-42                 35-36
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